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शिमला की संजौली मस्जिद पूरी अवैध, कोर्ट ने दिया तोड़ने का आदेश

Sanjauli Masjid: पिछले 15 साल से हिमाचल प्रदेश वक्फ बोर्ड, Shimla की संजौली मस्जिद की जमीन पर मालिकाना हक साबित नहीं कर पाया. वक्फ बोर्ड ने पुरानी मस्जिद गिराते समय नगर नियम के कानून का पालन नहीं किया. पुरानी मस्जिद गिरने के बाद यह जमीन हिमाचल प्रदेश सरकार के पास चली गई थी.

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Shimla Sanjauli Masjid
शिमला की संजौली मस्जिद को नगर निगम कोर्ट ने गिराने का आदेश दिया. (India Today)
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मौ. जिशान
3 मई 2025 (अपडेटेड: 3 मई 2025, 10:15 PM IST)
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Shimla Sanjauli Mosque: शिमला की विवादित संजौली मस्जिद को लेकर बड़ा फैसला आया है. नगर निगम कमिश्नर कोर्ट (MC कोर्ट) ने इस मस्जिद की निचली दो मंजिलों को गैरकानूनी बताते हुए गिराने के आदेश दिए हैं. इससे पहले ऊपर की तीन मंजिल को तोड़ने के आदेश दिए गए थे. ऐसे में सभी मंजिलें गैरकानूनी घोषित हो गई हैं, यानी पूरी मस्जिद को ही गिराया जाएगा.

इंडिया टुडे से जुड़े विकास शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, शिमला नगर निगम कमिश्नर भूपेंद्र अत्री ने शनिवार, 3 मई को इस मामले में फाइनल आदेश सुनाया. उन्होंने कहा कि मस्जिद की नीचे की दो मंजिलें भी गैरकानूनी हैं, इसलिए इन्हें भी तोड़ा जाए. इससे पहले 5 अक्टूबर 2024 को कोर्ट ने मस्जिद की ऊपर की तीन मंजिलों को गिराने के आदेश दिए थे.

लोकल रेजिडेंट कमेटी के वकील जगतपाल ने आज के दिन को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा,

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उन्होंने कहा कि पूरी मस्जिद को गैरकानूनी माना गया है. ऑर्डर में साफ कहा गया है कि पिछले 15 साल से हिमाचल प्रदेश वक्फ बोर्ड इस जमीन का मालिकाना हक साबित नहीं कर पाया. वक्फ बोर्ड ने पुरानी मस्जिद गिराते समय नगर नियम के कानून का पालन नहीं किया. पुरानी मस्जिद गिरने के बाद यह जमीन हिमाचल प्रदेश सरकार के पास चली गई थी.

जगतपाल ने भी बताया कि पिछले 15 साल से वक्फ बोर्ड MC ऑफिस से गार्बेज और टैक्स का भी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं ले पाया और कोर्ट में जमा नहीं कर पाया. जगतपाल के मुताबिक, कोर्ट ने बताया कि पहले बिना इजाजत पुरानी मस्जिद गिराई गई, और बाद में बिना सैंक्शन के नया निर्माण नहीं किया जा सकता था.

वहीं, वक्फ बोर्ड के वकील बीएस ठाकुर ने कहा,

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उन्होंने आगे कहा कि कोर्ट का डिटेल ऑर्डर देखने के बाद ही आगे अपील के बारे में फैसला किया जाएगा.

इस केस को लेकर इलाके के लोग काफी समय से परेशान थे. लोकल रेजिडेंट कमेटी ने इसे लेकर हाईकोर्ट में याचिका भी डाली थी. हाईकोर्ट ने 21 अक्टूबर 2024 को नगर निगम कमिश्नर को आदेश दिया था कि वो आठ हफ्तों में फाइनल फैसला सुनाएं. हालांकि फैसला तय समय पर नहीं हो पाया, इसलिए लोगों ने एक और याचिका दायर की. इसके बाद कोर्ट ने 8 मई तक फैसला सुनाने को कहा. इसी के तहत अब 3 मई को फाइनल ऑर्डर आ गया है.

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