'ये हम पर हुक्म चलाएंगे', कोर्ट में किस पर भड़क गए CJI सूर्यकांत?
याचिकाकर्ता के पिता ने CJI के भाई को फोन कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताई. जिसकी सूचना CJI को मिली. इस घटना का जिक्र CJI ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान की.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत बुधवार, 25 मार्च को मेडिकल से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने याचिकाकर्ता के पिता को कड़ी फटकार लगा दी. वजह थी कि उन्होंने केस को लेकर सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत के भाई को फोन किया था. कॉल पर उन्होंने न सिर्फ केस केस के बारे में बात की बल्कि सीजेआई के फैसले पर भी सवाल उठाए. इससे नाराज CJI ने सख्ती से कहा कि क्या वो उन पर हुक्म चलाएंगे. उन्होंने वकील से ये भी पूछा कि वो बताएं कि याचिकाकर्ता के पिता के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए?
Live Law की रिपोर्ट के मुताबिक, मामला हरियाणा के निखिल कुमार पुनिया और एकता पुनिया नाम के भाई-बहन से जुड़ा हुआ है. उनका जन्म एक जाट परिवार में हुआ था लेकिन बाद में उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया. इसके बाद से ही वो एक मेडिकल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स में एडमिशन के लिए अल्पसंख्यक आरक्षण की मांग कर रहे हैं. मामला बढ़ने पर दोनों भाई-बहन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
बीती 28 जनवरी को इस मामले की पहली सुनवाई हुई. इस केस की सुनवाई CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच कर रही थी. बेंच ने दोनों के धर्म परिवर्तन पर संदेह जताया था. साथ ही याचिकाकर्ताओं के अल्पसंख्यक प्रमाण पत्रों की जांच करने का आदेश दिया था. बेंच ने अपनी टिप्पणी में इसे ‘एक नए तरह का फ्रॉड’ बताया. बुधवार, 25 मार्च को फिर इस मामले की सुनवाई तय हुई थी लेकिन इससे पहले ही याचिकाकर्ता के पिता ने CJI के भाई को फोन कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताई.
ये बात CJI को पता चल गई. कोर्ट में घटना का जिक्र करते हुए सीजेआई ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा,
आपके क्लाइंट के पिता के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए? क्या आपको पता है कि उन्होंने क्या किया है? या मुझे यह बात को खुली अदालत में बताना चाहिए? उनकी हिम्मत कैसे हुई कि उन्होंने मेरे भाई को फोन करके पूछा कि CJI ने यह आदेश कैसे दे दिया? क्या वह मुझे हुक्म चलाएंगे?
CJI ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि अगर आपका क्लाइंट ये सब कर रहा है तो एक वकील के नाते आपको सबसे पहले केस से खुद को अलग कर लेना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि भले ही वह भारत से बाहर कहीं भी छिप जाए लेकिन उन्हें (CJI) पता है कि ऐसे लोगों से कैसे निपटना है. याचिकाकर्ता के पिता के इस व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए सीजेआई ने कहा,
मुझे धमका रहे हैं! ऐसी हिम्मत दोबारा कभी मत करना.
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बता दें कि याचिकाकर्ता के वकील ने CJI को बताया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने इसके लिए CJI से माफी भी मांगी है.
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