The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Saying I will return as your son a NEET aspirant took his own life

NEET री-एग्जाम ने ली एक और बेटे की जान, आखिरी मैसेज में लिखा- 'मां, अगले जन्म...'

नीट परीक्षा और रिजल्ट के तनाव ने एक और स्टूडेंट की जान ले ली. महाराष्ट्रे के हिंगोली में रहने वाले 18 साल के सुशील ढगे ने खुदकुशी कर ली. परिवार ने बताया कि नीट री-एक्जाम के बाद से वह लगातार तनाव में था.

Advertisement
pic
26 जून 2026 (अपडेटेड: 26 जून 2026, 04:49 PM IST)
Saying I will return as your son a NEET aspirant took his own life
पेपर लीक, री-एग्जाम के तनाव से आकर एक और स्टूडेंट ने जान दे है (PHOTO-ITG)
Quick AI Highlights
Click here to view more

“मां अगले जन्म फिर तेरी कोख में आऊंगा…” दो साल की मेहनत, डॉक्टर बनने का सपना और एक इम्तिहान, जिसके बाद मां के नाम ये शब्द कहकर एक होनहार स्टूडेंट ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. एक परिवार की पूरी दुनिया बदल गई.  महाराष्ट्र के हिंगोली से आई ये खबर सिर्फ ‘एक’ स्टूडेंट की नहीं है. ये उस दबाव और मेंटल प्रेशर की कहानी है, जिससे देश के लाखों बच्चे गुजरते हैं. इस बार, NEET-UG 2026 से जुड़ी अनिश्चितता, पेपर लीक, री-एग्जाम और विवादों के बीच, एक और परिवार ने अपने बेटे को खो दिया है.

इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार अभिषेक पांडेय की रिपोर्ट के मुताबिक, 18 साल का ‘सुशील ढगे’ पिछले दो साल से NEET की तैयारी कर रहा था. वह महाराष्ट्र के हिंगोली का रहने वाला था. परिवार का कहना है कि इसी साल सुशील ने परीक्षा दी थी. लेकिन परीक्षा उम्मीद के मुताबिक नहीं होने के बाद वह पिछले कुछ दिनों से काफी परेशान रहने लगा. घटना से पहले सुशील ने अपने परिवार के लिए एक वीडियो रिकॉर्ड किया. उस वीडियो में सुशील ढगे ने अपनी मां से माफी मांगी और परिवार के लिए अपना प्यार जताया. कुछ ही वक्त बाद, परिवार को खबर मिली की सुशील अब इस दुनिया में नहीं रहा. इस घटना के बाद पूरे इलाके में मातम का माहौल है.

री-एग्जाम के बाद से परेशान था सुशील

परिवार बताता है कि सुशील का सपना डॉक्टर बनने का था. इसी सपने के लिए वो लगातार मेहनत कर रहा था. लेकिन नीट यूजी री-एग्जाम के बाद उनके व्यवहार में बदलाव दिखाई देने लगा, और बाद में ये घटना हुई. फिलहाल, पुलिस और दूसरी एजेंसियां मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी जुटा रही हैं. लेकिन सवाल सिर्फ सुशील का नहीं है. पिछले कुछ दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसे कई परिवारों की कहानियां सामने आई हैं, जिनके बच्चे डॉक्टर बनने का ख्वाब देख रहे थे. 

ऐसा ही एक मामला तमिलनाडु से भी सामने आया है. तमिलनाडु के कोयंबटूर में 19 साल की अनुकीर्तना मेडिकल कॉलेज में दाखिले का इंतजार कर रही थी. लेकिन NEET परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा का ऐलान होने के बाद वो बेहद चिंतित थी. परिवार के मुताबिक, उसने अपने रिश्तेदारों को भेजे गए मैसेज में लिखा था कि दोबारा एग्जाम देने से डर लग रहा है. और पिता ने उन पर जो खर्च किया है, उसका सामना कैसे करें, यह समझ नहीं आ रहा. इसके बाद परिवार अनुकीर्तना को हॉस्पिटल लेकर पहुंचा, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. अब उनका परिवार पूरे मामले में जवाबदेही की मांग कर रहा है.

पूरे देश में स्टूडेंट्स की जान जा रही

ऐसा नहीं है कि ऐसी घटनाएं सिर्फ इक्का-दुक्का हैं. गुजरात के अहमदाबाद से भी NEET की तैयारी कर रहे 17 साल के एक स्टूडेंट की मौत का मामला भी सामने आया है. इससे पहले देहरादून और लखनऊ से भी ऐसे मामलों की खबरें आई थीं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के 21 साल के ऋतिक मिश्रा का यह तीसरा नीट अटेम्प्ट था. परिवार का कहना था कि इस बार उसे अपने सलेक्शन का पूरा यकीन था. लेकिन एग्जाम कैंसिल हो जाने के बाद वह तनाव में चला गया. दिल्ली की अंशिका पांडे भी कई साल से तैयारी कर रही थी. उसकी जुड़वा बहन ने कहा कि पिछली बार अंशिका सिर्फ 04 Marks से ही पीछे रह गई थी और इस बार उसे पूरा भरोसा था कि उसका सलेक्शन हो ही जाएगा.

राजस्थान, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र और दूसरे प्रदेशों से भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं. अलग-अलग मामलों में पुलिस दूसरे पर्सनल या Academic Reasons की भी जांच कर रही है. लेकिन इतना जरूर है कि नीट एग्जाम होना,पेपर लीक का मामला सामने आना, फिर एग्जाम कैंसिल होना और फिर री-एग्जाम होना. इन सब से जुड़ी अनिश्चितता बार-बार इन घटनाओं के सेंटर में दिखाई दे रही है.

पेपर लीक, री-एग्जाम और लाखों परिवारों का मानसिक तनाव

3 मई को नीट यूजी 2026 में करीब 23 लाख स्टूडेंट्स ने एग्जाम दिया था. बाद में पेपर लीक के आरोप लगे. जिनकी जांच के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और फिर दोबारा, 21 जून को, एग्जाम कराने का फैसला लिया गया.

यही वो एग्जाम है, जिसके ज़रिए देशभर के MBBS, BDS, AYUSH, Nursing और AIIMS जैसे बड़े-बड़े Medical Courses में दाखिला लेने का मौका मिलता है. इसमें अलग-अलग बड़े-बड़े Medical Institutes की एक लाख से ज्यादा सीट्स में एडमिशन मिलता है. यानी हर साल लाखों बच्चे इसी एक एग्जाम के भरोसे अपने भविष्य का सपना देखते हैं.

लेकिन इस तरह की घटनाएं एक बार फिर ये सवाल पूछने पर मजबूर करती हैं कि क्या ये ‘भविष्य’ के सपने दिखाने वाला सिस्टम, अब मासूम बच्चों की जान लेने वाला कातिल बन गया है? इस सिस्टम को दुरुस्त करने की जरूरत तो है. साथ ही जरूरत है एक ऐसा माहौल बनाने की, जहां महज एक एग्जाम का रिजल्ट किसी बच्चे को अपनी पूरी जिंदगी का फैसला न लगने लगे. क्योंकि सच यही है कि कोई भी परीक्षा, कितनी भी बड़ी हो, मगर वो कभी किसी की जिंदगी से बड़ी नहीं हो सकती.

अगर आप या आपका कोई परिचित तनाव, घबराहट या इस तरह के विचारों से गुज़र रहा है, तो मदद लेने में बिल्कुल भी मत हिचकिचाइए. भारत सरकार की National Tele-MANAS Helpline 1 4 4 1 6  या  फिर 1800-891-4416 पर Experts से बात करके सलाह लीजिए. मदद मांगना कमजोरी नहीं है. कई बार वही सबसे ‘बहादुर–कदम’ होता है. 

(यह भी पढ़ें: NEET की तैयारी कर रहे एक और छात्र की आत्महत्या से मौत, वीडियो बनाकर वजह बताई)

वीडियो: नीट पेपर लीक पर कोहली, अक्षय और विकास दिव्यकीर्ति चुप क्यों?

Advertisement

Advertisement

()