संजय निषाद मंच पर रो दिए, अखिलेश का तंज, 'हम थे जिनके सहारे वो हुए न हमारे'
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने गोरखपुर में निषाद समुदाय को अनुसूचित जाति का दर्जा दिए जाने को लेकर रैली का आयोजन किया था. इस रैली में निषाद समुदाय की मौजूदा स्थिति पर बात करते करते वो भावुक हो गए और मंच पर फूट-फूट कर रोने लगे.

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. सियासी दल इसके लिए माहौल बनाने में जुट गए हैं. इस बीच योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्री और निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद ने गोरखपुर में एक रैली आहूत की थी. रैली में भाषण देते-देते संजय निषाद भावुक हो गए. भावनाओं का आवेग आंखों से छलक पड़ा. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वीडियो पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने तंज किया है.
निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने 22 मार्च को निषाद समुदाय को अनुसूचित जाति का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर गोरखपुर के महंत दिग्विजय नाथ पार्क में एक रैली का आयोजन किया था. रैली में जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा,
निषादों को जिन्होंने बर्बाद किया है, उन्हें तुम अपने वोट से बर्बाद करो. वोट से बर्बाद कर दो, तब जाकर वो तुम्हारा काम करेंगे. तुम्हारी बहन-बेटियों की इज्जत लूटी जा रही है. आज के दिन में तुम्हारे बच्चे कहां-कहां नहीं भीख मांग रहे हैं. आज के दिन में हमारे लोगों का वोट छीना गया है. मैं तो यही कहूंगा कि अपनी पार्टी खड़े करो. खड़े हो जाओ कुर्सी से. पार्टी खड़ी करो. घर-घर झंडा लगाओ.
इस दौरान संजय निषाद भावुक हो गए. भाषण के दौरान फूट-फूट कर रोने लगे. उन्होंने विपक्ष पर निषाद समुदाय का हक छीनने का आरोप लगाया. संजय निषाद ने कहा,
तुम्हारी बेटी की जब इज्जत लूटी जाती है. ये विरोधी इज्जत लूटने वाले के साथ खड़े होते हैं. तुम्हारा बेटा संजय है. जब सदन में आवाज उठाता हूं तो बुलडोजर चलता है. तब तुम्हारी बेटी को न्याय मिलता है.
सपा और बसपा को निशाने पर लेते हुए संजय निषाद ने कहा,
आपका हिस्सा ऊंची जाति वाले नहीं खा रहे हैं. सपा और बसपा खा रही है. आपने हाथी का बटन दबाया और आपकी रोजी रोटी छीन ली गई. संविधान में हमें अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है, इसलिए हमें अनुसूचित जाति में शामिल करने का आदेश जारी किया जाना चाहिए. 2013 में जब समाजवार्टी पार्टी सत्ता में थी तो हमसे शिक्षा छीन ली गई थी. अगर किसी ने निषादों की आवाज उठाई है तो वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं.
अखिलेश यादव ने संजय निषाद के वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संजय निषाद का वीडियो शेयर करते हुए लिखा,
ये भाजपा के साथ जाने पर पश्चाताप के आंसू हैं या प्रायश्चित के? पीड़ा बढ़ रही है. पीड़ित बढ़ रहे हैं. इसलिए पीडीए बढ़ रहा है. जनता कह रही है कि इस वीडियो के बैकग्राउंड में जो गाना हमें सुनाई दे रहा है वो हमारा भ्रम है या सच है. 'हम थे जिनके सहारे वो हुए न हमारे'.
निषादों को साधने और बारगेनिंग पावर बढ़ाने की कोशिश
2022 के विधानसभा चुनाव में संजय निषाद की पार्टी एनडीए गठबंधन के साथ थी. पार्टी को 15 सीटें मिली थीं. 9 सीटों पर जीत मिली. 6 उम्मीदवार निषाद पार्टी के सिंबल पर जीते और बाकी 3 बीजेपी के सिंबल पर. चुनावी साल से पहले संजय निषाद आरक्षण का मुद्दा उठाकर निषादों को एकजुट करना चाहते हैं.
अनुसूचित जाति का दर्जा निषाद समुदाय के लिए भावनात्मक मुद्दा है. इसके सहारे वो निषाद जाति को अपने बैनर तले लाना चाहते हैं. कहा जा रहा है कि सपा और बसपा पर तीखे प्रहार भी इसी रणनीति का हिस्सा है. राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो संजय निषाद एससी आरक्षण का मुद्दा उठाकर निषादों के सर्वमान्य नेता के तौर पर स्थापित होना चाहते हैं, जिससे वो बीजेपी से ज्यादा से ज्यादा सीटों की बारगेनिंग कर सकें. इसके साथ ही राज्य में होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार पर भी उनकी नजर रहेगी.
उत्तर प्रदेश में निषाद समुदाय की आबादी करीब 4.5 प्रतिशत है. अलग-अलग उपजातियों को इसमें मिला दें तो संख्या 9 प्रतिशत हो जाती है. राज्य की करीब 80 विधानसभा सीटों पर निषाद समुदाय के वोटर्स की संख्या एक लाख के आसपास है. जबकि लगभग 160 सीटों पर इस समुदाय के पास नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता है. पूर्वांचल के कई जिलों- गोरखपुर, गाजीपुर, वाराणसी, आजमगढ़, बलिया, मऊ, मिर्जापुर, भदोही, जौनपुर, प्रयागराज, सुल्तानपुर और फतेहपुर में निषाद समुदाय की अच्छी खासी आबादी है.
वीडियो: नीतीश कुमार हिजाब कंट्रोवर्सी पर मंत्री संजय निषाद का घटिया बयान

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