सबरीमाला केस में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का जवाब, 'महिलाओं के मस्जिद में नमाज पढ़ने पर रोक नहीं'
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने बताया कि इस्लाम में मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में नमाज पढ़ने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन कुछ नियम-कायदे हैं. इन नियमों का पालन करना जरूरी है. बोर्ड ने क्या नियम बताए हैं?

सबरीमाला मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार,23 अप्रैल को अहम सुनवाई हुई. नौ जजों की पीठ केस की सुनवाई कर रही है, जिसकती अध्यक्षता चीफ जस्टिस ऑफ इंडिसा (CJI) सूर्यकांत कर रहे हैं. सुनवाई के दौरान सीजेआई ने मस्जिद में मुसलमान महिलाओं के प्रवेश पर सवाल पूछा. इसके जवाब में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने बताया कि इस्लाम में मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में नमाज पढ़ने पर कोई रोक नहीं है. इससे जुड़े कुछ नियम हैं, जिनका पालन करना जरूरी है.
साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने 4:1 के बहुमत से ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. इस फैसले के बाद केरल के सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत मिली थी. इसके बाद फैसले के खिलाफ कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं. इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह तय किया कि इस मामले को एक बड़ी बेंच के पास भेजा जाना चाहिए.
Sabarimala Case: सुप्रीम कोर्ट में चल रही है अहम सुनवाईसुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच सिर्फ सबरीमाला ही नहीं, बल्कि दूसरे धर्मों में महिलाओं के प्रवेश और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर भी विचार कर रही है. सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मामले के साथ मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, पारसी महिलाओं के अग्नि मंदिर में प्रवेश और दाऊदी बोहरा समुदाय में महिला खतना (FGM) जैसे अन्य मुद्दों को भी जोड़ दिया है.
इन संवैधानिक सवालों पर सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की बेंच सुनवाई कर रही है. इस बेंच में जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, एम.एम. सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमनुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी. वराले, आर. महादेवन और जॉयमाल्य बागची भी शामिल हैं.
AIMPLB ने दिया महिलाओं के मस्जिद प्रवेश पर दिया जवाबचूंकि ये सभी मामले अनुच्छेद 25 और 26 (धार्मिक स्वतंत्रता) के दायरे में आते हैं, इसलिए AIMPLB ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के पक्ष को रखने के लिए हस्तक्षेप किया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट एम.आर. शमशाद ने कहा,
“इस्लाम में मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में नमाज पढ़ने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन वे मेन दरवाजे से एंट्री की मांग नहीं कर सकतीं. साथ ही, ऐसी मांग नहीं रख सकती हैं कि अंदर उन्हें मर्दों से अलग करने के लिए कोई बैरियर न हो.”
पुणे के एक कपल यास्मीन जुबेर अहमद पीरजादा और उनके पति जुबेर ने एक याचिका दायर की थी. इस याचिका में मुस्लिम महिलाओं को मस्जिदों में प्रवेश करने और नमाज अदा करने की इजाजत मांगी गई है. इस याचिका का जवाब देते हुए शमशाद ने कहा,
"बोर्ड को नमाज पढ़ने से कोई दिक्कत नहीं है. लेकिन कोर्ट से यह अपील करने वाली अर्जी खारिज की जानी चाहिए कि मुस्लिम महिलाओं को मुख्य दरवाज़े से प्रवेश करने की इजाजत दी जाए, उन्हें मुसल्लाह (मुख्य जगह) तक देखने और सुनने का इस्लामिक अधिकार हो और बिना किसी रुकावट के मुसल्लाह में नमाज पढ़ने की इजाजत हो."
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एक और वकील ने कहा,
“पैगंबर मोहम्मद ने खुद कहा था कि महिलाओं को मस्जिद आने से मत रोको… और जिन लोगों ने हदीस (पैगंबर के वचनों) को दर्ज किया है, उनमें से कई लोगों ने यह बात दर्ज की है कि पैगंबर ने निर्देश दिया था कि ‘महिलाओं को मस्जिद आने से मत रोको.’
इस मामले में सुनवाई अगले सप्ताह भी जारी रहेगी.
वीडियो: सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर सुनवाई हो रही है

