क्या ईरान होर्मुज से भारतीय जहाज निकलने देगा? विदेश मंत्री एस जयशंकर ने खुद जवाब दे दिया
US-Israel Iran War: वेस्ट एशिया में चल रही जंग की वजह से ईरान ने Strait of Hormuz को बंद करने का फैसला लिया है. विदेश मंत्री S Jaishankar ने बताया कि भारतीय जहाजों को वहां से निकालने के लिए भारत ईरान के साथ लगातार बातचीत कर रहा है.
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत ईरान के साथ बातचीत कर रहा है ताकि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को फिर से खोलने में मदद मिल सके. उन्होंने बताया कि भारतीय जहाजों को लेकर भारत और ईरान के बीच कोई ‘पक्का समझौता’ नहीं हुआ है. जयशंकर के मुताबिक, हरेक जहाज की आवाजाही को फिलहाल अलग-अलग मामला मानते हुए मैनेज किया जा रहा है.
सभी भारतीय झंडे वाले जहाजों के लिए ईरान की तरफ से कोई ‘एक बात’ नहीं बनी है. 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' रणनीतिक रूप से बेहद अहम समुद्री रास्ता है. दुनिया का लगभग 20 फीसदी तेल इसी रास्ते से गुजरता है. वेस्ट एशिया में चल रही जंग की वजह से ईरान ने इसे बंद कर दिया है. यहां से जहाजों को नहीं निकाला जा रहा. सप्लाई रुकने से भारत समेत कई देशों में कच्चे तेल और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) का संकट खड़ा हो गया है.
फाइनेंशियल टाइम्स के साथ एक इंटरव्यू में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के साथ चल रही बातचीत की तारीफ की. उन्होंने कहा कि इस बातचीत की वजह से नतीजे भी मिल रहे हैं. उन्होंने आगे कहा,
“यह बातचीत अभी भी जारी है. अगर इससे मुझे नतीजे मिल रहे हैं, तो जाहिर है मैं इसे जारी रखूंगा. भारत के नजरिए से, यह बेहतर है कि हम आपस में बात करें, तालमेल बिठाएं और कोई हल निकालें, बजाय इसके कि हम ऐसा न करें.”
ये टिप्पणियां अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की उस चेतावनी के बाद आई हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ईरान के खार्ग द्वीप पर और हमले कर सकता है. उन्होंने अपने साथी देशों से होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित करने के लिए नेवी फोर्स तैनात करने की भी अपील की थी. वहीं, ईरान ने जवाबी कार्रवाई तेज करने का वादा किया है.
जब विदेश मंत्री जयशंकर से पूछा गया कि क्या यूरोपीय देश भी इसी तरह का कोई समझौता कर सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि ईरान के साथ हर देश का जुड़ाव उसके अपने हालात पर निर्भर करता है. इसलिए सीधे तौर पर तुलना करना मुश्किल है. उन्होंने कहा कि भारत यूरोपीय देशों के साथ अपनी रणनीति साझा करने के लिए तैयार रहेगा. उन्होंने यह भी बताया कि उनमें से कई देशों ने भी तेहरान के साथ बातचीत जारी रखी है.
FT के मुताबिक, फ्रांस और इटली उन यूरोपीय देशों में शामिल हैं जिन्होंने तेहरान के साथ एक संभावित कूटनीतिक समाधान पर बातचीत शुरू की है, जिससे ऊर्जा की खेप को फिर से भेजना मुमकिन हो सके. जयशंकर ने इस बात से भी इनकार किया कि ईरान को बदले में कुछ मिला है. उन्होंने कहा,
“यह लेन-देन का मामला नहीं है. भारत और ईरान के बीच एक रिश्ता है. एक-दूसरे के साथ लेन-देन का इतिहास है. इस टकराव को हम बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण मानते हैं. अभी तो शुरुआत है. हमारे और भी कई जहाज वहां हैं. इसलिए बातचीत लगातार जारी है, क्योंकि इस पर काम अभी भी चल रहा है.”
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इस बीच, भारत ने होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में फंसे अपने 22 जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ते की मांग की है. विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने शनिवार, 14 मार्च को कहा कि 2 भारतीय जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित रूप से निकले हैं. ये दो भारतीय झंडे वाले LPG कैरियर शिवालिक और नंदा देवी जहाज हैं, जो लगभग 92,712 मीट्रिक टन LPG लेकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत आ रहे हैं. शिवालिक 16 मार्च को मुंद्रा पोर्ट और नंदा देवी 17 मार्च को कांडला पोर्ट पर पहुंच सकते हैं.
वीडियो: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जान जोखिम में डालकर निकाले जा रहे फंसे जहाज?

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