₹74,427 करोड़... भारत के सबसे अमीर नगर निगम BMC के पास कई राज्यों से बड़ा बजट
Brihanmumbai Municipal Corporation: BMC लगभग ₹74,427 करोड़ के सालाना बजट के साथ भारत का सबसे अमीर नगर निगम बना है. यह रकम सिक्किम, गोवा, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे कई राज्यों के पूरे साल के बजट से भी ज्यादा है.

BMC Election Result: तकरीबन तीन दशकों तक मुंबई ने शिवसेना को बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) पर राज करते देखा. लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं. भारत के सबसे अमीर नगर निगम पर अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन का कब्जा होगा. महायुति ने कुल 227 सीटों में से 118 सीटों पर जीत हासिल की है. इनमें बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है.
BMC चुनाव सभी पार्टियों के लिए बेहद अहम होता है. राजनीति से हटकर देखें तो यहां देश के सबसे अमीर नगर निकाय पर कब्जे की लड़ाई है. बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, 4 फरवरी 2025 को BMC ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 74,427 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था, जो इसका अब तक का सबसे बड़ा बजट है. यह इसके पिछले बजट के मुकाबले करीब 14 प्रतिशत ज्यादा है.
BMC का 74,427 करोड़ रुपये का बजट सिक्किम, गोवा, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे कई राज्यों के पूरे साल के बजट से भी ज्यादा है. यही वजह है कि महाराष्ट्र की राजधानी का नगर निगम बजट देश के बाकी नगर निकायों से बिल्कुल अलग और ज्यादा ताकतवर माना जाता है.
अब मुंबई को नया महापौर मिलेगा. हालांकि, महापौर का पद ज्यादातर औपचारिक होता है और असली प्रशासनिक ताकत नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) के पास होती है. लेकिन फिर भी महानगर पालिका पर नियंत्रण होना राजनीतिक ताकत और असर का बड़ा संकेत माना जाता है.
2026 में भारत के सबसे अमीर नगर निकाय कौन से होंगे?
वित्तीय वर्ष 2025-26 में, BMC लगभग ₹74,427 करोड़ के सालाना बजट के साथ भारत का अब तक का सबसे अमीर नगर निगम बना हुआ है. नीचे भारत के 10 सबसे अमीर नगर निकायों की लिस्ट दी गई है.
- बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC)- मुंबई- ₹74,427 करोड़
- बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) - बेंगलुरु - ₹19,930 करोड़
- दिल्ली नगर निगम (MCD) – ₹16,530 करोड़
- अहमदाबाद नगर निगम (AMC) – ₹15,502 करोड़
- पुणे महानगर पालिका (PMC) – ₹12,618 करोड़
- ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) – ₹11,460 करोड़
- सूरत नगर निगम (SMC) – ₹10,000 करोड़ से अधिक
- ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) – ₹8,400 करोड़
- कोलकाता नगर निगम (KMC) – ₹5,166 करोड़
- ग्रेटर विशाखापत्तनम नगर निगम (GVMC) – ₹4,762 करोड़
ये आंकड़े साफ बताते हैं कि बड़े और छोटे नगर निकायों के बीच कितना बड़ा फर्क है. BMC का बजट दूसरे नंबर पर काबिज बेंगलुरु के BBMP से चार गुना से भी ज्यादा है.
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BMC के पास भारत का सबसे बड़ा नगर निगम बजट क्यों है?
इसकी कुछ आसान वजहें हैं:
1. कमाई के कई बड़े स्रोत
BMC की आमदनी सिर्फ एक जगह से नहीं आती. उसे प्रॉपर्टी टैक्स, अलग-अलग तरह की फीस, बिल्डिंग और डेवलपमेंट चार्ज, राज्य सरकार से मिलने वाला पैसा, निवेश से होने वाली कमाई और दूसरे टैक्स मिलते हैं. ये सब मिलकर BMC को बाकी नगर निगमों से कहीं ज्यादा पैसा दिलाते हैं.
2. मुंबई की बड़ी आबादी
मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है और यहां बहुत बड़ी आबादी रहती है. यहां जमीन और इमारतों की कीमतें बहुत ऊंची हैं, कारोबार बड़ा है. इसका सीधा फायदा नगर निगम को मिलता है, क्योंकि टैक्स और फीस के रूप में उसकी कमाई बढ़ती है.
3. इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च
BMC अपने बजट का करीब 60 फीसदी, यानी 43 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा, सड़कों, सीवेज और बड़े प्रोजेक्ट्स और शहर के विकास पर खर्च करती है. इतना बड़ा खर्च अपने आप में बजट का आकार बढ़ा देता है.
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