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Jio के इंटरनेट पर 'मैटर' हो गया, कोर्ट ने रिलायंस पर हर्जाना ठोका

Chandigarh उपभोक्ता आयोग ने Reliance Jio की अपील खारिज कर दी. वादे के मुताबिक इंटरनेट न देने पर कंपनी को अब ग्राहक को 12,729 रुपये का रिफंड और 7,000 रुपये मुआवजा देना होगा. क्या है पूरा मामला?

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13 जून 2026 (अपडेटेड: 13 जून 2026, 12:50 PM IST)
Reliance Jio provide compensation to Chandigarh man
ग्राहक का आरोप है कि कंपनी ने वादे के मुताबिक इंटरनेट सर्विस नहीं दी थी. (सांकेतिक फोटो: AI)
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चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग ने रिलायंस जियो को एक ग्राहक को पैसे लौटाने और मुआवजा देने का आदेश बरकरार रखा है. ग्राहक का आरोप था कि कंपनी ने वादे के मुताबिक इंटरनेट सर्विस नहीं दी थी. उसने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया था और आयोग ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया था. इसके बाद रिलायंस जियो ने इस फैसले के खिलाफ राज्य (चंडीगढ़) उपभोक्ता आयोग में अपील की. राज्य आयोग ने भी जिला आयोग का फैसला बरकरार रखा है.

राज्य आयोग ने क्या कहा?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चंडीगढ़ उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष पद्मा पांडे और सदस्य राजेश कुमार आर्य ने रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड (RJIL) की अपील खारिज करते हुए कहा,

“हमें लगता है कि डिस्ट्रिक्ट कमीशन का आदेश तथ्यों और कानून की सही समझ पर आधारित है और इसमें कोई ऐसी गैर-कानूनी बात या गड़बड़ी नहीं है जिसके लिए इस आयोग को दखल देने की जरूरत हो.”

इस तरह राज्य उपभोक्ता आयोग ने जिला आयोग के फैसले को बरकरार रखा. अब रिलायंस जियो को ग्राहक को 12,729 रुपये का रिफंड (ब्याज सहित), 7,000 रुपये का मुआवजा और मुकदमेबाजी का खर्च देना होगा.

क्या है पूरा मामला?

केस रिकॉर्ड के मुताबिक, सुशील कुमार अग्रवाल ने 13 मार्च, 2024 को रिलायंस जियो से एक साल के प्लान के लिए 12,729 रुपये का एडवांस पेमेंट करके ब्रॉडबैंड फाइबर (वायर्ड) कनेक्शन खरीदा था. यह कनेक्शन 14 मार्च, 2024 को लगाया गया था. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जल्द ही पता चला कि जो सर्विस लगाई गई थी, वह ऑप्टिकल फाइबर वायर्ड कनेक्शन नहीं, बल्कि वायरलेस कनेक्शन (एयरफाइबर) था.

जब उन्होंने कंपनी के लोगों से इस बारे में पूछा, तो उन्होंने कथित तौर पर भरोसा दिलाया कि सर्विस वायर्ड फाइबर कनेक्शन की तरह ही काम करेगी और अनलिमिटेड डेटा देगी. लेकिन यह समस्या कुछ ही हफ्तों में सामने आ गई. कनेक्शन लगने के लगभग 18 दिन बाद, सुशील को मैसेज मिलने लगे कि उनका डेटा कोटा खत्म हो गया है और उन्हें एक्स्ट्रा डेटा इस्तेमाल के लिए पैसे देने होंगे.

खुद को ठगा हुआ महसूस करते हुए, उन्होंने जियो के प्रतिनिधियों से संपर्क किया और 3 अप्रैल, 2024 को सर्विस बंद करने और चुकाई गई रकम वापस करने की मांग की. लेकिन कंपनी पैसे वापस करने में नाकाम रही.

जब उनकी कोशिशों का कोई नतीजा नहीं निकला, तो उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोगा का दरवाजा खटखटाया. जिला आयोग ने पाया कि कंपनी ने न तो वादे के मुताबिक सर्विस दी और उसने रिफंड और मुआवजा देने का आदेश दिया. 

राज्य आयोग के आगे जियो का पक्ष

रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड (RJIL) ने आदेश को चुनौती देते हुए राज्य उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया. रिलायंस जियो ने तर्क दिया कि कस्टमर ने जान-बूझकर वायर्ड जियो फाइबर कनेक्शन के बजाय जियो एयरफाइबर चुना था. 

कंपनी का कहना था कि चुने गए प्लान में 1,000 GB की मासिक डेटा लिमिट थी और जो यूजर इस लिमिट से ज़्यादा डेटा इस्तेमाल करते थे, उन्हें अतिरिक्त डेटा खरीदना पड़ता था. कंपनी का कहना था कि प्लान की शर्तें साफ थीं और डिस्ट्रिक्ट कमीशन ने रिफंड का आदेश देने में गलती की थी.

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राज्य आयोग ने ग्राहक के पक्ष में क्यों फैसला सुनाया?

चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग ने गौर किया कि ग्राहक ने पूरे साल का पेमेंट पहले ही कर दिया था. इसके बावजूद, कनेक्शन सिर्फ दो हफ्ते तक ही चालू रहा. एक अहम सबूत वह ईमेल था जो कंपनी ने सुशील के घर से डिवाइस वापस लेने के बाद भेजा था. ईमेल में जियो ने उन्हें बताया कि इक्विपमेंट सही हालत में मिला है और उनके रिफंड की प्रक्रिया उसी के अनुसार पूरी की जाएगी. हालांकि, उस भरोसे के बावजूद कोई रिफंड नहीं दिया गया.

आयोग ने पाया कि कंपनी से सीधे समाधान न मिल पाने के कारण ग्राहक को आखिरकार कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होना पड़ा. दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद राज्य आयोग ने जिला आयोग के तर्क में कोई गलती नहीं पाई. इस तरह राज्य आयोग ने रिलायंस जियो की अपील को खारिज कर दिया और उपभोक्ता को दिए गए रिफंड और मुआवजे को बरकरार रखा.

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