The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • rekha gupta babool kikar safeda oxygen statement controversy fact check

सफेदा, बबूल और कीकर के पेड़ ऑक्सीजन नहीं देते? सीएम रेखा गुप्ता का दावा कितना सही?

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सोशल मीडिया पर वायरल हैं. अपने एक बयान को लेकर, जिसमें उन्होंने कह दिया कि सफेदा, कीकर और बबूल के पेड़ ऑक्सीजन नहीं देते. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर फैला तो यूजर्स मुख्यमंत्री को ट्रोल करने लगे. क्या है इसका सच?

Advertisement
pic
26 मई 2026 (अपडेटेड: 27 मई 2026, 07:31 PM IST)
Rekha Gupta tree statement
रेखा गुप्ता के बयान पर आम आदमी पार्टी ने निशाना साधा है. (फोटो- India Today और Unsplash.com)
Quick AI Highlights
Click here to view more

आम आदमी पार्टी के नेता इन दिनों दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के एक भाषण पर उन्हें ट्रोल कर रहे हैं. पूर्व मंत्री और आप नेता सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर एक मीम वाला वीडियो डाला है, जिसमें रेखा गुप्ता ये कहते सुनी जा रही हैं कि बबूल, कीकर और सफेदा के पेड़ ऑक्सीजन नहीं देते. भारद्वाज ने तंज किया है कि ऐसा कहने वाली सीएम से लोग उम्मीद कर रहे हैं कि वो दिल्ली के प्रदूषण को ठीक कर देंगी.

सौरभ भारद्वाज ने सीएम की स्पीच का जो वीडियो डाला है, वो 34 सेकेंड का है. इसमें सीएम की सिर्फ एक लाइन है, जिसमें वो कीकर-बबूल वाली बात कह रही हैं. इस वीडियो के आखिर में सीएम के बयान का फैक्टचेक भी किया गया है. यानी कि गूगल एआई से पूछकर बताया गया है कि कीकर-बबूल ऑक्सीजन देते हैं या नहीं? 

इसमें ये तो पक्की बात है कि कीकर हों या बबूल या सफेदा. दुनिया के सारे पेड़ ऑक्सीजन देते हैं. इस फैक्ट पर कोई संदेह नहीं है. जिस पर शक हो सकता है वो ये वीडियो है, जिसका सिर्फ कुछ सेकेंड का हिस्सा काटा गया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का पूरा बयान नहीं है. ऐसे में ये तय कर पाना मुश्किल काम है कि क्या उन्होंने सच में ये बात कही है? कही है तो कहां कही है? किस संदर्भ में कही है? और कब कही है? 

चलिए सब विस्तार से जानते हैं. 

फैक्ट चेक करने वाली वेबसाइट factcrescendo के मुताबिक, ये वीडियो चार-पांच महीने पुराना है, जिसका एक हिस्सा मई के आखिरी हफ्तों में वायरल हुआ. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह भाषण 17 जनवरी 2026 को आईआईटी दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में दिया था. इस कार्यक्रम का नाम था- Exhibition of Innovative Technological Solutions. यानी ‘नई-नवेली तकनीकी समाधान की प्रदर्शनी’. रेखा गुप्ता इस प्रोग्राम में चीफ गेस्ट थीं. उन्हें भाषण देने के लिए बुलाया गया तो तमाम बातों के साथ वह दिल्ली के ‘ग्रीन कवरेज’ यानी हरियाली पर भी बोलीं.

इसी सिलसिले में ये बात आती है, जिसमें वो कीकर-बबूल को ऑक्सीजन न देने वाला बता देती हैं. उनके बयान से लगता है कि कीकर-बबूल जैसे पेड़ों से उन्हें जो भी दिक्कत है वो इसलिए नहीं है कि वो ऑक्सीजन नहीं देते बल्कि इसलिए है कि वो विदेशी हैं. उनके भाषण में ये बात बार-बार और असरदार तरीके से आती है कि दिल्ली के ग्रीन कवर को देशी पेड़ों से भरने की जरूरत है. उनके भाषण का पूरा टेक्स्ट देखें तो शायद उनकी बात ज्यादा साफ हो पाएगी. अपने भाषण में रेखा गुप्ता कहती हैं, 

दिल्ली में जितना भी रिज एरिया है. आज तक कभी वो फॉरेस्ट नोटिफाई नहीं हुआ था. पहली बार किसी सरकार ने आकर सोचा कि दिल्ली के जो लंग्स (फेफड़े) हैं, हमारा ये जो फॉरेस्ट एरिया है, ये नोटिफाई होना चाहिए. हमने 4200 हेक्टेयर रिज एरिया वाली जमीन को नोटिफाई किया. 

सीएम रेखा गुप्ता आगे कहती हैं, 

जितने पेड़ अभी दिल्ली में आप सड़कों के किनारे देखेंगे, वो सफेदा के पेड़… रिज एरिया में कीकर-बबूल के पेड़… इस तरह के जो पेड़ होते हैं… जो ऑक्सीजन गिवर नहीं है, उन सभी पेड़ों को जो दिल्ली को ग्रीन कवर नहीं दे रहे, उनको बदलने की जरूरत है. 

सीएम ने आगे कहा कि ‘अब हम लोग दिल्ली में सघन जंगल बनाने की दिशा में काम करेंगे और हमारे जो इंडीजीनियस यानी देशी पेड़ हैं, चाहे वो आम हो, पीपल हो, नीम हो… इन सब पेड़ों को लगाएंगे, जो एक्चुअल में ऑक्सीजन देते हैं. आज तक तो हम धोखे में ही जी रहे थे. आज छांव देने वाले, फल देने वाले, ऑक्सीजन देने वाले पेड़-पौधे हैं ही नहीं, तो उन सब पर काम करने की जरूरत है.’
 

दिल्ली सीएम का ये पूरा भाषण था. इसी में से एक लाइन काटकर वायरल हो रही है, जिसमें वह कहती हैं कि सफेदा, बबूल और कीकर ऑक्सीजन गिवर नहीं हैं. दिल्ली में बीजेपी की ‘धुर विरोधी’ आम आदमी पार्टी के नेता यही हिस्सा शेयर कर सीएम के वैज्ञानिक ज्ञान पर सवाल उठा रहे हैं. ‘मीम-रील’ बनाकर सीएम का ‘मजाक’ बना रहे हैं. सौरभ भारद्वाज ने इंस्टाग्राम पर रेखा गुप्ता का ये वीडियो शेयर कर लिखा, 

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने फिर से वही किया. उनका कहना है कि सफेदा, बबूल और कीकर के पेड़ ऑक्सीजन नहीं देते. और भाजपा का कहना है कि वह (रेखा गुप्ता) दिल्ली के प्रदूषण को ठीक कर देंगी.

सौरभ भारद्वाज ने जो वीडियो शेयर किया है वो 34 सेकेंड का है. इसमें रेखा गुप्ता का बयान तो है ही. साथ ही अंत में एक जानकारी भी जोड़ी गई है. गूगल एआई से पूछा गया है कि क्या कीकर, बबूल और सफेदा के पेड़ ऑक्सीजन नहीं देते? एआई इसका जवाब देता है,

नहीं, यह एक आम मिथक है. सभी हरे पौधे और पेड़, जिनमें कीकर, बबूल और सफेदा भी शामिल हैं, दिन के समय प्रकाश संश्लेषण यानी फोटोसिंथेसिस की प्रक्रिया से ऑक्सीजन बनाते हैं.

भारद्वाज ने एआई से बना एक और वीडियो शेयर किया, जिसमें यूकेलिप्टस और बबूल का पेड़ आपस में बातें कर रहे हैं. यूकेलिप्टस पूछता है कि भाई बबूल, CM रेखा गुप्ता के हिसाब से अगर हम ऑक्सीजन नहीं देंगे तो फिर क्या देंगे? बबूल जवाब देता है कि मैं तो धुआं देता हूं.

क्या कहते हैं वैज्ञानिक?

इसमें कोई शक नहीं है कि सफेदा, बबूल या कीकर ऑक्सीजन देते हैं. वैज्ञानिक भी यही मानते हैं कि दुनिया में ऐसा कोई पेड़ नहीं है, जो ऑक्सीजन न देता हो. ये हो सकता है कि कुछ पेड़ कम ऑक्सीजन रिलीज करते हों और कुछ ज्यादा. ‘वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम’ की वेबसाइट पर एक आर्टिकल में बताया गया है कि कोई पेड़ कितनी ऑक्सीजन पैदा करेगा, यह कई बातों पर निर्भर करता है. 

इसी में से एक चीज को लीफ एरिया इंडेक्स (Leaf Area Index) कहते हैं. यानी जितना ज्यादा किसी पेड़ में पत्तियां होंगी. उतनी ही ज्यादा उसके ऑक्सीजन बनाने की संभावना होगी. ऐसे में ये तो हो सकता है कि बबूल और कीकर का लीफ एरिया इंडेक्स कम हो और वो कम ऑक्सीजन देते हों. लेकिन ये बात बिल्कुल गलत है कि वो एकदम ही ऑक्सीजन नहीं देते. हां, सफेदा, कीकर और बबूल जैसे पेड़ न लगाने की सलाह दी भी जाती है तो इसलिए कि ये ज्यादा पानी सोखते हैं. इससे ग्राउंड वाटर पर असर पड़ता है.

वीडियो: ट्रंप अरब देशों से अब्राहम अकॉर्ड साइन करने को क्यों कह रहे?

Advertisement

Advertisement

()