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सोशल मीडिया पर 'सिंघम' और 'नायक' बनने वाले अधिकारी CM फडणवीस की बात सुनकर सिर पकड़ लेंगे

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि आजकल कुछ अधिकारी सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर रहे हैं. कुछ सरकारी नीतियों के खिलाफ पोस्ट कर रहे हैं. कुछ अपने आधिकारिक पद का इस्तेमाल खुद की महिमा बढ़ाने के लिए कर रहे हैं. ऐसे मामलों को रोकने के लिए नियमों में संशोधन अनिवार्य है.

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रील बनाने वाली सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर महाराष्ट्र सरकार अब सख्त प्रतिबंध लगाने वाली है. (तस्वीर-इंडिया टुडे )
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सचेंद्र प्रताप सिंह
19 मार्च 2025 (Published: 12:07 AM IST)
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सरकारी पद मिलते ही कुछ लोग देश सेवा कम और कैमरा प्रेम ज़्यादा करने लगते हैं. कभी कुर्सी पर बैठकर स्लो मोशन एंट्री, तो कभी हथियार के साथ डायलॉगबाज़ी. अब ये सब आम बात हो गई है. सैलरी सरकारी है, लेकिन शौक पूरे फुल-टाइम रील स्टार वाले. ऐसे सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर महाराष्ट्र सरकार अब सख्त प्रतिबंध लगाने वाली है. इसके लिए सरकार ‘सिविल सेवा आचरण नियम 1979’ में संशोधन कर नए नियम लागू करेगी. ताकि सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित किया जा सके.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार, 19 मार्च को विधानसभा में इस बारे में एलान किया. उन्होंने कहा कि ‘महाराष्ट्र सिविल सेवा आचरण नियम 1979’ में संशोधन कर नए नियम लागू किए जाएंगे. इससे सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया उपयोग को नियंत्रित किया जा सकेगा. इस दौरान फडणवीस ने कहा कि इस संबंध में जल्द ही एक सरकारी निर्णय (GR) जारी किया जाएगा. उन्होंने उन अधिकारियों को भी फटकार लगाई जो सरकार विरोधी समूहों में सक्रिय रहते हैं. सरकारी नीतियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं.

इंडिया टुडे से जुड़े रित्विक अरुण भालेकर की रिपोर्ट के मुताबिक BJP विधायक परिनय फुके ने विधान परिषद में अधिकारियों के सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने का मुद्दा उठाया था. उन्होंने कहा कि अधिकारी रील बनाकर यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि पूरा सिस्टम वही चला रहे हैं. पुलिस अधिकारी ‘सिंघम’ जैसी फिल्मों से प्रेरित होकर रील बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों पर सख्त प्रतिबंध लगाने की ज़रूरत है. इसके बाद उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार इस पर कानून में संशोधन करेगी?

इस सवाल पर देवेंद्र फडणवीस ने जवाब देते हुए कहा कि महाराष्ट्र सिविल सेवा आचरण नियम 1979 में बनाए गए थे. चूंकि 1989 में सोशल मीडिया नहीं था. इसलिए उस समय के नियम केवल तब उपलब्ध मीडिया पर लागू होते थे. उन्होंने कहा, “अभी सोशल मीडिया को लेकर कोई सख्त प्रावधान नहीं है. लेकिन आज कुछ अधिकारी सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर रहे हैं. कुछ सरकारी नीतियों के खिलाफ पोस्ट कर रहे हैं. कुछ अपने आधिकारिक पद का इस्तेमाल खुद की महिमा बढ़ाने के लिए कर रहे हैं. ऐसे मामलों को रोकने के लिए नियमों में संशोधन अनिवार्य है.”

सीएम फडणवीस ने कहा कि सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर एक्टिव रहना चाहिए. लेकिन उनके आचरण को लेकर कुछ अपेक्षाएं भी हैं. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग नागरिकों से संवाद के लिए किया जाना चाहिए, न कि रील्स बनाकर फेम कमाने के लिए. इस दौरान फडणवीस ने साफ कहा कि सरकारी सेवाओं में अनुशासनहीनता किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

जम्मू-कश्मीर और गुजरात सरकार पहले ही ऐसे कानून लागू कर चुकी हैं. अब महाराष्ट्र सरकार भी सिविल सेवा आचरण नियमों में संशोधन कर सोशल मीडिया उपयोग, व्यवहार और सहभागिता पर कानून बनाने जा रही है. 

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