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'पापा ने लोन लेकर फीस दी थी', दोबारा NEET पेपर देने आए छात्रों की बातें तोड़ देती हैं

3 मई को NEET UG 2026 का एग्जाम हुआ था. लेकिन फिर खबर आई की कि पेपर लीक हो गया है. और री-नीट होगा. इस खबर ने कई बच्चों को मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से तोड़ दिया.

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14 मई 2026 (अपडेटेड: 14 मई 2026, 11:25 PM IST)
Re-NEET financial burden
बच्चे वापस कोचिंग सेंटर, हॉस्टल आ रहे हैं. (फाइल फोटो-इंडिया टुडे)
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NEET UG 2026 का 3 मई को पेपर हुआ. सभी छात्र एग्जाम के बाद राहत महसूस कर रहे थे. क्योंकि अब वे अपने घर जा सकते थे. उन्हें अब दिन-रात नहीं पढ़ना था. उनका दिमाग अब शांत हो सकता है. नर्वस सिस्टम रिलैक्स फील कर सकता है. क्योंकि उनके भविष्य को शेप देने वाला पेपर अब हो चुका था. लेकिन फिर खबर आती है कि NEET का पेपर लीक हो गया और दोबारा से एग्जाम होगा.

बच्चों के लिए ये खबर सदमे से कम नहीं थी. क्योंकि जिसके लिए उन्होंने दिन रात जागकर मेहनत की, बाहरी दुनिया से खुद को काट लिया, मानसिक तनाव झेला, परिवार की आर्थिक तंगी के बीच जैसे-तैसे कोचिंग, हॉस्टल, ट्रैवल का खर्चा उठाया, अब उसी एग्जाम को दोबारा देने के लिए उन्हें फिर कमर कसनी होगी.

इंडिया टुडे से जुड़े रवीश पाल सिंह ने ऐसे ही कुछ छात्रों से बात की, जो पेपर के लिए भोपाल आकर रह रहे थे. यहीं कोचिंग में तैयारी कर रहे थे. रहने के लिए हॉस्टल लिया था. हॉस्टल से लेकर कोचिंग तक कई बार ट्रांसपोर्ट का भी खर्चा उठाना पड़ रहा था. पेपर के बाद ये बच्चे हॉस्टल खाली कर अपने-अपने घर जाकर रह रहे थे.

नीट छात्रा कार्तिका सागर जिले के खुरई की रहने वाली हैं. पिछले दो साल से हॉस्टल में रहकर तैयार कर रही थीं. एग्जाम खत्म होने के बाद घर लौट गईं. लेकिन नीट रद्द होते ही दोबारा वापस आना पड़ा. इस बीच उनका पुराना हॉस्टल रूम किसी और को मिल चुका था. उन्होंने कहा, “सारे रूम भर चुके हैं. अब 15 हजार रुपये किराए पर फ्लैट लेना पड़ा है. पहले कोचिंग पास थी. सिर्फ वॉकिंग डिस्टेंस था. मगर अब रोज बस से आना-जाना पड़ता है. मेस सुविधा भी नहीं है. खाना खुद बनाना पड़ रहा है. मतलब नया खर्चा.”

कार्तिका कहती हैं,

“मेंटली के साथ फाइनेंशियली भी टेंशन हो गई है. ऊपर से फिर एग्जाम देना है.”

एक अन्य नीट छात्रा प्रिया की स्थिति आर्थिक रूप से काफी कमजोर है. उन्होंने बताया,

“मेरे पिता पेंटर हैं. लोन लेकर कोचिंग फीस और भोपाल रहने का खर्चा उठाया था. लेकिन दोबारा किराए के मकान में रहना, खाना और तैयारी का खर्च पूरे परिवार पर भारी पड़ रहा है. पापा ने कहा था कि ये मेरा लास्ट अटेम्प्ट है. क्योंकि इसके बाद वे अफोर्ड नहीं कर पा रहे.”

प्रिया को डर है कि कहीं उनका सपना परिवार की आर्थिक मजबूरी में न दब जाए.

छात्र स्ट्रेस में हैं. उन्हें नहीं पता कि वे दोबारा पेपर के लिए कैसे पढ़ाई करेंगे. मगर कोचिंग संचालकों का दावा है कि छात्रों की तैयारी अब भी मजबूत है.

नीट की पढ़ाई कराने वाले अमित गुप्ता का कहना है,

“परीक्षा को सिर्फ 9 दिन हुए हैं इसलिए स्टूडेंट्स का रिदम पूरी तरह टूटा नहीं है. री-नीट देने वाले बच्चों से अतिरिक्त पढ़ाई का चार्ज नहीं लिया जाएगा. री-नीट को बच्चे चैलेंज की तरह लें. अभी भी एक अवसर है. आप हार मत मानिए. दोबारा से पढ़िए. आप सिलेक्ट हो सकते हैं.”

उनका ये मानना है कि रहना और खर्च निकालना बच्चों के लिए अब भी एक चुनौती है. एक हॉस्टल मालिक का भी कहना है कि वे कोशिश कर रहे हैं कि वापस आने वाले छात्रों को रहने की जगह मिल जाए.

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