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ऑपरेशन होना था बेटे का, इंतजार कर रहे पिता को OT में ले जाकर लगा दिया चीरा

राजस्थान के कोटा में बेटे का ऑपरेशन कराने आए पिता को डॉक्टरों ने चीरा लगा दिया. हालांकि, ऑपरेशन से पहले ही गलती पकड़ में आ गई थी. मामला सामने आने के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया. अस्पताल ने केस की जांच कराने की बात कही है.

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17 अप्रैल 2025 (पब्लिश्ड: 01:17 PM IST)
Kota Hospital
बेटे का ऑपरेशन कराने आए पिता को डॉक्टरों ने लगा दिया चीरा (Photo: India Today)
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आपने ‘चुप-चुप के’ फिल्म देखी होगी. उसमें एक सीन है. परेश रावल (Paresh Rawal) का किरदार अस्पताल के किसी वार्ड में ऑपरेशन थिएटर (Operation Theater) के बाहर एक व्हीलचेयर पर बैठा होता है. तभी कमरे से कुछ लोग निकलते हैं. उसे खींचकर ओटी में ले जाते हैं और बिना जाने कि यही मरीज है या नहीं, उसका एक दांत उखाड़ देते हैं. फिल्मी सीन है. देखकर खूब हंसी आती है. लेकिन क्या रियल दुनिया में ऐसा हो सकता है कि अटेंडेंट को पकड़कर उसका ऑपरेशन कर दिया जाए? नहीं न? लेकिन ये हुआ है.  राजस्थान के कोटा में.  यहां के मेडिकल कॉलेज में बेटे का ऑपरेशन होना था. डॉक्टरों ने अटेंडेंट पिता को चीरा लगा दिया. हालांकि, समय रहते गलती पकड़ में आ गई और ‘पिता’ बेचारे बाल-बाल बच गए. 

इंडिया टुडे ग्रुप के चेतन गुर्जर की रिपोर्ट के अनुसार, 12 अप्रैल की ये घटना मेडिकल कॉलेज कोटा के सुपर स्पेशिएलिटी ब्लॉक में हुई है. जानकारी के मुताबिक, अस्पताल में कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी डिपार्टमेंट में एक मरीज के हाथ में डायलिसिस फिस्टुला बनाना था. यह हाथ में चीरा लगाकर नसों को जोड़कर बनाया जाता है ताकि मरीज की डायलिसिस आसानी से हो सके. ऑपरेशन थिएटर के बाहर एक मरीज का अटेंडेंट बैठा था. उसके बेटे का ऑपरेशन प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट कर रहा था.

तभी ऑपरेशन थिएटर के बाहर स्टाफ ने आकर आवाज लगाई- ‘जगदीश कौन है?’ अटेंडेंट ने हाथ उठा दिया. इसके बाद स्टाफ उसे अंदर ले गया. ऑपरेशन थिएटर के टेबल पर लिटा दिया. उसके हाथ में फिस्टुला बनाने के लिए चीरा भी लगा दिया. तभी उसके बेटे का इलाज कर रहे डॉक्टर वहां पहुंच गए. उन्होंने देखा कि यह तो उनके मरीज का अटेंडेंट है. तब जाकर पूरे मामले का खुलासा हुआ. अस्पताल में हड़कंप मच गया. इसके बाद मरीज को वापस टांके लगाए गए. उसे ओटी से वापस उसके बेटे के वार्ड में भेज दिया गया. बाद में जिस मरीज का डायलिसिस फिस्टुला बनाना था, उसका फिस्टुला बनाया गया. उसे 13 तारीख को डिस्चार्ज भी कर दिया गया.

'पिता पैरालाइज्ड हैं'

अटेंडेंट के बेटे मनीष ने बताया कि उसका एक्सीडेंट हुआ था. उसके पैर का ऑपरेशन होना था. पिता साथ आए थे. मनीष को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया और पिता बाहर बैठे थे. ऑपरेशन के बाद मनीष को डॉक्टर बाहर लेकर आए तो उसे अपने पिता नहीं दिखे. बाद में पता चला कि पिता को भी अंदर ले जाकर चीरा लगा दिया है. मनीष ने बताया कि उनके पिता बोल नहीं पाते हैं. वह पैरालाइज्ड हैं.

मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने जांच की बात कही है. 3 डॉक्टरों की जांच कमेटी गठित की गई है. मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉक्टर संगीता सक्सेना ने कहा, 

मरीज की जगह दूसरे मरीज के अटेंडेंट को ऑपरेशन थिएटर में ले जाने के संबंध में सूचना मिली है. इस मामले में 3 मेंबर की जांच कमेटी गठित कर दी है. 2 दिन में कमेटी रिपोर्ट सौंपेगी. इसके बाद ही सच्चाई सामने आएगी.

फॉलो नहीं हुआ प्रोसीजर 

ये सब जो हुआ सो हुआ. बताया गया कि ऑपरेशन थिएटर में भी प्रोसीजर फॉलो नहीं हुआ है. ओटी में मरीज को ले जाने के पहले उसे खास ड्रेस पहनाई जाती है. लेकिन इस मरीज ने ड्रेस भी नहीं पहनी हुई थी. दूसरी तरफ हाथ में डायलिसिस फिस्टुला बनाने के लिए बाल हटाए जाते हैं. सफाई की जाती है. वह भी नहीं हुई थी.

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