रेलवे ने रिटायर्ड कर्मचारियों को चांदी के सिक्के देकर सम्मानित किया, सारे नकली निकले!
Railway Silver Coins Scam: रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारियों को नकली चांदी के सिक्के बांटने का पता चला, तो जांच शुरू हुई. पश्चिम मध्य रेलवे के विजिलेंस अधिकारियों ने खुलासा किया कि सिक्कों में तांबा मिलाया गया था.
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सम्मान के साथ रिटायर होने की खुशी अलग ही होती है. गुलदस्ता मिलता है. पैसा मिलता है. भारतीय रेलवे में तो चांदी के सिक्के भी मिलते हैं. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में पश्चिम मध्य रेलवे रिटायर होने वाले कर्मचारियों को चांदी के सिक्के देकर सम्मानित करता है. जिंदगी के इतने अहम दिन चांदी का सिक्का मिले, तो खुश होना तय है. लेकिन ये खुशी दर्द में तब्दील हो गई.
रेलवे जो चांदी के सिक्के अपने कर्मचारियों को बांट रहा था, वो सब कथित तौर पर नकली निकले. आरोप है कि ये सिक्के मिलावटी थे, क्योंकि उनमें चांदी सिर्फ 0.23 फीसदी थी बाकी सब तांबा था. सिक्कों की सच्चाई का पता चला, तो अब रेलवे ने नकली चांदी के सिक्के बनाने वाली फर्म ‘मेसर्स वायबल डायमंड्स’ पर कार्रवाई की मांग की है.
इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार धर्मेंद्र साहू की रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम मध्य रेलवे ने अगस्त महीने में रिटायर हुए कर्मचारी डीके गौतम को रिटायरमेंट के सम्मान समारोह में चांदी का सिक्का दिया था. उन्होंने सिक्के को अपने घर पर रेलवे की याद के रूप में सजा कर रखा.
मगर किसी वजह से एक दिन उन्हें चांदी का सिक्का बेचने की जरूरत पड़ी. इसलिए वो सुनार के पास गए. जब वहां सिक्का चेक किया गया, तो पता लगा कि इसमें सिर्फ 0.23 प्रतिशत चांदी है. बाकी सब तांबा है.
डीके गौतम ने ये बात रेलवे के सामने रखी और बजरिया थाने में भी शिकायत दर्ज कराई. इस मामले में पश्चिम मध्य रेलवे के विजिलेंस अधिकारियों ने जांच शुरू की. उन्हें पता लगा कि सिक्के में तांबा मिलाया गया था. इसके बाद रेलवे ने इंदौर में सिक्के बना रही फर्म ‘मेसर्स वायबल डायमंड्स’ को ब्लैकलिस्ट कर दिया है.
हरेक सिक्के पर 2500 रुपये की ठगीरेलवे ने 23 जनवरी 2023 को ‘मेसर्स वायबल डायमंड्स’ को 3640 गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल सिक्के सप्लाई करने का ऑर्डर दिया था. इसमें से 3631 सिक्के भोपाल के जनरल स्टोर डिपो (GSD) में आए थे. जांच में ये बात भी सामने आई कि 3631 में से हरेक सिक्के पर 2500 रुपये की ठगी हुई है. अब रेलवे विजिलेंस ने बजरिया पुलिस को कंपनी पर कार्रवाई करने की अपील की है.
बजरिया के SI अरविंद कुमार सिंह ने बताया,
"करारिया कोच फैक्ट्री डिपो विभाग द्वारा एक आवेदन दिया गया था. उन्होंने बताया कि हमने गोल्ड प्लेटेडे सिल्वर के सिक्के (सोने का पानी चढ़े चांदी के सिक्के) मंगाए थे, जिसमें 99.9 फीसदी चांदी होनी चाहिए थी. उन्होंने आवेदन में कहा कि उनके विजिलेंस विभाग ने जांच में पाया कि चांदी की बजाय 99.9 फीसदी तांबा निकला है."
SI अरविंद कुमार सिंह ने दावा किया कि पुलिस को जांच के लिए जो दस्तावेज चाहिए, वे अभी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. उन्होंने कहा कि रेलवे के विजिलेंस विभाग ने पुलिस से संपर्क नहीं किया है. उन्होंने जानकारी दी कि कोच फैक्ट्री डिपो के स्टोर विभाग के लोगों ने पुलिस को आवेदन दिया है.
यह पहली बार नहीं जब रेलवे को नकली चांदी के सिक्के सप्लाई करने में 'मेसर्स वायबल डायमंड' का नाम आया हो. सितंबर 2025 में नॉर्दर्न रेलवे के लखनऊ में आलमबाग जनरल स्टोर डिपो में भी नकली चांदी के सिक्कों की शिकायत मिली थी.
उस दौरान आलमबाग पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) सुभाष चंद्रा ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया था कि FIR में 'मेसर्स वायबल डायमंड्स' के मालिक विपुल जैन और कॉन्ट्रैक्ट के नियमों के तहत सप्लाई को मंजूरी देने वाली मुंबई की 'मेसर्स TUV इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' का नाम शामिल है. रिपोर्ट के मुताबिक, आलमबाग मामले में 30-40 रुपये तक की ठगी का अंदेशा है.
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