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'जान को खतरा' वाला बयान कोर्ट से वापस लेंगे राहुल गांधी, वजह ये बताई है

Rahul Gandhi ने Savarkar Defamation Case में पुणे की कोर्ट में एक आवेदन दाखिल किया है. इसमें उन्होंने कहा कि मौजूदा रानीतिक माहौल को देखते हुए उन्हें जान का खतरा है. अब इस बयान को वापस ले लिया गया है.

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पुणे की कोर्ट से अपना लिखित बयान वापस लेंगे कांग्रेस सांसद राहुल गांधी. (PTI)
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मौ. जिशान
13 अगस्त 2025 (अपडेटेड: 13 अगस्त 2025, 09:26 PM IST)
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लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी 'जान को खतरा' वाला अपना बयान कोर्ट से वापस लेंगे. यह बयान राहुल गांधी के वकील मिलिंद दत्तात्रेय पवार ने सावरकर पर कथित विवादित टिप्पणी के मानहानि केस में दाखिल किया था. अब कांग्रेस की सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने बताया कि इसे राहुल गांधी की बिना सहमति के दर्ज कराया गया था.

बुधवार, 13 अगस्त को राहुल गांधी ने सावरकर पर टिप्पणी मानहानि मामले में एक आवेदन दाखिल किया था. इसमें उन्होंने कहा था कि मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए उन्हें ‘जान का खतरा है’. इसके पीछे मामले के शिकायतकर्ता सात्यकी सावरकर का नाथूराम गोडसे के साथ संबंध का हवाला दिया गया था. इसे लेकर सुप्रिया श्रीनेत ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा,

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आवेदन पर राहुल की असहमति के बाद उनके वकील मिलिंद दत्तात्रेय पवार ने एक बयान जारी किया,

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राहुल गांधी के वकील मिलिंद दत्तात्रेय पवार का बयान. (X)

पवार ने कहा कि गुरुवार यानी 14 अगस्त को कोर्ट में राहुल की ओर से दर्ज बयान को वापस लेने के लिए आवेदन दाखिल करेंगे.

इस आवेदन में उन्होंने सात्यकी सावरकर के 29 जुलाई के लिखित बयान का जिक्र किया. इसमें सात्यकी ने माना था कि वे अपनी ननिहाल की तरफ से नाथूराम गोडसे और गोपाल गोडसे के सीधे वंशज हैं. ये दोनों महात्मा गांधी की हत्या के मुख्य आरोपी थे. सात्यकी ने यह भी दावा किया था कि वो विनायक दामोदर सावरकर के भी वंशज हैं.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, वकील मिलिंद दत्तात्रेय पवार ने राहुल गांधी की तरफ से दाखिल आवेदन में कहा था,

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आवेदन में कहा गया कि महात्मा गांधी की हत्या आवेश में नहीं बल्कि एक साजिश के तहत की गई. इसमें दावा किया गया कि उनकी हत्या की साजिश एक खास विचारधारा पर आधारित थी, जिसके नतीजे में एक निहत्थे व्यक्ति के खिलाफ जानबूझकर हिंसा हुई.

राहुल गांधी ने आवेदन में इतिहास को फिर से ना दोहराने की अपील करते हुए कहा,

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इस आवेदन में राहुल गांधी के 11 अगस्त को संसद में दिए गए नारे 'वोट चोर सरकार' और चुनावी गड़बड़ियों के दावों समेत अपनी राजनीतिक गतिविधियों का जिक्र किया है. गांधी का कहना है कि इन गतिविधियों के कारण उनके राजनीतिक विरोधियों से दुश्मनी बढ़ी है.

उन्होंने संसद में दिए अपने एक बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था,

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इसके बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कांफ्रेंस करके उन्हें हिंदू समुदाय का अपमान करने का आरोप लगाया. इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के एक बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने गांधी को "देश का नंबर वन आतंकवादी" कहा था.

यह मानहानि मामला सात्यकी सावरकर ने दायर किया था, जो राहुल गांधी के मार्च 2023 में लंदन में दिए गए एक बयान से जुड़ा है. गांधी ने सावरकर की किताबों में एक घटना का उल्लेख किया था, जिसमें दावा किया गया कि सावरकर और उनके साथियों ने एक मुस्लिम व्यक्ति को पीटा था. सात्यकी सावरकर ने इसे झूठा, भ्रामक और मानहानि करने वाला काम बताया.

सावरकर ने गांधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 500 के तहत सजा और धारा 357 CrPC के तहत मुआवजे की मांग की है. इस केस की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी.

वीडियो: संसद में आज: प्रियंका की टीशर्ट पर किसकी फोटो से बवाल, राहुल क्या बोले?

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