The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • rahul gandhi warning amid osm controversy row accuses cbse of gaining money through reevaluation

CBSE कॉपी री-चेकिंग के ले रहा 100 रुपये, कंपनी को दे रहा सिर्फ 25, समझिए पूरा खेल

CBSE OSM Controversy: राहुल गांधी ने CBSE के छात्रों की समस्या को लेकर एक पोस्ट किया. पोस्ट में उन्होंने एक रेटकार्ड बनाया जिसमें CBSE की कॉपी री-चेकिंग और टोटलिंग की फीस बताई गई. इस पोस्ट के बाद CBSE ने जो जवाब दिया, उससे खुद उसकी ही पोल खुल गई.

Advertisement
pic
pic
सुप्रिया
| शुभम कुमार
2 जून 2026 (अपडेटेड: 2 जून 2026, 03:49 PM IST)
cbse osm controversy
राहुल गांधी CBSE छात्रों के साथ उनके मुद्दे पर बात करते हुए. (फोटो-इंडिया टुडे)
Quick AI Highlights
Click here to view more

क्या CBSE ने छात्रों को कमाई का जरिया बना दिया है? क्या CBSE Re-evaluation के नाम पर छात्रों से जो पैसे ले रहा है उससे अपनी जेब भर रहा है? ये सवाल नेता विपक्ष राहुल गांधी के एक पोस्ट से उठे और इस पोस्ट के बाद CBSE ने जो जवाब दिया, उससे खुद उसकी ही पोल खुल गई. 

1 जून को नेता विपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर एक पोस्ट किया. जिसमें लिखा, ‘जेबकतरों से सावधान - आज वो CBSE के अंदर बैठे हैं’. इस पोस्ट में उन्होंने बताया कि कैसे CBSE, Digital scan copy के नाम पर 100 रुपए प्रति विषय, Re-totalling के नाम पर 100 रुपए प्रति पेपर और Re-evaluation के नाम पर 25 रुपए प्रति सवाल ले रहा है. उन्होंने सवाल किया कि जब फोन से ही स्कैनिंग हो रही है, नंबर गलत चढ़ाए जा रहे हैं तो इसका बिल बच्चे क्यों भरें? 

इस रेट कार्ड को लेकर विवाद हो रहा था तब ही 2 जून की सुबह CBSE ने एक प्रेस रिलीज जारी की. जिसमें उसने बताया कि वो प्रति आंसर बुक छात्रों से 100 रुपए और Re-evaluation के नाम पर 25 रुपए प्रति सवाल ले रहा है.

राहुल गांधी ने क्या सवाल उठाए?

यहां तक के हिसाब में एक मोटी चीज जो समझने की जरूरत है. वो ये कि CBSE छात्रों से कॉपी चेक करने के लिए 100 रुपए ले रहा है लेकिन जिस कंपनी को छात्रों की कॉपी चेक करने का टेंडर मिला है, उसे सिर्फ 25 रुपए दे रहा है. यानी मोटे तौर पर देखे तो CBSE को सीधे 75 रुपए का फायदा हो रहा है. इस फायदे की रकम से किसकी जेब भरी जा रही है? यही सवाल विवाद का कारण बना हुआ है. 

वैसे विवाद सिर्फ पैसे की रकम को लेकर नहीं है. विवाद है उस कंपनी को लेकर भी जिसे CBSE ने इस बार टेंडर दिया. 27 मई को विपक्ष ने OSM का काम करने वाली कंपनी COEMPT पर भी सवाल उठाए थे. राहुल गांधी ने एक्स पर की पोस्ट में लिखा था- CBSE ने जिस COEMPT कंपनी को एग्जाम के डिजिटल इवैल्यूएशन का ठेका दिया है, उसका पहले ग्लोबारिना नाम था. साल 2019 में तेलंगाना ने इसे ब्‍लैकलिस्‍ट कर दिया था.

पूरे मामले की SIT जांच की मांग करते हुए राहुल ने कुछ सवाल उठाए थे. जैसे, COEMPT को CBSE का ठेका क्यों और किसके कहने पर दिया गया? कौन-कौन से नियम और प्रक्रिया दरकिनार करके इस कंपनी को ये ठेका दिया गया? CBSE ने COEMPT का Background checks क्यों नहीं किया? और COEMPT प्रबंधन और मोदी सरकार के बीच आखिर क्या संबंध है?

ये भी पढ़ें: OSM विवाद पर CBSE की सफाई, COEMPT पर एक्शन की तैयारी, जांच में क्या निकला?

CBSE पर क्या एक्शन होगा?

अब CBSE पेपर धांधली और OSM प्रणाली में हुई गड़बड़ी को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने COEMPT को टेंडर देने को लेकर बोर्ड से रिपोर्ट मांगी है. सूत्रों के मुताबिक शिक्षा मंत्रालय ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश का मन बना लिया है. हालांकि, CBSE अधिकारियों ने गड़बड़ी के आरोपों से इनकार किया है. और कहा है कि टेंडर सामान्य वित्तीय नियमों और सरकारी खरीद प्रक्रियाओं के अनुसार ही दिया गया था. 

CBSE ने COEMPT को पेपर कराने का ठेका 5 दिसंबर को दिया था. यानी 17 फरवरी को पहली बोर्ड परीक्षा शुरू होने से ठीक 74 दिन पहले. यानी कंपनी के पास तैयारी के लिए ठीक-ठाक समय था, लेकिन अगर सही से तैयारी की गई होती, तो आज इतनी फजीहत नहीं हो रही होती और लाखों बच्चों के भविष्य पर क्वेश्न मार्क नहीं लगा होता.

वीडियो: CBSE ने टेंडर देने से पहले OSM का ब्लैकलिस्टिग नियम बदला?

Advertisement

Advertisement

()