राहुल गांधी संसद में कुछ दिखाते हैं तो कैमरा घूम क्यों जाता है? वजह जान लें
राहुल गांधी जो आज कर रहे थे, वही एक बार पहले भी कर चुके हैं. 1 जुलाई 2024 को सदन की कार्यवाही के दौरान राहुल गांधी ‘अभयमुद्रा’ समझा रहे थे. तभी वह सदन में ही भगवान शिव की फोटो दिखाने लगे, जिसके बाद तत्काल कैमरा उनकी ओर से घूमकर स्पीकर की ओर चला गया.
.webp?width=210)
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की सदन के कैमरे के साथ ‘लुकाछिपी’ चल रही थी. ये सोमवार, 2 फरवरी की बात है. बजट सत्र की कार्यवाही के दौरान राहुल गांधी एक पोस्टर दिखाना चाह रहे थे लेकिन स्पीकर ओम बिड़ला कह रहे थे कि ये नियमों के खिलाफ है. इसलिए जैसे ही राहुल गांधी पोस्टर हाथ में लेते, कैमरा स्पीकर के चेहरे की ओर घूम जाता था. फिर राहुल गांधी पर जैसे ही कैमरा आता, वह पोस्टर आगे कर देते. ये ‘रस्साकशी’ बार-बार चली और ये सीन देखकर बहुत से लोगों को ‘देजा वू’ होने लगा. देजा वू मतलब जब किसी चीज को देखकर लगे कि ये सब पहले भी हो चुका है, वो ‘देजा वू’ होता है.
राहुल गांधी जो आज कर रहे थे, वही एक बार पहले भी कर चुके हैं. 1 जुलाई 2024 को सदन की कार्यवाही के दौरान राहुल गांधी ‘अभयमुद्रा’ समझा रहे थे. तभी वह सदन में ही भगवान शिव की फोटो दिखाने लगे, जिसके बाद तत्काल कैमरा उनकी ओर से घूमकर स्पीकर की ओर चला गया. लेकिन ये क्यों होता है? सदन में राहुल गांधी के कोई पोस्टर या फोटो आगे करते ही कैमरा क्यों घूम जाता है?
क्योंकि, स्पीकर कहते हैं कि ये सदन के नियमों के खिलाफ है. लोकसभा सचिवालय संसद में ‘माननीय सदस्यों’ के आचरण को लेकर एक नियामावली पुस्तिका जारी करती है. इसमें सदन चलाने के सारे नियम दर्ज होते हैं. इसी पुस्तिका में रूल नंबर 349 है, जिसका हवाला ऐसे हालात में स्पीकर से लेकर सत्ता पक्ष के सांसद देते हैं.
इस नियमावली का नियम-349 कहता है,
जब सदन की बैठक चल रही हो तब कोई भी सदस्य ऐसी कोई भी चीज प्रदर्शित नहीं करेगा, जो सदन के कार्य से संबंधित न हो. जैसे, कोई साहित्य, प्रश्नावली, पर्चा, प्रेस नोट, पेंफलेट आदि सदन में नहीं दिखाए जाएंगे. इसके अलावा सदन में झंडे, कोई प्रतीक-चिह्न या किसी भी प्रकार की वस्तुओं या प्रदर्शनी को नहीं दिखाया जाएगा.
नियम भी, परंपरा भी
लोकसभा को लंबे समय से कवर करने वाले पत्रकार रोशन गौड़ कहते हैं कि वैसे तो यह नियम है कि सदन में पोस्टर, झंडा या बैनर नहीं दिखाया जाना चाहिए. लेकिन एक परंपरा भी है जो दशकों से चली आ रही है. जरूरी नहीं कि सदन में हर काम नियम से हो, लेकिन यहां परंपरा से भी बहुत सारे काम होते हैं, ताकि सदन की गरिमा बनी रहे. सदस्य जब नियमों का या परंपरा का उल्लंघन करते हैं तो स्पीकर उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकते हैं.
क्या कार्रवाई हो सकती है?
रोशन गौड़ बताते हैं कि अगर ऐसा होता है तो आरोपी सांसद को एक या दो दिन के लिए सस्पेंड किया जा सकता है. ज्यादा गंभीर अनुशासनहीनता होने पर हफ्ते भर के लिए या फिर पूरे सत्र के लिए सस्पेंड किया जा सकता है. ये काम खुद स्पीकर करते हैं. कई बार ऐसा होता है कि स्पीकर मामला प्रिविलेज कमिटी के पाले में डाल देते हैं. ऐसे में संसद सदस्य की निलंबन अवधि अनिश्चितकाल के लिए हो जाती है. ये भी हो सकता है कि वो पूरे 5 साल तक सस्पेंड ही रहे.
रोशन गौड़ आगे कहते हैं कि स्पीकर ऐसे मामले को प्रिविलेज कमिटी में तब भेजते हैं, जब सांसद ने कोई गंभीर अनुशासनहीनता की हो. जैसे किताब किसी के सिर पर मार दिया हो. या किसी को अपशब्द बोल दिया हो. पर्चा फाड़कर सभापति की ओर फेंक दिया हो.
नियमावली के नियम 374 में स्पीकर के इस अधिकार का जिक्र है. इसमें कहा गया है कि अगर अध्यक्ष को जरूरी लगे तो वह सदन के काम में जानबूझकर और लगातार बाधा डालकर नियमों का दुरुपयोग करने वाले को निलंबित कर सकते हैं. लेकिन ये निलंबन उस सत्र विशेष के बचे दिनों से ज्यादा का नहीं होगा. हालांकि, सदन किसी भी समय एक प्रस्ताव लाकर निलंबन रद्द भी कर सकता है. नियम आगे ये कहता है कि स्पीकर के निलंबन की घोषणा करते ही संबंधित सदस्य को तुरंत सदन परिसर से बाहर जाना पड़ेगा.
हालांकि, राहुल गांधी वाले मामले में अभी तक स्पीकर की ओर से ऐसे किसी एक्शन की खबर नहीं है.
इससे पहले जुलाई 2022 में लोकसभा में तख्तियां लेकर प्रदर्शन करने के बाद कांग्रेस के 4 सांसदों मणिकम टैगोर, ज्योतिमणि, राम्या हरिदास और टीएन प्रतापन को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया था.
वीडियो: पटना में UGC नियम लागू करने पर छात्रों का प्रदर्शन, बैरिकेड तोड़े, पुलिस ने क्या किया?

.webp?width=60)

