राहुल गांधी पर जिस CD के आधार पर मानहानि का केस हुआ, कोर्ट में वो खाली निकली, फिर क्या हुआ?
विनायक दामोदर सावरकर पर आपत्तिजनक बयान देने के आरोपी राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि केस पुणे के एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहा है. इसी दौरान राहुल गांधी के भाषण की एक सीडी कोर्ट के सामने लाई गई, जो खाली निकली. इसी सीडी के आधार पर केस शुरू किया गया था.
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि केस में कोर्ट के अंदर बड़ा ड्रामा क्रिएट हो गया. पुणे के एमपी-एमएलए कोर्ट में सुनवाई हो रही थी. राहुल पर विनायक दामोदर सावरकर (Vinayak Damodar Savarkar) के खिलाफ आपत्तिजनक भाषण देने का आरोप था. एक सीडी ये कहकर कोर्ट में चलाई गई कि इसमें राहुल का वो भाषण है, जिसमें वो सावरकर के बारे में आपत्तिजनक बातें कह रहे हैं. लेकिन सीडी चली ही नहीं. उसमें कोई कंटेंट ही नहीं था. जज और वकील वेट करते रहे, लेकिन स्क्रीन पर कुछ नहीं आया. दिलचस्प बात ये है कि इसी सीडी में रिकॉर्ड भाषण के आधार पर केस शुरू किया गया था और राहुल गांधी को कोर्ट में पेश होने के लिए समन भेजा गया था. अब वही सीडी ब्लैंक मिलने पर शिकायतकर्ता के वकील हैरान हैं.
क्या है मामला?हिंदुत्ववादी विचारक विनायक दामोदर सावरकर के परपोते सत्यकी सावरकर ने राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने लंदन में एक भाषण दिया था, जिसमें विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कही गई थीं. पुणे के एमपी-एमएलए कोर्ट में इस मामले की सुनवाई मजिस्ट्रेट अमोल शिंदे कर रहे थे.
केस में सबूत (Evidence) के तौर पर पहले एक सीलबंद सीडी जमा की गई थी जिसमें वह कथित भाषण रिकॉर्ड था. बताया गया कि ये सीडी पहले भी कोर्ट में चलाई गई थी और उसी के आधार पर राहुल गांधी को समन जारी हुआ था.
गुरुवार, 27 नवंबर को कोर्ट में सत्यकी सावरकर की गवाही चल रही थी. इसी दौरान सीडी फिर खोली गई लेकिन जैसे ही इसे चलाया गया, सब हैरान रह गए. सीडी ब्लैंक थी और उसमें कोई डेटा ही नहीं था. सत्यकी की ओर से दलीलें पेश कर रहे थे एडवोकेट संग्राम कोल्हटकर. वो ये सीन देखकर चौंक गए. उन्होंने कोर्ट को बताया कि इसी सीडी को पहले कोर्ट में चलाया जा चुका है. इसी के आधार पर तो केस शुरू हुआ था.
सीडी खाली मिलने के बाद कोल्हटकर ने कोर्ट से कहा कि राहुल गांधी का वो विवादित भाषण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर मौजूद है. इसे वहीं से सीधे देख लिया जाए. उन्होंने कोर्ट को वीडियो का लिंक भी दिया लेकिन राहुल गांधी की ओर से पेश हुए वकील मिलिंद पवार ने इसका कड़ा विरोध किया. उन्होंने कोर्ट से कहा कि ऑनलाइन वीडियो अपने आप में सबूत नहीं माना जा सकता.
मजिस्ट्रेट शिंदे को भी ये बात सही लगी. उन्होंने पवार की बात मानते हुए कोल्हटकर से कहा,
क्या कहता है एविडेंस एक्ट?इंडियन एविडेंस एक्ट की धारा 65B के मुताबिक (यूट्यूब) URL सर्टिफिकेट से सपोर्टेड नहीं है. इसलिए इसे सबूत नहीं माना जा सकता.
इंडियन एविडेंस एक्ट की धारा 65B यह बताती है कि अगर कोई, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जैसे- मोबाइल, कंप्यूटर, सीसीटीवी, ईमेल या वीडियो को कोर्ट में सबूत के रूप में इस्तेमाल करना है, तो उसके साथ एक खास सर्टिफिकेट देना जरूरी है. यह सर्टिफिकेट यह साबित करता है कि डेटा असली है. सही तरीके से बने डिवाइस से लिया गया है और इसमें कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद कोल्हटकर ने 2 और सीडी कोर्ट में पेश कीं और कहा कि इन्हें खुली कोर्ट में देखा जाए लेकिन पवार ने फिर विरोध किया और मजिस्ट्रेट ने अपील खारिज कर दी.
कोल्हटकर ने कोर्ट से ये पता लगाने के लिए न्यायिक जांच की मांग की कि पहले ठीक चल रही सीडी अचानक खाली कैसे हो गई? उन्होंने केस की सुनवाई टालने की भी मांग की. पवार ने इसका भी विरोध किया, लेकिन कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख दे दी. अब शुक्रवार 5 नवंबर को इस पर फिर से सुनवाई होगी.
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