'चीनी टैंक सिर्फ सौ मीटर दूर थे...', राहुल गांधी संसद में किस किताब का जिक्र कर रहे थे?
Rahul Gandhi Speech: राहुल गांधी ने भारतीय सीमा में चीनी घुसपैठ का मुद्दा उठाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को घेरने की कोशिश की.

लोकसभा की कार्यवाही के दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच बहस कौन सी नई बात है. कभी सत्ता पक्ष विपक्ष को न बोलने दे और कभी विपक्ष सत्ता पक्ष को. ये तो दशकों से होता आया है. सोमवार, 2 फरवरी को भी यही हुआ. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने के लिए उठे. बोलना शुरू किया तो रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से लेकर गृहमंत्री अमित शाह तक नाराज हो गए. जबर्दस्त विरोध किया.
दोनों ने ऐसी आपत्ति की कि राहुल गांधी का भाषण पूरा ही नहीं हो पाया और सदन स्थगित हो गया. क्या था ये बवाल? किस बात पर आपत्ति थी? राहुल गांधी ऐसा क्या कहने जा रहे थे कि उन्हें रोकने के लिए राजनाथ सिंह और अमित शाह को मोर्चा संभालना पड़ा? सब बताते हैं बारी-बारी से.
राहुल गांधी पर क्यों भड़के राजनाथ सिंह-अमित शाह?सोमवार, 2 फरवरी को ये सब तब शुरू हुआ जब लोकसभा में भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कुछ ऐसी बातें कहीं, जो कांग्रेस की ‘देशभक्ति’ पर सवाल उठा रही थीं. इसके जवाब में राहुल गांधी ने भारतीय सीमा में चीनी घुसपैठ का मुद्दा उठाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को घेरने की कोशिश की.
राहुल गांधी के मुताबिक, वह ये मुद्दा उठाना नहीं चाहते थे लेकिन सांसद तेजस्वी सूर्या ने ‘कांग्रेस की देशभक्ति’ पर संदेह किया इसलिए वो चीन पर भारत के कब्जे का ये मुद्दा उठा रहे हैं. ताकि सही देशभक्त कौन है ये बताया जा सके. राहुल गांधी ने ये विषय ‘कारवां पत्रिका’ में प्रकाशित एक लंबे लेख के कॉन्टेट से शुरू किया, जिसमें पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की ‘अप्रकाशित’ किताब से अंश लिया गया था.

राहुल गांधी ने ‘अप्रकाशित’ किताब के हवाले से कहा,
मैं अपनी बात की शुरुआत एक कोट से करना चाहता हूं. यह उद्धरण पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे के संस्मरण से लिया गया है. मैं सदन से अनुरोध करता हूं कि इसे ध्यान से सुना जाए, क्योंकि इससे साफ हो जाएगा कि कौन देशभक्त है और कौन नहीं.
राहुल ने आगे कहा,
यह घटना उस समय की है, जब 4 चीनी टैंक भारतीय इलाके में प्रवेश कर रहे थे. वे गलवान में (राहुल ने डोकलाम कहा था) एक ऊंचाई (रिज) पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे. सेना प्रमुख अपनी किताब में लिखते हैं और मैं उनके शब्दों को उद्धृत कर रहा हूं कि कैलाश रेंज में भारतीय सैन्य ठिकानों से चीनी टैंक मात्र कुछ सौ मीटर की दूरी पर आ गए थे…
उनका इतना ही कहना था कि राजनाथ सिंह खड़े हो गए. उन्होंने कड़े स्वर में पूछा कि राहुल गांधी जिस किताब का जिक्र कर रहे हैं क्या वो प्रकाशित हुई है? अगर प्रकाशित है तभी उसके अंश सदन में बोले जाएं अन्यथा उसका कोई औचित्य नहीं है.
गृहमंत्री अमित शाह ने भी यही बात दोहराई और कहा कि राहुल गांधी बस इतना जवाब दें कि किताब प्रकाशित है या नहीं?

राहुल गांधी ने इसके बाद कहा कि जो बात वो कह रहे हैं वो ‘गारंटीड ऑथेंटिक’ है. उन्होंने कहा, “यह एमएम नरवणे का संस्मरण है, जिसे सरकार पब्लिश नहीं होने दे रही है. इसमें सब लिखा है और वह सिर्फ इसमें से पांच लाइन पढ़ना चाहते हैं, जिसमें उन्होंने राजनाथ सिंह और मोदी जी के बारे में बोला है.”
उनकी इस पर अमित शाह कहते हैं कि राहुल ने स्वीकार किया है कि किताब प्रकाशित नहीं है इसलिए इसके अंश को सदन में नहीं बोला जा सकता. स्पीकर ओम बिड़ला भी कहते हैं कि सदन का नियम है कि किताब या पेपर कटिंग में छपी चीजों को यहां नहीं कहा जाना चाहिए.
ये तो हुई बवाल की बात. अब पहला सवाल ये कि राहुल गांधी एक 'अप्रकाशित' किताब के हवाले से कहना क्या चाहते थे. और दूसरा ये कि ये किताब कौन सी है और किसने लिखी है?

दूसरे सवाल का जवाब पहले देते हैं. राहुल गांधी जिस किताब के अंश को कोट कर रहे थे वो पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की लिखी 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' है. न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस किताब में नरवणे ने 2020 में गलवान इलाके में भारत और चीन के बीच सैन्य तनाव को लेकर अपने संस्मरण लिखे हैं. यह किताब अभी तक आधिकारिक रूप से जारी नहीं की गई है. रक्षा मंत्रालय इसकी समीक्षा कर रहा है.
वहीं राहुल गांधी इस किताब के जिस कथित हिस्से का जिक्र कर रहे थे वो ‘कारवां पत्रिका’ की एक लंबी रिपोर्ट में प्रकाशित किया गया है.
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