शादी से लौटते समय लापता हुए थे कुछ लोग, 26 साल बाद भाखड़ा नहर में डूबी वैन में मिले कंकाल
पंजाब में भाखड़ा नहर से एक जर्जर हो चुकी एक मारुति ओमनी कार को निकाला गया. गाड़ी के भीतर से एक बच्चे की कमीज, कुछ जूते-चप्पल, बिखरा हुआ सामान और इंसानी हड्डियों के कुछ अवशेष बरामद हुए हैं. यह अवशेष उन चार लोगों के हैं, जो 17 अक्टूबर,2000 को एक शादी समारोह से लौटते वक्त गायब हो गए थे.

पंजाब के रोपड़ जिले में भाखड़ा नहर से निकली एक पुरानी टूटी फूटी मारुति ओमनी वैन ने 26 साल पुराने एक राज से पर्दा उठा दिया है. वैन के अंदर से निकले कंकाल, बच्चे की कमीज और दूसरे सामानों ने तीन परिवारों के दशकों पुराने इंतजार और उम्मीद पर पूर्ण विराम लगा दिया.
नहर की 32 फीट गहरी तलहटी से जंग लग चुकी और जर्जर हो चुकी एक मारुति ओमनी कार को केबल्स, लोहे की चेन और ट्रैक्टर की मदद से बाहर निकाला गया. गाड़ी के भीतर से एक बच्चे की कमीज, कुछ जूते-चप्पल, बिखरा हुआ सामान और इंसानी हड्डियों के कुछ अवशेष बरामद हुए हैं. यह अवशेष उन चार लोगों के हैं, जो 17 अक्टूबर, 2000 को एक शादी समारोह से लौटते वक्त गायब हो गए थे.
26 साल पहले क्या हुआ था?
चंडीगढ़ से 80 किलोमीटर दूर कोटला गांव हैं. यहां के रहने वाले मुन्नी लाल, तेज राम, सुरजीत सिंह और सुरजीत का 8 साल का बेटा कालू एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे. चारों तेज राम की कार से गए थे, जिसे उन्होंने एक महीने पहले अपनी जमीन बेचकर खरीदा था. रात में चारों लोग बारात से घर के लिए निकले, लेकिन घर पहुंच नहीं पाए. गाड़ी समेत सभी लोग गायब हो गए. इनके परिजनों ने काफी खोजबीन कराई. लेकिन कहीं कुछ पता नहीं चला.
कैसे मिली वैन ?
# स्थानीय गोताखोर कमलप्रीत सैनी हाल में एक शव की तलाश के लिए भाखड़ा नहर में उतरे थे.
# इसी दौरान उनकी नजर नहर के तलहटी में पड़ी एक जंग लगी मारुति ओमनी वैन पर पड़ी.
# करीब 32 फीट गहरे नहर में सालों से पड़े इस वैन की हालत बेहद जर्जर हो चुकी थी.
# वैन की छत और पिछला हिस्सा पूरी तरह से जंग लगकर डैमेज हो चुका था. अगला हिस्सा किसी तरह बचा हुआ था.
# स्थानीय लोगों, ट्रैक्टर, लोहे की चेन और केबल्स की मदद से वैन को नहर से बाहर निकाला गया.
कमलप्रीत सैनी ने बताया कि जब उन्होंने वैन को देखा तो उन्हें अंदाजा हुआ कि यह वही वैन हो सकती है, जो वर्षों पहले हादसे का शिकार हुई थी. बाद में ग्रामीणों से इस बात की पुष्टि कर दी.
गुरुद्वारे में अंतिम अरदास और अस्थि विसर्जन के साथ विदाई
कीरतपुर साहिब के SHO इंस्पेक्टर राहुल शर्मा ने बताया कि कार से मिले हड्डियों के अवशेषों को पूरे रस्मों रिवाज के साथ इकट्ठा किया गया. इसके बाद पीड़ित परिवारों ने रोपड़ के पातालपुरी साहिब गुरुद्वारा में एक सामूहिक अंतिम अरदास आयोजित की और अवशेषों को पवित्र जल में विसर्जित करके अपनों को आखिरी विदाई दी. पिछले 26 सालों से जिन घरों की दीवारों पर वापसी की उम्मीद के साथ चारों की तस्वीरें टंगी थी, उन पर नम आंखों से श्रद्धांजलि के फूल चढ़ा दिए गए.
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