'मन में दो तरह की भावना है', अविमुक्तेश्वरानंद ने सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे पर ऐसा क्यों कहा?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कहा कि बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने खुशी मन से नहीं, बल्कि आहत होकर इस्तीफा दिया है.

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इसका कारण उन्होंने UGC की नई गाइडलाइंस और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार को बताया. उनके इस्तीफे के बाद अविमुक्तेश्वरानंद की भी प्रतिक्रिया आई है. इंडिया टुडे से जुड़े पंकज शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने खुश मन से नहीं, बल्कि आहत होकर इस्तीफा दिया है. उनका मन भी उसी तरह आहत है, जैसे वर्तमान समय में देश के करोड़ों सनातन धर्मियों का है.
उत्तर प्रदेश के मुखिया और मुख्यमंत्री योगी पर निशाना साधते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सूबे में सत्ता योगी आदित्यनाथ के हाथ में है. इस वजह से बच्चों महिलाओं, वृद्धों ब्रह्मचारियों और संन्यासियों के साथ अत्याचार हो रहा है. शंकराचार्य और उनके शिष्यों के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे पर कहा कि इतने बड़े पद से इस्तीफा देना यह साफ बताता है कि उनके मन में सनातन और उनके प्रतीकों के प्रति कितना प्रेम और सम्मान है. उन्होंने आगे अपने बयान में कहा कि लोग इतने बड़े पद को पाने के लिए सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं. लेकिन अग्निहोत्री ने अपने सम्मान और धर्म की रक्षा के लिए अपने पद से इस्तीफा देने का साहस दिखाया है.
स्वामी ने कहा,
अग्निहोत्री के प्रति हम लोगों के मन में दो तरह की भावना है. एक तो उन्होंने त्यागपत्र दिया. अच्छा नहीं लग रहा है कि उनको पद छोड़ना पड़ गया. लेकिन साथ ही उनके लिए अच्छी भावना भी है कि कम से कम कोई तो निकला जो हमारे हिंदू धर्म का अलंकार निकला. जिसने ये दिखा दिया की हमारे अंदर में सनातन धर्म के प्रति, उसके प्रतीकों के प्रति कितना गहरा प्यार है. यह तो बहुत गजब की घटना है.
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यूपी सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि सूबे में साल 2022 से लागू नीतियां ब्राह्मण और धर्म विरोधी हैं. उन्होंने हाल ही लागू हुए UGC कानून की भी आलोचना की. UGC के नये कानून की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह कानून हिंदू समाज के भीतर 'मतभेद' पैदा करने वाला है. माघ मेला प्रशासन के साथ हुए विवाद के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का प्रदर्शन आज भी जारी रहा. उनको प्रदर्शन करते हुए लगभग 8 दिन हो चुके है. प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच विवाद की शुरुआत मौनी अमावस्या के दिन पालकी से स्नान को जाने को लेकर शुरू हुआ था.
वीडियो: प्रयागराज के लोगों ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के विवाद पर क्या कहा?

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