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1916 का वो कानून क्या है? हरिद्वार के संगठनों ने जिससे गंगा घाटों पर गैर हिंदुओं की 'एंट्री रोक दी'

आलोचकों ने इस कदम को असंवैधानिक बताया है. समाजवादी पार्टी के नेता एस.टी. हसन ने कहा कि देश सबके लिए है, किसी एक समुदाय के लिए नहीं.

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Posters Barring Entry Of Non Hindus seen At Haridwar Har Ki Pauri ghat
हर की पौड़ी में गैर हिंदुओं के प्रवेश को रोकने वाले बोर्ड लगाए गए हैं (PHOTO- Incredible India)
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मानस राज
17 जनवरी 2026 (Updated: 17 जनवरी 2026, 12:55 PM IST)
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हरिद्वार के हर की पौड़ी में अरब के परिधान में घूम रहे दो युवकों के वीडियो सामने आने के बाद गंगा सभा नाम के संगठन ने यहां कुछ बोर्ड्स लगा दिए हैं. इन बोर्ड्स पर लिखा है- ‘गैर हिंदुओं का गंगा घाटों में प्रवेश करना मना है’. गंगा सभा ही हरिद्वार के घाटों का प्रबंधन करती है. सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि 2027 की शुरुआत में कुंभ मेला लगने जा रहा है. उनकी मांग है कि इस दौरान एक तय सीमा के भीतर के क्षेत्र में गैर-हिंदुओं की एंट्री प्रतिबंधित होनी चाहिए. 

नितिन गौतम ने अपनी मांग के समर्थन में ब्रिटिश सरकार के साथ 1916 में हुए प्रतिबंध संबंधी समझौते का भी हवाला दिया है. उन्होंने कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय के मार्गदर्शन में लागू किया गया वह नियम जिसके तहत कथित तौर पर हर की पौड़ी क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश और निवास पर प्रतिबंध लगाया गया था, उसे बाकी सभी घाटों पर भी लागू किया जाना चाहिए.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा सभा का तर्क हरिद्वार नगर निगम के 1916 के नियमों पर आधारित है, जो ब्रिटिश शासनकाल में बनाए गए थे. गंगा सभा के अनुसार, ये नियम खासतौर पर हरिद्वार के धार्मिक स्वरूप को संरक्षित करने के लिए बनाए गए थे और कानूनी रूप से वैध हैं. इन नियमों के अनुसार

गैर-हिंदुओं को हर की पौड़ी के आसपास के धार्मिक क्षेत्रों में भूमि खरीदने की मनाही है और गैर-हिंदू व्यापारियों और दुकानदारों को सूर्यास्त के बाद क्षेत्र खाली करना अनिवार्य है. इनमें यह भी कहा गया है कि गैर-हिंदुओं को सूर्यास्त के बाद हर की पौड़ी क्षेत्र में रहने की अनुमति नहीं है और यहां तक ​​कि यदि गैर-हिंदू अधिकारियों को किसी सरकारी काम के लिए तैनात किया जाता है, तो उन्हें भी सूर्यास्त तक इलाका खाली करना होगा.

सभा का कहना है कि इन प्रावधानों को अब पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए. खासकर कुंभ मेले से पहले. उनका तर्क है कि हर की पौड़ी सनातन धर्म का एक प्रमुख केंद्र है और बिना किसी प्रतिबंध के प्रवेश की अनुमति देने से इसकी धार्मिक पहचान कमजोर होती है.

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हरिद्वार में ये बोर्ड कई जगहों पर लगाए गए हैं 

हर की पौड़ी में ‘अहिंदू प्रवेश निषेध क्षेत्र’ के बोर्ड लगाए जाने से ठीक एक दिन पहले ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी तीर्थ स्थलों से संबंधित नियमों और कानूनों की समीक्षा की बात कह चुके हैं. सीएम धामी ने कहा था,

हम गंगा सभा के सदस्यों, धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों और पूज्य संतों सहित सभी हितधारकों के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं. हमने उन्हें संकेत दिया है कि हम हरिद्वार और अन्य तीर्थ स्थलों से संबंधित सभी मौजूदा कानूनों और विनियमों की सावधानीपूर्वक समीक्षा कर रहे हैं, जिसके आधार पर सरकार आगे की कार्रवाई करेगी.

राजनीति और विरोध भी शुरू

एक ओर सीएम नियमों की समीक्षा करने की बात कह रहे हैं. दूसरी ओर विपक्षी दलों ने हरिद्वार के घाटों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की बात को असंवैधानिक बताया है. समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने कहा कि देश सबके लिए है. किसी एक समुदाय के लिए नहीं. उन्होंने कहा, 

यह किसी की निजी संपत्ति नहीं है. संविधान के अनुसार, कोई भी भारतीय देश में एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा कर सकता है. इस तरह की चर्चाओं को रोका जाना चाहिए. ये हमारे समाज में नफरत फैला रही हैं.

वहीं मीडिया से बात करते हुए उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में गैर-हिंदुओं के प्रवेश के मुद्दे पर सनातन भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए. जनवरी 2026 की शुरुआत में जब विधानसभा ने गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, तब मंगलौर के विधायक काजी निजामुद्दीन ने कहा था कि उन्होंने हर की पौड़ी में प्रवेश प्रतिबंधित करने वाले नियमों का कभी उल्लंघन नहीं किया है. हालांकि, उन्होंने कहा कि इस (प्रतिबंधित) क्षेत्र को शहर के अन्य हिस्सों तक विस्तारित करना व्यावहारिक नहीं है.

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