The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • 50 Crore Bank Accounts & Free Treatment: Inside the Mega Success of Modi Government's 5 Biggest Welfare Schemes

करोड़ों का मुफ्त इलाज और 58 करोड़ खाते! मोदी सरकार की 5 बड़ी योजनाओं का जमीनी सच जान लीजिए

PM Modi 12 Years: मोदी सरकार ने अपने 5 साल पूरा होने पर 58 करोड़ से ज्यादा जनधन खातों, 10 करोड़ से ज्यादा उज्जवला योजना के तहत बांटे गए एलपीजी कनेक्शन और आयुष्मान योजना के तहत पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज जैसी योजनाओं के फायदे गिनाए हैं. अब सवाल ये है कि हकीकम में एनडीए सरकार की योजनाएं कितनी कामयाब रही हैं.

Advertisement
pic
10 जून 2026 (अपडेटेड: 10 जून 2026, 01:43 PM IST)
PM Modi 12 years
मोदी सरकार की 5 बड़ी योजनाओं का पूरा रिपोर्ट कार्ड! (फोटो- PMO)
Quick AI Highlights
Click here to view more

मोदी सरकार ने अपने 12 साल पूरे कर लिए हैं. इसके साथ ही नरेंद्र मोदी एक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप से लगातार सबसे लंबा कार्यकाल पूरा करने वाले पीएम बन गए हैं. इससे पहले भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू 1952 में हुए पहले आम चुनाव से लेकर 1964 में अपने निधन तक लगातार प्रधानमंत्री बने रहे. अब पीएम मोदी उनके आगे निकल गए हैं. मगर सवाल ये है कि रिकॉर्ड बनाने के अलावा मोदी सरकार के इन 12 सालों में क्या हुआ. आम भारतवासी को कुछ हासिल हुआ भी या नहीं?

सरकार कहती है कि उसने 140 करोड़ की आबादी वाले देश में 50 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते खुलवाए. आयुष्मान योजना और दूसरी हेल्थ स्कीमों के जरिए करोड़ों का मुफ्त इलाज किया. मोदी सरकार का दावा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाखों परिवारों को पक्के मकान दिए गए. अंत्योदय योजना के समाज के सबसे निचले और गरीब तबके को मुफ्त राशन भी दिया गया. सरकार ने 12 साल पूरा होने पर ऐसी 5 बड़ी योजनाओं का रिपोर्ट कार्ड भी जारी किया है.

मगर सवाल ये उठता है कि सरकारी कागजों में जो बड़े-बड़े दावे किये जा रहे हैं, वो जमीनी हक़ीकत से मेल खाते भी हैं या नहीं. जनता के लिए दिल्ली से जो पैसा निकल रहा है, वो गांव-देहात तक पहुंच भी रहा है या नहीं और पहुंच रहा है तो कितना? अस्सी के दशक में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि दिल्ली से अगर एक रुपये दिये जाते हैं तो जनता को महज 15 पैसे ही मिल पाते हैं. ऐसे में सवाल ये भी उठता है कि चार दशकों में हालात कितने बदले हैं?

Modi
मोदी सरकार के 12 साल पूरे (फोटो- आजतक)

मोदी सरकार के 12 साल पूरा होने के मौके पर हम उन 5 सरकारी फ्लैगशिप योजनाओं का पोस्टमार्टम करेंगे, जिनकी उपलब्धियां गिनाते सरकार थकती नहीं है. बेहद आसान और क्रिस्पी अंदाज सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच तुलना करने की कोशिश भी करेंगे. तो चलिए शुरू करते हैं.

प्रधानमंत्री जनधन योजना: बैंकिंग सिस्टम से जुड़े करोड़ों भारतवासी

एक वक्त था, जब बैंक में खाता होना किसी स्टेटस सिंबल से कम नहीं था. देश की आधे से ज्यादा आबादी के पास बैंक खाता नहीं था. बैंक में खाता खुलवाना भी आसान नहीं था. कई बैंकों में तो खाता खुलवाने के लिए जरूरी था कि उसी बैंक के किसी खाता धारक की गारंटी दिलाई जाए. ऐसे में सरकारी सब्सिडी को सीधे बेनिफिशियरी के खाते में ट्रांसफर करने का तो सवाल ही नहीं उठता था.

ऐसे समय में 2014 में आई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार. प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) ने बैंकों और गरीब भारतवासियों के बीच की दूरी को खत्म कर दिया. बिना किसी की गारंटी दिए भी लोगों के बैंकों में खाते खुले, वो भी जीरो बैलेंस वाले. बोले तो मिनिमम बैलेंस का लफड़ा भी खत्म. 

नतीजा ये हुआ कि तेजी लोगों में बैंकों में खाता खुलवाना शुरू किया. आज आलम ये है कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2014 से 2026 के बीच यानी कि 12 सालों में 58.30 करोड़ से ज्यादा जनधन खाते खोले जा चुके हैं.

मगर बात सिर्फ बैंक खातों तक ही सीमित नहीं है. इसके पीछे की क्रोनोलॉजी बड़ी दिलचस्प है. कानपुर यूनिवर्सिटी में कॉमर्स के प्रोफेसर और अर्थशास्त्र की कई किताबें लिख चुके डॉ राजीव नयन सिंह कहते हैं,

प्रधानमंत्री जनधन योजना का सबसे बड़ा फायदा ये हुआ कि बिचौलियों का खेल खत्म हो गया और सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी सीधे बेनिफिशयरी के बैंक खाते में पहुंचने लगी, जिसे हम डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT भी कहते हैं.

jandhan
जनधन योजना के तहत करोड़ों जीरो बैलेंस खाते खोले गए (फोटो- My Gov)

ये तो हुई जनता के फायदे की बात, मगर बैंक भी नुकसान में नहीं रहे. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक आज की तारीख में पीएम जनधन खातों में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है.

खास बात ये है कि कुल पीएम जनधन खातों में से लगभग 56 फीसदी खाते महिलाओं के हैं. जिससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है. लिहाजा सत्ताधारी बीजेपी इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक बड़ा कदम मानती है.

मगर PMJDY में सब कुछ फील गुड वाला ही हो, ऐसा भी नहीं है. जानकार बताते हैं कि इस योजना के तहत खोले गए बहुत सारे खाते डोरमेंट हो चुके हैं. यानी लंबे समय से इस खातों में कोई भी लेनदेन नहीं हुआ. डॉ राजीव नयन सिंह इन कमियों पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं,

जनधन खातों में 10 हजार रुपये तक के ओवर ड्राफ्ट की सुविदा दी गई है. मगर ये किसे मिलेगा और किसे नहीं ये पूरी तरह बैंकों के विवेक पर निर्भर करता है. कुछ बैंकों की शाखाओं में लोकल लेवल पर ही इतने सख्त नियम बना दिये गए हैं कि बहुत सारे पात्र और जरूरतमंद लोगों को वक्त पर इसका लाभ नहीं मिल पाता.

आयुष्मान भारत योजना: गरीब परिवारों को मुफ्त इलाज का सहारा

गंभीर बीमारी किसी भी हंसती-खेलती फैमिली की खुशियों पर ब्रेक लगा देती है. गरीब परिवारों के पास तो कर्ज के दलदल में फंसने के अलावा कोई चारा भी नहीं बचता. गरीबों की इस तकलीफ पर मरहम लगाने के लिए मोदी सरकार ने 2018 में दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू किया. इस योजना को नाम मिला- 'आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' यानी PM-JAY.

ये योजना गरीबी के रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे परिवारों को हॉस्पिटल में कैशलेस इलाज की सुविधा दी. योजना के तहत हर पात्र परिवार को हर साल 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की गारंटी मिलती है. PM-JAY की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसके तहत सिर्फ सरकारी ही नहीं प्राइवेट अस्पतालों में भी इलाज कराया जा सकता है. 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2018 से लेकर 2026 तक 7 सालों में लगभग 55 करोड़ से ज्यादा लोगों को इस योजना के दायरे में लाया जा चुका है, और अब तक करोड़ों लोग मुफ्त ऑपरेशन और इलाज का लाभ उठा चुके हैं.

‘MASSH मानस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल’, नोएडा के संचालक डॉ नमन शर्मा कहते हैं कि इस योजना ने देश के गरीब और कमजोर तबके के लोगों को बीमारी के समय 'पैसे की चिंता' से मुक्ति दी है. लल्लनटॉप से फोन पर बात करते हुए उन्होंने कहा,

अब गरीब से गरीब परिवार भी देश के बड़े प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में बिना किसी झिझक के अपना इलाज करा पा रहा है. इसमें अस्पताल में भर्ती होने से लेकर ऑपरेशन और दवाओं तक का खर्च शामिल है.

Ayushman
आयुष्मान भारत योजना का कार्ड बांटते पीएम मोदी (फोटो- PTI)

मगर इस योजना में भी कई खामियां जिन्हें पिछले 7 सालों में लोगों ने महसूस किया है. ऐसी ही एक कमी के बारे में बताते हुए डॉ नमन कहते हैं,

बहुत सारे बड़े अस्पतालों ने जान बूझकर खुद को इस योजना में इनरोल नहीं कराया. जिसकी वजह से चाहकर भी आयुष्मान योजना का लाभार्थी वहां इलाज नहीं करा पाते.

नोएडा के ही एक बड़े अस्पताल में मेडिकल सुपरिटेंडेंट के तौरपर काम करने वाले एक सीनियर डॉक्टर ने अपना नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि अस्पतालों को आयुष्मान योजना का पैसा लेने के लिए सरकारी महकमों को पैसा खिलाना पड़ता है. यही वजह है कि बहुत से अस्पताल इस योजना में अपना नामांकन नहीं कराते.

पीएम आवास योजना: हर गरीब का अपना 'पक्का घर'

मोदी सरकार की एक और अहम योजना है 'प्रधानमंत्री आवास योजना' यानी PMAY. इस योजना के तहत कच्ची झुग्गी या टपकती छतों के नीचे जिंदगी गुजारने वाले करोड़ों भारतीयों के पक्के घर का सपना साकार हुआ है. PMAY के अंतर्गत आर्थिक रूप से पिछड़े यानी कि EWS कैटेगरी 45 वर्ग मीटर तक की जमीन पर पक्का घर बनान के लिए ढाई लाख रुपये की सहायता दी जाती है.

सरकार का लक्ष्य सिर्फ मकान बनाना नहीं, बल्कि उसे बिजली, पानी, शौचालय और एलपीजी कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधाओं से लैस करना था. इस योजना का लाभ लेने के लिए परिवारों की सालाना आमदनी तीन लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक लागू किये जाने के बाद से लेकर अब तक इस योजना के तहत 4 करोड़ से ज्यादा पक्के घर बनाए जा चुके हैं.

बिहार के ग्रामीण इलाकों में महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली शिखा काजल इसे नारी सशक्तिकरण के टूल के तौरपर देखती हैं. लल्लनटॉप से फोन पर बात करते हुए शिखा कहती हैं,

इन घरों की रजिस्ट्री में महिलाओं को मालिकाना हक दिया गया है. फिर चाहे वो ज्वाइंट हो या सिंगल. जिसकी वजह से समाज में महिलाओं का सम्मान और सुरक्षा दोनों बढ़ा है.

PMAY
पीएम आवास योजना से लाखों परिवारों को फायदा (फोटो- PTI)

मगर PMAY की सबसे बड़ी दिक्कत है, आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के पास जमीन का ना होना. घर बनाने के लिए खुद की जमीन या पट्टा नहीं होने की वजह से EWS कैटेगरी के बहुत सारे परिवार इस योजना का लाभ उठाने से चूक जाते हैं. नवी मुंबई में होम लेस लोगों के लिए एनजीओ चलाने वाले सचिन मोइते कहते हैं,

जिस हिसाब से घर बनाने का मैटेरियल जैसे कि सीमेंट, ईंट, सरिया वगैरह के दाम बढ़ रहे हैं, उस हिसाब से ढाई लाख रुपये की सहायता राशि कई बार कम पड़ जाती है. खासकर ग्रामीण इलाकों में मिलने वाली राशि से पक्का घर पूरा करना लाभार्थियों के लिए आर्थिक रूप से चुनौती भरा हो जाता है।

पीएम उज्जवला योजना: धुएं से मुक्ति, सेहत की गारंटी

ग्रामीण भारत में मां-बहनों का आधा जीवन चूल्हे के धुएं में कट जाता था, जो उनके स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक था. मोदी सरकार का दावा है कि साल 2016 में आई 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' ने इस तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया.

सरकारी वेबसाइ पर दर्ज आंकड़ों की मानें तो दस सालों में 10 करोड़ 55 लाख से ज्यादा मुफ्त एलपीजी (LPG) गैस कनेक्शन इस योजना के तहत बांटे जा चुके हैं. महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली शिखा काजल योजना का लाभ बताते हुए कहती हैं,

सेहत और समय की बचत इस स्कीम का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है. गैस कनेक्शन लगने की वजह से महिला का समय तो बचता ही है, साथ ही साथ उन्हें धुएं से होने वाली बीमारियों से भी राहत मिलती.

Ujjwala
उज्जवला योजना लाभार्थी के साथ पीएम मोदी (फोटो- आजतक)

मगर पूर्वी उत्तर प्रदेश में एनजीओ चलान वाले विवेक सिन्हा की मानें तो पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त. लल्लनटॉप से बात करते हुए विवेक इस योजना के तहत मिलने वाले सिलेंडरों की संख्या में कटौती का मुद्दा उठाते हुए कहते हैं,

पहले लाभार्थियों को सालाना 12 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलते थे, जिसे घटाकर पहले नौ किया गया और अब और घटाकर केवल चार कर दिया गया है. घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़े हैं, जो अलग. इसकी वजह से गरीब परिवारों को साल भर आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ रहा है.

स्वच्छ भारत मिशन: खुले में शौच से आजादी और सम्मान की जिंदगी

2 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ 'स्वच्छ भारत मिशन' सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि देश का सबसे बड़ा जन-आंदोलन बन गया. इसका सबसे बड़ा असर ग्रामीण इलाकों की महिलाओं की सुरक्षा और मर्यादा पर पड़ा.

स्वच्छ भारत मिशन की आधिकारिक वेब साइट के मुताबिक 12 सालों में इस मिशन के तहत पूरे देश में 11 करोड़ से ज्यादा शौचालयों का निर्माण कराया गया. योजना का सबसे पॉजिटिव पहलू ये है कि भारत के लाखों गांवों ने खुद को 'ओडीएफ' यानी खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया है. जिसकी वजह से गंदगी से फैलने वाली बीमारियों में भारी कमी आई है.

महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली शिखा काजल इस योजना की तारीफ करते हुए कहती हैं,

गांवों में महिलाओं के लिए खुले में शौच करना असुरक्षा और अपमान का एक ऐसा चक्र था, जिससे हर रोज उन्हें गुजरना पड़ता था. मगर इस योजना के बाद हालात काफी हदतक बेहतर हुए हैं.

Modi
स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत करते पीएम मोदी (फाइल फोटो- PTI)

मगर नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक स्टडी बताती है कि कई क्षेत्रों में शौचालयों का निर्माण तो हुआ, लेकिन वे गंदगी का प्रबंधन (Waste Treatment) या सीवेज नेटवर्क से नहीं जुड़े. जिसकी वजह से शौचालयों की गंदगी और मिट्टी के आपस में मिल जाने से ना सिर्फ स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट पैदा हुआ. बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा.

कितने ‘पास’, कितने ‘फेल’?

इस बात में कोई शक नहीं कि इन सभी योजनाओं की सबसे बड़ी ताकत रही है ‘टेक्नोलॉजी’. जनधन, आधार और मोबाइल (JAM Trinity) के कॉम्बिनेशन ने भ्रष्टाचार और लीकेज को पूरी तरह रोक दिया, जिससे जनता का भरोसा सरकार और सिस्टम पर मजबूत हुआ.

मगर साथ ही साथ इस योजनाओं की खामियों को भी वक्त रहते दूर करने की जरूरत हैं, वरना योजना का मकसद पूरा करना मुश्किल ही नहीं नामुकिन हो जाएगा. 

वीडियो: खर्चा पानी: मोदी सरकार ने निवेशकों के लिए क्या बड़ा फैसला लिया?

सामान्य प्रश्न

प्रधानमंत्री जनधन योजना क्या है?

प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) देश के उन लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने का एक राष्ट्रीय मिशन है, जिनका किसी भी बैंक में खाता नहीं था. इसके तहत जीरो बैलेंस (शून्य शेष) पर बचत खाता खोला जाता है. इसमें बिना किसी फीस के रुपे (RuPay) डेबिट कार्ड और 2 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा भी मिलता है.

आयुष्मान भारत योजना का लाभ किसे मिलता है?

आयुष्मान भारत योजना का लाभ देश के गरीब, वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मिलता है. लाभार्थियों का चयन साल 2011 की सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) के आंकड़ों के आधार पर किया जाता है. इसके तहत लिस्टेड सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में प्रति परिवार सालाना 5 लाख रुपये तक का कैशलेस और मुफ्त इलाज मिलता है.

Advertisement

Advertisement

()