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पानीपत में सड़क पर उतरे रिफाइनरी कर्मचारी 12 घंटे की शिफ्ट 8 घंटे की कराकर माने, CISF से हुई थी झड़प

Panipat की एक रिफाइनरी में हजारों कर्मचारी विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. अब खबर आ रही है कि रिफाइनरी मैनेजमेंट ने कर्मचारियों की मांगे मान ली हैं.

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24 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 24 फ़रवरी 2026, 11:10 PM IST)
Panipat oil refinery violence Workers Protest
23 फरवरी को हजारों कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया था. (फोटो: सोशल मीडिया)
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हरियाणा के पानीपत में काम के घंटे कम कराने समेत कई मांगों को लेकर एक रिफाइनरी के कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन खत्म हो गया है. अपनी मांगों के लिए बड़े पैमाने पर सड़क पर उतरे इन कर्मचारियों की CISF जवानों से झड़प भी हुई थी. आरोप है कि कुछ कर्मचारियों ने जवानों पर पत्थरबाजी भी की, जिससे करीब डेढ़ घंटे तक तनाव का माहौल बना रहा. अब खबर आ रही है कि रिफाइनरी मैनेजमेंट और कर्मचारियों के बीच समझौता हो गया है. कर्मचारी जिन मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, उन्हें मान लिया गया है.

आजतक से जुड़े प्रदीप रेढू की रिपोर्ट के मुताबिक, रिफाइनरी के कर्मचारी बुधवार, 25 फरवरी से अपने काम पर लौटेंगे. इससे पहले 23 फरवरी को हजारों कर्मचारियों ने लंबित मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया. इस दौरान उनकी सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) के जवानों के साथ कहासुनी हो गई. 

आरोप है कि कर्मचारियों के एक समूह ने लाठियों से हमला किया और पत्थरबाजी शुरू कर दी. सूचना मिलते ही पुलिस टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और सुरक्षा बलों के साथ मिलकर तनाव को काबू किया. हालांकि, कर्मचारी अपनी मांगों पर अड़े रहे.

मंगलवार, 24 फरवरी को रिफाइनरी प्रबंधन ओर कर्मचारियों के बीच सहमति बन गई और मैनेजमेंट ने कर्मचारियों की मांगें मान लीं. DSP (सिटी) राजबीर ने बताया कि इन मांगों पर सहमति बनी है.

- ड्यूटी टाइम 12 घंटे से घटाकर 8 घंटे किया जाएगा.

- सैलरी में किसी तरह की कटौती नहीं की जाएगी.

- अधिकारियों और ठेकेदारों को कर्मचारियों के प्रति अपने व्यवहार में सुधार लाना होगा.

- कैंटीन में खाने का समय तय किया जाएगा. साइट के पास ही खाने-पीने की व्यवस्था की जाएगी और लंच का समय नहीं काटा जाएगा.

- कर्मचारियों के लिए साफ-सुथरे शौचालय की व्यवस्था की जाएगी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों ने आरोप लगाया था कि उनसे तय 8 घंटे की शिफ्ट के बजाय 12 घंटे काम करवाया जा रहा है. साथ ही ड्यूटी के तय समय का कोई ध्यान नहीं रखा जा रहा है. उनका यह भी दावा था कि ओवरटाइम न तो ठीक से रिकॉर्ड किया जाता है और न ही तय नियमों के हिसाब से पैसे दिए जाते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों ने आरोप लगाया था कि उनका मनमाने ढंग से वेतन काटा जा रहा है. उन्होंने ठेकेदारों और कुछ CISF कर्मियों के बुरे बर्ताव की भी शिकायत की, जो विरोध करने पर नौकरी से निकालने की धमकी देते थे.

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