'गोमूत्र को विश्वपटल पर पहुंचाया', मद्रास IIT के चीफ को पद्मश्री, कांग्रेस की बधाई भाजपा को बहुत चुभेगी
Congress on Padma Shri Award: 2022 में V Kamakoti तमिनाडु स्थित IIT Madras के डायरेक्टर बने. वे पेशे से कंप्यूटर साइंटिस्ट हैं और कंप्यूटर आर्किटेक्चर, माइक्रोप्रोसेसर डिजाइन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े तकनीकी क्षेत्रों में उनके योगदान को अहम माना जाता है.

नरेंद्र मोदी सरकार ने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) मद्रास के डायरेक्टर कामाकोटी वीझिनाथन को भी ‘पद्मश्री’ पुरस्कार के लिए चुना है. इस पर कांग्रेस ने भी उन्हें बधाई दी है. लेकिन बधाई देने का तरीका थोड़ा 'सर्कास्टिक' है. पार्टी ने प्रोफेसर वी कामाकोटी की ‘अचीवमेंट्स की पड़ताल’ की तो उनका एक पुराना बयान हाथ लग गया, जो गोमूत्र से जुड़ा है. कांग्रेस ने उसी बयान के सहारे कामाकोटी को पद्मश्री की तंज भरी बधाई दे डाली.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोफेसर वी कामाकोटी ने उस बयान में गोमूत्र के कथित औषधीय गुणों की बात की थी. हालांकि, सरकार ने उन्हें शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना है. कांग्रेस की केरल यूनिट ने रविवार, 26 जनवरी को X पर एक सर्कास्टिक पोस्ट किया. इसमें लिखा है,
"वी कामाकोटी को यह सम्मान(पद्मश्री) मिलने पर बधाई. देश IIT मद्रास में गोमूत्र पर आपके बेहतरीन रिसर्च को पहचानता है, जिसने गोमूत्र को विश्व पटल पर पहुंचाया है."

कांग्रेस ने यह प्रतिक्रिया कामाकोटी के एक वीडियो पर दी, जिसमें उन्होंने पद्मश्री मिलने पर खुशी जाहिर की. इस वीडियो में उन्होंने कहा,
पद्मश्री अवॉर्ड का मेरे लिए सिर्फ एक ही मतलब है कि मैं 'विकसित भारत 2047' के लिए अपनी पूरी कोशिश करूंगा. यह अवॉर्ड किसी एक व्यक्ति के लिए मुमकिन नहीं है, यह एक सामूहिक प्रयास है. मैं यह अवॉर्ड उन सभी को समर्पित करता हूं जिन्होंने इसमें योगदान दिया... उन्हीं की वजह से मुझे यह अवॉर्ड मिल रहा है.
वी कामकोटी ने 2001 में IIT मद्रास की फैकल्टी जॉइन की और साल 2022 में इसके डायरेक्टर बने. वे पेशे से कंप्यूटर साइंटिस्ट हैं और कंप्यूटर आर्किटेक्चर, माइक्रोप्रोसेसर डिजाइन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े तकनीकी क्षेत्रों में उनके योगदान को अहम माना जाता है. IIT मद्रास में उनके नेतृत्व में कई शैक्षणिक और संस्थागत पहल शुरू की गई हैं.
कांग्रेस की यह टिप्पणी दरअसल उनके उस बयान की ओर इशारा करती है, जो उन्होंने पिछले साल एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिया था. उस दौरान उन्होंने स्वदेशी ज्ञान परंपरा और जैविक खेती की चर्चा करते हुए गोमूत्र के संभावित मेडिकल फायदों की बात कही थी. इस बयान पर उस समय भी विपक्षी दलों और तर्कवादी संगठनों ने आपत्ति जताई थी और इसे एक शीर्ष तकनीकी संस्थान के प्रमुख के लिए गलत बताया था.
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