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आग से कैसे लड़ेगी दिल्ली? फायर सर्विस में 72 फीसदी से ज्यादा पद खाली

Delhi Fire Service ने सरकार को जो प्रस्ताव भेजा था, उसके प्रस्ताव के मुताबिक, फायर डिपार्टमेंट में अभी करीब 2,500 कर्मचारी हैं. ये सभी दिल्ली के 71 फायर स्टेशनों में काम कर रहे हैं. DFS ने कहा है कि उसे 9,123 कर्मचारियों की जरूरत है, लेकिन अधिकारियों ने बताया कि यह जरूरत 24 घंटे की शिफ्ट के हिसाब से तय की गई है.

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16 मई 2026 (पब्लिश्ड: 10:47 PM IST)
over 6600 posts vacant in delhi fire department asks government to fill the posts
दिल्ली में आगजनी की घटनाएं बढ़ रही हैं, पर फायर डिपार्टमेंट में लोग कम हैं (PHOTO-India Today)
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दिल्ली में हाल के दिनों में आग लगने की कई घटनाएं सामने आईं. इस बीच दिल्ली फायर सर्विस ने सरकार से गुहार लगाई है कि फायर सर्विस को प्राथमिकता देते हुए खाली पद भरे जाएं. फिलहाल, दिल्ली फायर सर्विस में 6600 लोगों की कमी बताई जा रही है. यानी कुल मिलाकर फायर सर्विस में 72.5 फीसदी से ज्यादा पद खाली हैं. फायर सर्विस ने दिल्ली सरकार से जल्द से जल्द इन पदों को भरने के लिए कहा है.

हिंदुस्तान टाइम्स को फायर सर्विस से जुड़े कुछ डॉक्युमेंट्स मिले हैं. इनके मुताबिक दिल्ली के गृह विभाग को भेजे गए प्रस्ताव में फायरफाइटर्स द्वारा अभी की जा रही 24 घंटे की शिफ्टों के आधार पर आंकड़े दिए गए थे. जबकि फायर सेफ्टी काउंसिल ने थकान कम करने और काम की क्षमता बढ़ाने के लिए 8 घंटे की शिफ्टों की सिफारिश की थी. चीफ फायर ऑफिसर एके मलिक ने भी इस बात की पुष्टि की कि इससे जुड़ा एक प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था और उसी प्रस्ताव की एक कॉपी हिंदुस्तान टाइम्स के हाथ लगी है.

फायर डिपार्टमेंट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि 8 घंटे की शिफ्ट वाला एक सही सिस्टम आग बुझाने वाली एजेंसियों के लिए सबसे अच्छा ऑपरेशनल मॉडल है. लेकिन इसे लागू करने के लिए काफी ज्यादा मैनपावर की जरूरत होती है. अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल दिल्ली फायर सर्विस के कर्मचारी एक बहुत ही खिंचे हुए सिस्टम के तहत काम चला रहे हैं, क्योंकि इमरजेंसी रिस्पॉन्स को रोका नहीं जा सकता. 

सीनियर अधिकारियों ने बताया कि इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है, लेकिन सरकार ने इसे मौखिक मंजूरी दे दी है.

दिल्ली सरकार ने क्या कहा?

दिल्ली के गृहमंत्री आशीष सूद ने कहा कि सरकार फायर डिपार्टमेंट के साथ मिलकर 25 साल का फायरफाइटिंग मास्टरप्लान बनाने पर पहले से ही काम कर रहे है. उन्होंने कहा,

अगले कुछ सालों में सभी स्टाफ, मशीनरी और दूसरी जरूरतें पूरी कर दी जाएंगी, क्योंकि दिल्ली के लोगों की सुरक्षा हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है. फायर डिपार्टमेंट के आधुनिकीकरण के लिए हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे.

दिल्ली में फैक्ट्रियों, गोदामों, रिहायशी कॉलोनियों और कमर्शियल इमारतों में अक्सर आग लगने की घटनाएं होती रहती हैं. खासकर अप्रैल से अगस्त के बीच जब गर्मियों का मौसम अपने चरम पर होता है और तापमान बढ़ने की वजह से बिजली की खपत भी बढ़ जाती है.

कर्मचारियों की कमी

DFS ने सरकार को जो प्रस्ताव भेजा था. उसके प्रस्ताव के मुताबिक, फायर डिपार्टमेंट में अभी करीब 2,500 कर्मचारी हैं. ये सभी दिल्ली के 71 फायर स्टेशनों में काम कर रहे हैं. DFS ने कहा है कि उसे 9,123 कर्मचारियों की जरूरत है लेकिन अधिकारियों ने बताया कि यह जरूरत 24 घंटे की शिफ्ट के हिसाब से तय की गई है. सुझाए गए 8 घंटे की शिफ्ट वाले मॉडल के हिसाब से देखें, तो कर्मचारियों की 90.8% कमी है. क्योंकि 8 घंटे वाले मॉडल के हिसाब से तो 27,369 कर्मचारियों की जरूरत होगी. इस तरह 24,869 कर्मचारियों की कमी बनी रहेगी.

कुल मिलाकर, दिल्ली के लिए 120 फायर स्टेशन मंजूर किए गए हैं, जिनमें से 49 का निर्माण अभी होना बाकी है. प्रस्ताव में कहा गया है कि गृह मंत्रालय के तहत आने वाली स्टैंडिंग फायर एडवाइजरी काउंसिल द्वारा तय किए गए मानकों के हिसाब से दिल्ली में कुल 48,000 फायर ऑपरेटरों की जरूरत है. अधिकारियों ने बताया कि कर्मचारियों की इस कमी का असर फायरफाइटिंग से जुड़े कई कामों पर पड़ता है. जैसे कि आग लगने पर तुरंत कार्रवाई करना (रिस्पॉन्स मैनेजमेंट), नियमित जांच-पड़ताल, उपकरणों की देखरेख, ट्रेनिंग के कार्यक्रम और बड़ी इमरजेंसी के दौरान अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती.

वीडियो: Delhi Vivek Vihar Fire: आग लगने के बाद लोग बिल्डिंग से बाहर क्यों नहीं निकल पाए?

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