ऑपरेशन सिंदूर: 'हम लौटते तो वही दरवाजा खोलते थे', पाकिस्तान की गोलाबारी ने इन लोगों का सबकुछ छीना
पिछले साल 7 और 8 मई को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान से हुई गोलाबारी में जम्मू कश्मीर के पुंछ जिले में 14 लोगों की मौत हुई थी. इस गोलाबारी में 11 साल के जुड़वा बच्चों जोया और जैन की भी मौत हो गई थी. 20 से 24 अप्रैल के दौरान कश्मीर में मॉक ड्रिल का आयोजन हुआ. इस दौरान पीड़ित परिवारों ने अपनी यादें साझा कीं.

जम्मू और कश्मीर के पुंछ का चकत्रू कस्बा. लोहे की गेट लगा एक मंजिला घर. यहां रमीज और उरुसा खान रहते हैं. और उनके साथ रहता है कभी न भरने वाला खालीपन. यह खालीपन उनके सुबह के नाश्ते, दिन के भोजन और शाम की चाय में घुलमिल गया है. खालीपन घर के दरख्त और किनारों तक में जज्ब है और उनके 11 साल के जुड़वा बच्चों जोया और जैन की कब्र पर जाते समय भी उनका पीछा करता है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जोया और जैन पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 7 मई को पाकिस्तानी गोलीबारी का शिकार हुए थे. ये बच्चे उन 14 लोगों में शामिल थे, जिन्होंने पिछले साल 7 और 8 मई को हुई गोलीबारी में अपनी जान गंवाई थी.
जोया और जैन के पिता रमीज और माता उरूसा खान मूल रूप से चक्त्रू के रहने वाले थे. चक्त्रू पुंछ डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर से 9 किलोमीटर दूर है. रमीज एक सरकारी टीचर हैं. उनके बच्चे जोया और जैन पुंछ के क्राइस्ट चर्च स्कूल में 5वीं क्लास में पढ़ते थे. बच्चों की पढ़ाई के चलते रमीज और उरूसा भी पुंछ शिफ्ट हो गए. उन्होंने यहां किराए पर एक घर ले लिया. रमीज बताते हैं,
पहले वे बस या ऑटो रिक्शा से स्कूल जाते थे. मुझे उनकी सिक्योरिटी की चिंता रहती थी. इसलिए मैंने अपनी पत्नी से कहा कि हमें स्कूल के पास ही रहना चाहिए.
7 मई को जब सीमा पार से गोलीबारी शुरू हुई तो कई लोग तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले गए. रमीज ने भी अपने परिवार को सुरनकोट में एक रिश्तेदार के घर शिफ्ट करने का फैसला किया, जोकि पुंछ के मुकाबले सुरक्षित जगह था. रमीज अभी घर से बाहर निकले ही थे. उरूसा ने जोया का हाथ थाम रखा था और जैन उनके ठीक पीछे-पीछे चल रहा था. तभी उनके घर के ठीक बाहर एक गोला आकर गिरा, जिसके धमाके में पहले जोया और फिर जैन की मौके पर ही मौत हो गई. रमीज बताते हैं,
जब हम काम से घर लौटते थे तो वे हमारे लिए दरवाजा खोलते थे. अब तो हम बस किसी तरह जिंदगी गुजार रहे हैं.
जोया और जैन के जन्म के बीच का अंतराल सिर्फ 5 मिनट का था. उनकी मृत्यु भी कुछ ही मिनटों के अंतराल में हुई. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तानी गोलीबारी में 7 और 8 मई को 65 लोग घायल हुए और 598 घर डैमेज हुए. रमीज बताते हैं ,
अब हम सोचते हैं कि हम पुंछ क्यों गए थे, शायद ये ईश्वर की मर्जी थी.
गोला गिरने के चलते रमीज भी घायल हो गए थे. एक छर्रा अब भी उनके शरीर में फंसा हुआ है. डॉक्टर्स का कहना है कि अगर इसे निकाला गया तो उनकी जान को खतरा हो सकता है. रमीज के इलाज के दौरान परिवार ने जुड़वा बच्चों की मौत की जानकारी नहीं दी. उन्हें डर था कि इसका दर्द वो सह नहीं पाएंगे.
रमीज और उरूसा की तरह 7 मई को पुंछ की रहने वाली जसमीत कौर के जीवन में भी अंधेरा भर गया. कौर पुंछ मार्केट में सिंडिकेट चौक के पास मिठाई की दुकान पर बैठी थीं, जो उनके पति अमरीक सिंह चलाते थे. बॉर्डर पार से हुई गोलाबारी में अमरीक सिंह की मौत हो गई और उनकी दुकान भी डैमेज हुई थी.
मुआवजे के तौर पर जसमीत को राज्य के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में फोर्थ क्लास ऑफिसर की नौकरी मली और परिवार को 14 लाख रुपये की मदद. लेकिन नौकरी या आर्थिक मदद किसी इंसान की जगह नहीं भर सकती. जसमीत की दो बेटियां और एक बेटा है. सबसे बड़ी बेटी सहायक नर्स (ANM) की ट्रेनिंग कर रही है. बाकी दो बच्चे अभी भी स्कूल में पढ़ रहे हैं. जसमीत बताती हैं,
जब गोलाबारी शुरू हुई, हम दुकान के पीछे तहखाने में चले गए. अमरीक एक पल के लिए ऊपर गए, तभी एक तोप का गोला बाहर सड़क पर गिरा और उनको चीर गया.
अमरीक की दुकान से कुछ दूर जिया-उल-उलूम मदरसा है. यहां की दीवारों से गोलीबारी के निशान मिट गए हैं. लेकिन मौलाना सईद अहमद हबीब का मानना है कि उस दिन की भयावहता को प्लास्टर चढ़ा कर मिटाया नहीं जा सकता. उन्होंने बताया,
जब गोलाबारी शुरू हुई तब हम हॉस्टल से छात्रों को निकाल रहे थे. लगभग 400 बच्चे जा चुके थे, लेकिन गोला गिरने के समय लगभग 100 बच्चे वहीं रह गए. इस हमले में कुरान के टीचर कारी मुहम्मद इकबाल की मौत हो गई. वहीं पांच छात्र घायल हो गए.
हबीब बताते हैं कि जब छात्र वापस लौटे तो अपने हॉस्टल को देखना भी उनके लिए दुश्वार हो रहा था. दो-तीन टीचर्स ने मिल कर उनको समझाया तब जाकर वे सहज हुए. उनके मुताबिक, अब भी जब बॉर्डर पर तनाव बढ़ता है, कैंपस में तनाव साफ दिखाई देता है.
पुंछ में हुई घटनाओं के बाद, केंद्र और राज्य सरकार ने मृतक के परिवारों को 16 लाख, गंभीर रूप से घायलों को 1 लाख और स्थायी रूप से विकलांग हुए लोगों को 5 लाख रुपये अतिरिक्त देने की घोषणा की. अधिकारियों ने बताया कि जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रशासन ने पुंछ में 5,693 नए अंडरग्राउंड बंकर बनाने का प्रस्ताव रखा है. इनमें से अधिकतर सामुदायिक बंकर होंगे. यह प्रस्ताव अभी मंजूरी की राह देख रहा है.
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