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ऑपरेशन सिंदूर: जब मणिपुर के रिजवान मलिक पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर कहर बनकर टूटे

Operation Sindoor Rizwan Malik: ऑपरेशन सिंदूर को एक साल पूरा हो गया है. इस ऑपरेशन में कई भारतीय हीरोज़ की कहानी छिपी है. कुछ किस्से हमारे सामने आते हैं. और कुछ पर्दे के पीछे से अपना काम करते हैं. हम बात करेंगे मणिपुर के रहने वाले स्क्वाड्रन लीडर रिज़वान मलिक की.

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7 मई 2026 (पब्लिश्ड: 04:17 PM IST)
Operation Sindoor Rizwan Malik
स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक मणिपुर के रहने वाले हैं. (फोटो-इंडिया टुडे)
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संघर्ष के मैदान पर सबसे ज़रूरी अस्त्र क्या हो सकता है? साहस! रात के अंधेरे में एक फाइटर जेट उड़ान भरने को तैयार था. ज़ाहिर है उसे दुश्मन की जड़ तक पहुंचना था. आसमान में घात लगाए ड्रोन उड़ रहे थे, और ज़मीन पर दुश्मन देश की सेना. मौत की संभावना भी थी. लेकिन, फाइटर जेट में बैठे व्यक्ति की डिक्शनरी में डर शब्द नहीं था. अपने फाइटर जेट के साथ उसने अकेले उड़ान भरी और सीधा दुश्मन के सीने पर वार किया.

ये किस्सा है ऑपरेशन सिंदूर का. और नायक का नाम है, स्क्वाड्रन लीडर रिज़वान मलिक. ऑपरेशन सिंदूर को एक साल पूरा हो गया है. इस ऑपरेशन में कई भारतीय हीरोज़ की कहानी छिपी है. कुछ किस्से हमारे सामने आते हैं. रिजवान मलिक का किस्सा भी सामने आ गया है.

एक साल पहले भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को टारगेट करने के लिए ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की थी. आधी रात रिजवान मलिक को टास्क मिला और वो मिशन के लिए निकल पड़े. सुखोई Su-30MKI से मलिक ने उड़ान भरी. दुश्मन के रडार और लगातार हो रही फायरिंग से बचते हुए वो आगे बढ़े.

टारगेट अचीव करना आसान नहीं था. आतंकी ठिकानों के संरक्षण के लिए पाकिस्तानी सेना तैनात थी. एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम से आतंकियों को सुरक्षा दी जा रही थी. मलिक को सटीक हमला करना था. समय की कमी थी और दुश्मन मंडरा रहे थे.

मलिक ने अंधेरे में फाइटर को थोड़ा नीचे किया, अपना टारगेट सेट किया और पहला निशाना दागा जो सीधे टारगेट पर जाकर लगा. काम यहां खत्म नहीं हुआ. मलिक ने दूसरा टारगेट भी हिट किया और इस तरह से उस रात मल्टीपल टास्क पूरे किए. ना सिर्फ दुश्मन को खत्म किया, बल्कि सुरक्षित वापस भी आए. इस बहादुरी के लिए उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया गया था. 

ऑपरेशन सिंदूर के हीरो स्क्वाड्रन लीडर रिज़वान मलिक की कहानी मणिपुर के एक छोटे से गांव से शुरू हुई थी. गांव का नाम कीखू. इंफाल ईस्ट में पड़ता है. रिज़वान के पिता अलहाज हाफिजुद्दीन हॉर्टिकल्चर विभाग से रिटायर्ड अधिकारी हैं.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, मलिक ने साल 2015 में इंडियन एयरफोर्स ज्वाइन की थी. वो वायुसेना के 195वें फ्लाइंग कोर्स का हिस्सा थे. रिज़वान साल 2021 में स्क्वाड्रन लीडर बने. उन्होंने डीप स्ट्राइक मिशन और हवा में लड़ाई की खास ट्रेनिंग ली थी.

प्रेशर में भी तेजी, सटीकता और शांति से काम करने का हुनर रखते हैं. ऑपरेशन सिंदूर में उन्होंने इसी हुनर को दिखाया. पाकिस्तान में अलग-अलग आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था. इसी बहादुरी के लिए भारत सरकार ने उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया.

उनकी तारीफ में मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन.बीरेन सिंह ने लिखा था, 

“मणिपुर के रहने वाले स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक ने ऑपरेशन सिंदूर में अपनी शानदार बहादुरी से अपने और पूरे देश का नाम रोशन किया. आधी रात को दुश्मन के रडार और खतरनाक सुरक्षा व्यवस्था के बीच उड़ान भरते हुए उन्होंने बेहद सटीक तरीके से दुश्मन के मजबूत ठिकानों पर हमला किया. दुश्मन को भारी नुकसान पहुंचाया. रिजवान मलिक की बहादुरी ये दिखाती है कि भारत की सेवा करने के लिए हिम्मत और जुनून की कोई सीमा नहीं होती.”

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फोटो-एक्स

याद दिला दें कि 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी थी. इस आतंकी हमले के जवाब में 7 मई, 2025 को भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था. ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान में बैठे आतंकियों को टारगेट किया. भारतीय सेना ने दुनिया को मैसेज दिया कि भारत आतंकवाद से लड़ने और उसे खत्म करने में सक्षम है. और इसी ऑपरेशन में एक नाम उभर कर आया, स्क्वाड्रन लीडर रिजवान मलिक.

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