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1 लीटर एथेनॉल के लिए खर्च हो रहा 10,000 लीटर पानी? पेट्रोल बचाने के चक्कर में रहना पड़ेगा प्यासा!

Ethanol Water Consumption: इन दिनों पेट्रोल के विकल्प के तौर पर ऐथनॉल की चर्चा हो रही है. हालांकि, ये अलग बात है कि Ethanol बनाने में पानी का भारी खपत हो रही है. इस वजह से सवाल उठ रहे हैं कि क्या इससे बड़ी मुश्किल हो जाएगी.

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30 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 11:14 AM IST)
one litre of ethanol making takes 10 thousand of water does fuel saving taking more water for it
एथेनॉल प्लांट (PHOTO-AajTak)
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भारत में समय के साथ पेट्रोल-डीजल जैसे फ्यूल की खपत लगातार बढ़ती जा रही है. इस बीच सरकार वैकल्पिक माध्यमों जैसे कि 'एथेनॉल' के इस्तेमाल पर जोर दे रही है. हालांकि, एक चिंता है कि एथेनॉल बनाने के चक्कर में हजारों लीटर पानी की खपत बढ़ सकती है. भारत जैसे देश की बड़ी आबादी अभी भी कृषि पर निर्भर है और ऐथनॉल उत्पादन के लिए जिस कच्चे माल का इस्तेमाल होता है, उसके उत्पादन में पानी की भारी खपत होती है. भारत में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलें, जैसे कि मक्का, गन्ना और चावल वगैरह में पहले ही बड़ी मात्रा में पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए होता है. 

इस मामले पर जानकारी देते हुए IPCC के ऑथर अंजल प्रकाश कहतेे हैं,

एथेनॉल ब्लेंडिंग की वजह से भारत में पानी की समस्या और बढ़ सकती है. वजह ये है कि एथेनॉल के कच्चा माल जैसे गन्ना और मक्का, इनकी खेती में बहुत अधिक पानी लगता है. 

Ethanol Blending में होता है चावल का इस्तेमाल

एथेनॉल ब्लेंडिंग को आसान भाषा में समझें तो पेट्रोल में एथेनॉल नाम का एक अल्कोहल मिलाया जाता है. इस अल्कोहल को पौधों से तैयार किया जाता है। ऐथनॉल इस्तेमाल को बढ़ावा देने के पीछे सरकार की योजना कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता कम करना है। इसी वजह से सरकार इस कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रही है। भारत में एथेनॉल उत्पादन के लिए चावल एक अहम कच्चा माल बनकर उभरा है। सरकार ने 2024–25 में एथेनॉल बनाने के लिए करीब 52 लाख टन चावल आवंटित किया था, जिसे बढ़ाकर 2025–26 के लिए 90 लाख टन करने का लक्ष्य रखा गया है।

इस अतिरिक्त अनाज को उपलब्ध कराने के लिए, सरकार ने पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के तहत गरीबों को बांटे जाने वाले चावल का हिस्सा 25% से घटाकर 10% करने की योजना बनाई है. इस तरह जो चावल बचेगा, उसे सीधे डिस्टिलरीज में भेजा जाएगा. वहां इसका इस्तेमाल एथेनॉल ब्लेंडिंग के लिए किया जाएगा.

A labourer plants paddy saplings in a field near Amritsar, Punjab. (Photo: Reuters)
चावल की खेती में बहुथ अधिक पानी का इस्तेमाल होता है (PHOTO-India Today)
Ethanol बनाने में लगता है हजारों लीटर पानी

एथेनॉल ब्लेंडिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें चावल आदि से निकला अल्कोहल पेट्रोल में मिला दिया जाता है. फूड सेक्रेटरी संजीव चोपड़ा के अनुसार, चावल से एक लीटर एथेनॉल बनाने में लगभग 10,790 लीटर पानी लगता है. इसमें खेती के दौरान सिंचाई में इस्तेमाल होने वाला पानी भी शामिल है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक संजीव चोपड़ा ने 2024 में दिल्ली में हुई एक ग्लोबल कॉन्फ्रेंस में यह डेटा शेयर किया था.

उनके मुताबिक चावल से बनने वाले एथेनॉल में इस्तेमाल होने वाला अधिकतर पानी प्रोसेसिंग से नहीं, बल्कि खेती से आता है. 1 किलो चावल उगाने में लगभग 3 हजार से 5 हजार लीटर पानी लगता है. और लगभग ढाई से 3 किलो चावल से एक लीटर एथेनॉल बनता है, जिससे कुल खपत लगभग 10,000 लीटर से ज्यादा हो जाती है. इसकी तुलना में, मक्का से एक लीटर एथेनॉल बनाने में लगभग 4,670 लीटर और गन्ने से लगभग 3,630 लीटर पानी लग जाता है.

Workers harvest sugarcane in a filed in Gove village in Maharashtra. (Photo: Reuters)
गन्ने से भी एथेनॉल बनाया जाता है (PHOTO-India Today)

ऐथनॉल पर बड़ी निर्भरता बढ़ा सकती है जल संकट?

एक समस्या और भी है कि जितना पानी एथेनॉल बनाने में लग रहा है, उसकी तुलना में तैयार होने वाला प्रोडक्ट बहुत कम है. एक किलोग्राम चावल उगाने में लगभग 3,000 लीटर पानी लग जाता है. एक टन चावल से सिर्फ 470 लीटर एथेनॉल ही बना पाता है. एथेनॉल बनाने के लिए चावल और गन्ने का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. इन दोनों ही फसलों को उगाने में पानी की खपत काफी ज्यादा होती है. वहीं एथेनॉल मिलों से बड़ी मात्रा में गंदा पानी (विनेस) भी निकलता है. अगर इस पानी को ठीक से ट्रीट न किया जाए, तो यह जमीन के ऊपर और जमीन के नीचे जल प्रदूषण का कारण बन सकती है.

इस बीच, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में मौजूद एथेनॉल प्लांट जमीन के नीचे के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं. इतने बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की वजह से ग्राउंडवाटर के लेवल को भी खतरा है. हालांकि भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग में चावल का इस्तेमाल अभी शुरुआती स्टेज में है, लेकिन मुख्य रूप से गन्ने के इस्तेमाल पर निर्भर है. पर गन्ना भी पानी की बहुत खपत करता है. गन्ने से एक लीटर एथेनॉल बनाने के लिए लगभग 3600 लीटर पानी की खपत होती है. ऐसे में एथेनॉल किसी भी तरह से 100 प्रतिशत किफयती तो बिल्कुल नहीं है.

वीडियो: खर्चा-पानी: पेट्रोल में अब 85% एथेनॉल? क्या प्लेन के ईंधन में भी डलेगा?

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