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कौन था 1 करोड़ का इनामी नक्सली जिसके एनकाउंटर की खबर गृह मंत्रालय ने दी?

सुरक्षाबलों के इस ऑपरेशन में 8 नक्सली ढेर हुए. इनमें से एक पर 1 करोड़ का इनाम था जबकि दो अन्य पर 25 लाख और 10 का इनाम था.

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21 अप्रैल 2025 (पब्लिश्ड: 07:25 PM IST)
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सांकेतिक तस्वीर. (India Today)
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नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों के अभियान में बड़ी सफलता मिली है. झारखंड के बोकारो में तीन हाई प्रोफाइल वॉन्डेट नक्सलियों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया. इस ऑपरेशन में कुल 8 नक्सलियों को खत्म किया गया. बताया गया है कि इनमें में एक पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था, जबकि दो अन्य पर 25 लाख और 10 लाख का इनाम था.

गृह मंत्री कार्याकल के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ने खुद इसकी जानकारी दी. पोस्ट में लिखा है,

नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ने के लिए हमारा अभियान निरंतर जारी है. आज सुरक्षा बलों को नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ने के लिए चल रहे अभियान में एक और महत्वपूर्ण सफलता मिली. झारखंड के बोकारो में लुगु हिल्स में मुठभेड़ में 8 माओवादी मारे गए, जिनमें एक शीर्ष स्तर का नक्सली नेता विवेक, जिस पर ₹1 करोड़ का इनाम था, और दो अन्य कुख्यात नक्सली शामिल हैं. अभियान जारी है. हमारे सुरक्षा बलों की सराहना करें.

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गृह मंत्री की शोसल मीडिया पोस्ट. 

21 अप्रैल की सुबह करीब 5.30 बजे बोकारो के लालपनिया इलाके के लुगु पहाड़ियों में यह ऑपरेशन शुरू हुआ. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 209 कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन (कोबरा) इकाई और राज्य पुलिस बल के संयुक्त ऑपरेशन के बाद मारे गए नक्सलियों के शव बरामद हुए.

ANI ने CRPF के हवाले से बताया है कि जवानों ने घटनास्थल से हथियारों का जखीरा बरामद किया है, जिसमें एक एके-सीरीज राइफल, एक सेल्फ-लोडिंग राइफल (SLR), तीन इंसास राइफल, एक पिस्तौल और आठ देशी भरमार राइफल शामिल हैं.

कौन था एक करोड़ का इनामी नक्सली विवेक?

प्रयाग मांझी को उसके साथी ‘विवेक दा’ के नाम से बुलाते थे. प्रयाग मांझी भाकपा माओवादी संगठन की सेंट्रल कमिटी का सदस्य था और पारसनाथ इलाके में अपना प्रभाव रखता है. न्यूज़ 18 बिहार-झारखंड की न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक उसे साल 2023 में पारसनाथ और झुमरा पहाड़ियों की कमान सौंपी गई थी. इससे पहले पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस की गिरफ्तारी के बाद मिसिर बेसरा ने पारसनाथ की कमान संभाली थी. बाद में मिसिर बेसरा ने यह जिम्मेदारी विवेक को सौंप दी थी.

हिंदी अखबार ‘पत्रिका’ ने पुलिस के हवाले से लिखा है कि मांझी मूल रूप से झारखंड के धनबाद जिले के टुंडी का रहने वाला था. वह झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 100 से अधिक घटनाओं में वॉन्टेड था. उसके खिलाफ सिर्फ गिरिडीह, बोकारो, चाईबासा और धनबाद जिले में 60 से अधिक मामले दर्ज हैं.

प्रयाग मांझी के साथ में कई अन्य बड़े-बड़े इनामी नक्सली भी थे, जिसमें मुख्य रूप से नक्सली परवेज मांझी उर्फ अनुज दा, अरविंद यादव उर्फ नेताजी, हार्डकोर नक्सली नारायण कोड़ा समेत कई नक्सली शामिल थे. इन नक्सलियों के पास एके 47 और इंसास समेत कई हथियार भी थे.

विवेक की पत्नी जया मांझी इनामी नक्सली थी. बिहार और झारखंड की खबरें कवर करने वाले Lagatar के मुताबिक जया पर भी 25 लाख का इनाम घोषित था. जया की पिछले साल सितंबर में मौत हो गई. उसे गॉल ब्लैडर का कैंसर था. रिम्स में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ा था. जया मांझी को गिरिडीह पुलिस ने 16 जुलाई 2024 को धनबाद के एक निजी अस्पताल से गिरफ्तार किया था. वह नाम बदलकर अपना इलाज करवा रही थी.

वीडियो: अमित शाह ने नक्सलियों से क्या अपील की? इन गांवों को मिलेंगे 1 करोड़ रुपये

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