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शक्ल-सूरत, चश्मे का नंबर तक सेम, इन जुड़वा भाइयों के IIT की परीक्षा में नंबर भी एक जैसे

Odisha के भुवनेश्वर के रहने वाले जुड़वा भाई महरूफ अहमद खान और मसरूर अहमद खान जुड़वा हैं. यहां तक कि उनके चश्मे का नंबर भी एक समान है. महरूफ और मसरूर की जुगलबंदी व्यक्तिगत जीवन से लेकर स्कूल कोचिंग तक में कमाल की रही है.

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iit jee odisha twins identical numbers iit bombay
उड़ीसा के भुवनेश्वर के रहने वाले जुड़वा भाइयों के जेईई मेन्स में एक जैसे नंबर आए हैं. (एक्स)
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आनंद कुमार
18 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 11:57 PM IST)
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बॉलीवुड में जुड़वा भाइयों पर बनी फिल्में आपने जरूर देखी होंगी. इसमें एक भाई को मार लगती है तो चोट दूसरे को भी महसूस होती है. असल जीवन में ऐसा नहीं होता लेकिन कई जुड़वा बच्चे नैन-नक्श में एक से होते हैं. उनको पहचानना भी मुश्किल होता है. ऐसे ही दो जुड़वा भाइयों ने JEE Mains एग्जाम में एकदम बराबर नंबर हासिल किए हैं. ये ‘ट्विनिंग’ यहीं खत्म नहीं होती. उनके चश्मे का नंबर भी एक ही है.

इंडियन एक्स्प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ओडिशा के भुवनेश्वर के रहने वाले महरूफ अहमद खान और मसरूर अहमद खान जुड़वा भाई हैं. 7 मई 2008 को जन्मे महरूफ और मसरूर की जुगलबंदी व्यक्तिगत जीवन से लेकर स्कूल-कोचिंग तक में कमाल की है. यानी कलम पकड़ने से लेकर अब तक का अपना सफर उन्होंने साथ-साथ ही तय किया है. अब देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक में IIT के एग्जाम में दोनों भाइयों ने एक जैसे नंबर हासिल किए हैं. 

BE/B.Tech की परीक्षा में शामिल हुए जुड़वा भाइयों को 300 में से 285 अंक मिले हैं. 13 लाख से ज्यादा छात्रों द्वारा दी गई इंजीनियरिंग इंट्रेस एग्जाम में दोनों भाइयों ने 99.98 परसेंटाइल स्कोर किया है. राजस्थान के कोटा में एक प्राइवेट हायर सेकेंडरी स्कूल में अपनी 12वीं की परीक्षा दे रहे जुड़वा भाई अब आगे JEE Advanced की परीक्षा में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. उनका लक्ष्य इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) बॉम्बे में एडमिशन लेना है. न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में महरूफ ने बताया, 

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भुवनेश्वर के एक प्राइवेट स्कूल से क्लास 9 तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों जुड़वा भाई इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए साल 2023 में कोटा चले गए थे. उनकी मां जीनत बेगम स्त्री रोग विशेषज्ञ (डॉक्टर) हैं. उन्होंने अपने बेटों के सपनों को साकार करने के लिए राज्य सरकार की नौकरी छोड़ दी. अब वो उनकी जरूरतों का ख्याल करने के लिए उनके साथ रहती हैं. जीनत ने बताया कि उनकी चाहत है कि उनके बेटों को IIT- Bombay में दाखिला मिल जाए और फिर उनकी वो अपने जीवन में जो चाहे करें. 

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