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नाबालिग लड़की को कई बार बेचा, 2 साल तक रेप किया, मदद मांगी तो यूपी पुलिस ने थमाया ट्रेन टिकट

Odisha की एक नाबालिग आदिवासी लड़की को कथित तौर पर नौकरी के झांसा देकर Uttar Pradesh लाकर बेचा गया. पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने उसे 2 साल तक कैद में रखा और कई बार रेप किया. यह भी आरोप लगाया कि प्रेग्नेंट होने पर बिना उसकी मर्जी के अबॉर्शन करा दिया गया.

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6 जून 2026 (अपडेटेड: 6 जून 2026, 08:18 AM IST)
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आरोप है कि 2 साल तक नाबालिग आदिवासी लड़की को कैद में रखा गया. (फोटो- इंडिया टुडे)
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ओडिशा की एक 17 साल की नाबालिग आदिवासी लड़की को कथित तौर पर नौकरी का झांसा देकर उत्तर प्रदेश लाया गया. इल्जाम है कि इस दौरान लड़की को कई बार बेचा गया और कई बार रेप किया गया. आरोपियों ने लड़की को कथित तौर पर करीब 2 साल तक कैद में रखा. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया है. NHRC ने कहा कि पीड़िता का बयान तो दर्ज किया गया, लेकिन आरोप है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने उसे केवल ट्रेन टिकट थमाया और कोई कार्रवाई नहीं की.

लड़की आरोपियों के चंगुल में तब फंसी जब वो अपनी मां की सर्जरी के लिए नौकरी की तलाश में थी. ओडिशा पुलिस ने इस मामले पर एक आरोपी को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम से गिरफ्तार कर लिया है. 3 जून को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी दोनों राज्यों- उत्तर प्रदेश और ओडिशा के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) और ढेंकानाल के जिलाधिकारी (DM) से रिपोर्ट की मांगी है.

पीड़िता ढेंकानाल जिले की है, जो एक वकील की मदद से आरोपियों के चंगुल से भागने में सफल रही. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नाबालिग लड़की ने ओडिशा पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई और तहरीर दी. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं औक POCSO कानून (Protection of Children from Sexual Offenses Act) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी.

स्थानीय दलाल ने बेचा

पीड़िता की मां बीमार थी और उनकी सर्जरी करानी थी. नाबालिग ने मां के इलाज के लिए नौकरी की तलाश शुरू की और एक स्थानीय दलाल के संपर्क में आई. दलाल ने लड़की को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में नौकरी दिलाने का झांसा दिया और कथित तौर उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में तस्करी कर दी.

रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि नाबालिग लड़की को झांसी में एक लाख रुपये में बेच दिया गया. पीड़िता को कथित तौर पर करीब तीन महीनों तक बंधक भी बना कर रखा गया, कई बार बलात्कार हुआ, जिससे वो प्रेग्नेंट भी हो गई. लेकिन उसकी मर्जी के खिलाफ उसका गर्भपात करा दिया गया. नाबालिग आदिवासी लड़की के साथ बर्बरता यहीं नहीं रुकी. आरोप है इसके बाद उसे फिर 50 हजार रुपये में दूसरे शख्स को बेच दिया गया.

वकील ने मदद की

आरोप है कि जबरन कैद के दौरान उससे मारपीट भी की गई. इसके अलावा उसे खाना भी नहीं दिया गया, लेकिन नाबालिग ने हार ने नहीं मानी. जानकारी के मुताबिक, किसी तरह पीड़िता एक स्थानीय वकील के संपर्क में आई. वकील ने कैद से निकलने में उसकी मदद की और 19 मई के दिन पीड़िता को झांसी पुलिस के सामने पेश किया. NHRC के बयान के मुताबिक, आदिवासी लड़की ने अपने साथ हुए अपराध के बारे में बयान दर्ज कराए. यूपी पुलिस ने पीड़िता को ओडिशा का ट्रेन टिकट मुहैया कराया, जिससे वो अपने घर पहुंची.

ओडिशा पहुंचने के बाद 23 मई को ओडिशा पुलिस को अपने साथ हुए शोषण के बारे में बताया और लिखित शिकायत दर्ज कराई. इंडियन एक्सप्रेस ने नाबालिग आदिवासी लड़की की कथित तस्करी के संबंध में ढेंकानाल के पुलिस अधीक्षक (SP) अभिनव सोनकर से बात की. SP अभिनव ने मामले की पुष्टि की और बताया कि मामले में 46 साल के बिनय पात्रा नाम के शख्स की गिरफ्तारी विशाखापत्तनम से हुई है. SP ने यह भी बताया कि मामले की जांच करने के लिए पुलिस की दो टीम झांसी भेजी गई हैं.

NHRC ने DGPs और DM से रिपोर्ट मांगी

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने ओडिशा ओर उत्तर प्रदेश के DGPs और ढेंकानाल के DM को लेटर लिखा है. आयोग ने तीनों अधिकारियों से 2 हफ्ते के भीतर रिपोर्ट मांगी है. रिपोर्ट में जांच, पीड़िता की मदद और प्रशासनिक कदमों के बारे में सवाल किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, ओडिशा राज्य महिला आयोग (SCW) की अध्यक्ष शोवना मोहंती भी 30 मई को आदिवासी पीड़िता के घर पहुंची. वहां, उन्होंने बच्ची से मुलाकात की.

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NHRC का बयान.

कामाख्यानगर पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर जितेंद्र मलिक ने भी मामले की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि मामले में कई लोगों से पूछताछ की जा रही है. घटना को लेकर पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया गया है. पुलिस ने पीड़िता को ढेंकानाल बाल कल्याण समिति (CWC) को सौंप दिया है. 

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