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ओडिशा में कस्टोडियल डेथ का मामला, परिवार का आरोप- 'गर्म पानी फेंका, शरीर पर मिर्च रगड़ी'

Odisha Custodial Death: ओडिशा में कस्टोडियल डेथ का एक मामला सामने आया है. परिवार का आरोप है कि पुलिस ने हिरासत में काफी मारपीट की और इस दौरान लगी चोटों की वजह से ही मौत हुई. इस केस में एसपी समेत पूरे थाने पर एक्शन लिया गया है.

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मौ. जिशान
| अजय कुमार नाथ
2 जून 2026 (पब्लिश्ड: 04:46 PM IST)
Odisha Police,
ओडिशा पुलिस पर लगातार कस्टोडियल डेथ के आरोप लग रहे हैं. (सांकेतिक तस्वीर: PTI)
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ओडिशा में पुलिस पर एक बार फिर हिरासत में मौत (Custodial Death) का आरोप लगा है. सोमवार, 2 जून को गंजम जिले के बरहामपुर स्थित एक हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एक शख्स की मौत हो गई. मृतक की पहचान गंजम के सुबुलिया गांव के रहने वाले सुशांत साहू के रूप में हुई है. उनके परिवार का आरोप है कि पत्थर की खदान के झगड़े के सिलसिले में पुलिस ने हिरासत में लिया था. परिवार ने पुलिस पर सुशांत को टॉर्चर करने का आरोप लगाया. पुलिस के सीनियर अधिकारियों ने आरोपी पुलिसवालों पर सख्त एक्शन लिया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सदर्न रेंज के पुलिस इंस्पेक्टर जनरल (IGP) नीति शेखर ने IPS प्रोबेशनर नितेश कुमार मिश्रा से कविसूर्यनगर थाने के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज का इंडिपेंडेंट चार्ज वापस ले लिया. उनका ट्रांसफर डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर में कर दिया गया है.

IGP ने सब-इंस्पेक्टर समीर कुमार राउत, असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर बैकुठा जेना और कॉन्स्टेबल सुमन कुमार साहू को सस्पेंड कर दिया. शुरुआती जांच के बाद एक होमगार्ड ड्राइवर को भी नौकरी से निकालने का आदेश दिया गया. निष्पक्ष जांच के लिए IGP नीति शेखर ने गंजम के सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) ​​हरीश बीसी को कविसूर्यनगर पुलिस थाना और बालीचाई चौकी पर तैनात सभी स्टाफ को ट्रांसफर करने का निर्देश दिया.

अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत

इंडिया टुडे से जुड़े अजय कुमार नाथ की रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार ने कहा कि पुलिस सुशांत को 25 मई को एक मामले में पूछताछ के लिए कविसूर्यनगर पुलिस स्टेशन ले गई थी. परिवार का आरोप है कि कई दिनों तक पुलिस कस्टडी में रखा गया था और शनिवार, 30 मई को जब घर लाया गया था, तो उनकी हालत काफी खराब थी.

सुशांत की फैमिली ने बताया कि थाने से रिहा होने के बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी. उन्हें पहले अस्का के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया. बाद में बेहतर इलाज के लिए बरहामपुर के एक हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया. डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद सोमवार, 1 जून को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

परिवार का आरोप है कि हिरासत के दौरान सुशांत के साथ बहुत मारपीट हुई. सुशांत की पत्नी मामाजिन परधान ने दावा किया कि पुलिस कस्टडी में उन्हें बुरी तरह टॉर्चर किया गया. मामाजिन ने आरोप लगाते हुए कहा,

"मेरे पति एक दिहाड़ी मजदूर थे और शारीरिक रूप से अक्षम थे. वह काम के लिए बाहर गए थे और हो सकता है कि कोई बात या कहासुनी हुई हो. पुलिस आई और उन्हें ले गई. पुलिस ने इतनी बुरी तरह पीटा कि उनके शरीर पर छाले पड़ गए. उन पर गर्म पानी भी डाला. उन्हें एक हफ्ते तक वहां रखा गया और टॉर्चर करने के बाद छोड़ा गया."

आगे आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा,

"उन्होंने उनके शरीर पर मिर्च पाउडर भी रगड़ा. जब उन्हें मुझे सौंपा गया, तो उनकी हालत बहुत खराब थी. हमने उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन बाद में दर्द और तकलीफ की वजह से उनकी मौत हो गई."

परिवार वालों के मुताबिक, कस्टडी से रिहा होने के बाद सुशांत ठीक से हिल-डुल नहीं पा रहे थे और उन्होंने अपने शरीर में तेज दर्द की शिकायत की थी. उनकी बिगड़ती हालत देखकर परिवार वाले उन्हें मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए ले गए. लेकिन उनकी तबीयत और बिगड़ती गई.

इस मौत से रिश्तेदारों और आस-पास के लोगों में गुस्सा है, जिन्होंने मौत के कारणों की निष्पक्ष जांच की मांग की है. परिवार के सदस्यों ने कस्टोडियल टॉर्चर के आरोप सही पाए जाने पर जवाबदेही और सख्त कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने मृतक के लिए न्याय और परिवार के लिए मुआवजा भी मांगा है.

इन आरोपों ने पुलिस कस्टडी में बंदियों के साथ होने वाले बर्ताव को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा की हैं. हालांकि, परिवार के दावों की अभी तक अलग से पुष्टि नहीं हुई है. गंजम के SP हरीशा बीसी ​​ने कहा,

"मामले की हर एंगल से जांच की जाएगी और मैं जांच रिपोर्ट जमा करूंगा. कानून के मुताबिक, हम किसी व्यक्ति को 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में नहीं रख सकते. हालांकि, हम CCTV फुटेज और दूसरे मौजूद सबूतों की जांच करके पता लगाएंगे कि उन्हें (सुशांत साहू) कथित तौर पर ज्यादा समय तक हिरासत में क्यों रखा गया था. स्टेट ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन सेल भी मामले की जांच करेगा. बताया जा रहा है कि उन्हें गैस्ट्राइटिस से जुड़ी दिक्कतों की वजह से उल्टी हो रही थी और उनके परिवार को सौंपने से पहले उन्हें मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए ले जाया गया था. अगर कोई पुलिसवाला कोई गलत काम करता पाया जाता है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी."

DGP ने दिए जांच के आदेश 

ओडिशा के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) ने ओडिशा पुलिस के ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन सेल (HRPC) को कस्टडी में टॉर्चर और अननैचुरल मौत के आरोपों की जांच करने का भी आदेश दिया है.

मामाजिन ने दावा किया कि उनके पति पूरी तरह स्वस्थ थे और FIR में नाम ना होने के बावजूद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अस्का के मेडिकल ऑफिसर बाल गोपाल बेहरा ने भी कंफर्म किया कि जब सुशांत साहू को हॉस्पिटल लाया गया तो उनकी हालत सीरियस थी.

पिछले हफ्ते ओडिशा में पुलिस की ज्यादती के दो और मामले सामने आए थे. केंद्रपाड़ा जिले में पुलिस पर एक मां और बेटे के साथ कस्टडी में टॉर्चर करने का आरोप लगा. इस मामले में पिछले हफ्ते एक महिला पुलिस इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया था.

इससे पहले, कटक के बारंग पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज को कस्टडी में एक युवक पर हमला करने के आरोपों के बाद उनके पद से हटा दिया गया था. युवक कटक के SCB मेडिकल कॉलेज में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है.

वीडियो: सोनभद्र में डिलीवरी के बाद बिना टांका लगाए छोड़ भागा डॉक्टर, महिला की मौत

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