एक्सपर्ट भी नहीं जान पाएंगे किस एग्जाम का पेपर बनाया, NTA ऐसा प्लान ला रहा
National Testing Agency भविष्य में होने वाली परीक्षाओं के लिए Zero Trust Architecture मॉडल पर पेपर बनाने का प्लान कर रहा है.

NEET-UG 2026 की परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद ‘National Testing Agency’ (NTA) की काफी फजीहत हुई थी. पीड़ित छात्रों और उनके परिजनों सहित अन्य लोगों का गुस्सा सरकार और NTA पर फूटा था. अब NTA अपने नेतृत्व में भविष्य में होने वाली परीक्षाओं के लिए ‘जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर’ के मॉडल पर काम करने की तैयारी में है. खबर में जानेंगे कि ‘जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर’ क्या होता है? साथ ही यह भी जानेंगे कि इस मॉडल की मदद से पेपर लीक की घटना को कैसे रोका जा सकता है?
दरअसल, NTA अब पेपर बनाने की प्रक्रिया में बदलाव करने के प्लान पर काम कर रहा है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, NTA अपने पुराने ढर्रे से अलग ‘जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर’ मॉडल पर काम कर रहा है. इसमें पेपर बनाने वाले लोगों पर नहीं, बल्कि उस प्रक्रिया पर ट्रस्ट किया जाएगा, जिससे पेपर्स तैयार किए जाएंगे.
आसान भाषा में समझा जाए तो पेपर बनाने वाले एक्सपर्ट्स को पता ही नहीं होगा कि वो किस एग्जाम के लिए क्वेश्चन तैयार कर रहे हैं. दरअसल, एजेंसी पहले एग्जाम के पेपर्स बनाने के लिए विषयों के एक्सपर्ट्स के हायर करती थी तो उन्हें पता होता था कि वो किस एग्जाम के लिए क्वेश्चन बना रहे हैं. अब इस प्रक्रिया को बदलने का प्लान है. अब NTA जिन एक्सपर्ट्स के क्वेश्चन बनाने के लिए हायर करेगी, उन्हें यह जानकारी नहीं होगी कि वो किस एग्जाम के लिए क्वेश्चन तैयार कर रहे हैं. एक्सपर्ट्स की ओर से बनाए गए सभी क्वेश्चन को एक बड़े से रिपॉजिटरी (केंद्रीय भंडार) में जमा किया जाएगा.
रिपॉजिटरी में क्वेश्चन जमा होंगेरिपॉजिटरी प्रक्रिया के बाद कम से कम लोगों की मदद से होने वाले एग्जाम के पेपर्स तैयार किए जाएंगे. साथ ही पेपर की जानकारी बहुत ही कम लोगों के पास होगी. NTA ने यह फैसला नीट पेपर 2026 के लीक होने और CBI (Central Bureau Of Investigation) की जांच के बाद उठाया है. पेपर लीक मामले में CBI ने अब तक की जांच के आधार पर 13 लोगों के गिरफ्तार किया है. इनमें से कई ट्रांसलेटर और विषय एक्सपर्ट्स हैं. वहीं, आने वाले 21 जून को NEET-UG 2026 का दोबारा एग्जाम होने वाला है. NTA के DG ने अपने एक बयान में कहा कि पेपर के ट्रांसपोटेशन की जिम्मेदारी भारतीय वायु सेना को दी गई है.
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