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नीतीश कटारा हत्याकांड के दोषी सुखदेव यादव की मौत, रिहाई के चार महीने बाद एक्सीडेंट में गई जान!

Sukhdev Yadav के साथ पूर्व सांसद DP Yadav के बेटे Vikas Yadav और उसके रिश्तेदार विशाल को Nitish Katara Murder case में दोषी ठहराया गया था. सुखदेव को इस साल जून में 20 साल की सजा काटने के बाद जमानत मिली थी.

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सचिन कुमार पांडे
| आशीष श्रीवास्तव
30 अक्तूबर 2025 (अपडेटेड: 30 अक्तूबर 2025, 12:07 PM IST)
Nitish Katara murder case convict sukhdev yadav died in road accident was released from jail after 20 years
मृतक सुखदेव यादव. (Photo: File/ITG)
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चर्चित नीतीश कटारा हत्याकांड के दोषी सुखदेव यादव की एक सड़क हादसे में मौत हो गई. सुखदेव चार महीने पहले, जून 2025 में ही नीतीश कटारा की हत्या के आरोप में 20 साल की सजा काट के जेल से बाहर आया था. उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में मंगलवार, 28 अक्टूबर की रात 10 बजे एक कार एक्सीडेंट में उसकी मौत हो गई.

तेज रफ्तार कार ने मारी टक्कर

पुलिस के मुताबिक सुखदेव यादव दो अन्य लोग, जिनकी पहचान विजय गुप्ता और भगवत सिंह के रूप में हुई है, के साथ बाइक में कहीं जा रहा था. तभी एक तेज रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मार दी. हादसे के बाद सुखदेव यादव की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं विजय और भगवत गंभीर रूप से घायल हो गए हैं. फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है. सुखदेव के शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया है.

बता दें कि सुखदेव यादव को 2002 के चर्चित नीतीश कटारा हत्याकांड में अदालत ने दोषी ठहराया था. यह उस वक्त का काफी हाई प्रोफाइल मर्डर था और देश भर में चर्चित हुआ था. दरअसल, नीतीश कटारा, यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री डी.पी. यादव की बेटी भारती यादव का दोस्त था. इस वजह से भारती के भाई और डीपी यादव के बेटे विकास यादव ने अपने चचेरे भाई विशाल यादव और सुखदेव यादव के साथ मिलकर नीतीश की हत्या कर दी थी.

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देश भर में फैला था आक्रोश

इस घटना ने उस समय पूरे देश में ऑनर किलिंग को लेकर भारी आक्रोश पैदा कर दिया था. अदालत ने तीनों आरोपियों को 20 साल की सजा सुनाई थी. सुखदेव यादव पूरी सजा काटने के बाद इस साल जून में ही जेल से रिहा हुआ था. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सुखदेव की रिहाई का विरोध भी किया था, लेकिन कोर्ट ने कहा था कि जब सजा निश्चित अवधि की हो तो ‘रिमिशन’ (सजा में छूट) की आवश्यकता नहीं होती. इस फैसले के बाद वह जेल से बाहर आया था. लेकिन रिहाई के बाद ज्यादा दिन तक जिंदा नहीं रह पाया. महज चार महीनों में ही उसकी एक्सीडेंट में मौत हो गई.

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