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सरकार ने Nimesulide दवा पर किस तरह का बैन लगाया है?

Nimesulide Ban: स्वास्थ्य मंत्रालय (MoHFW) का कहना है कि 100 मिलीग्राम से ज्यादा डोजेज में निमेसुलाइड का सेवन लोगों की सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है. मंत्रालय ने Cough Syrup पर भी सख्ती दिखाई है.

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सरकार ने Nimesulide दवा और कफ सिरप पर उठाया बड़ा कदम. (ITG)
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मिलन शर्मा
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31 दिसंबर 2025 (पब्लिश्ड: 10:30 PM IST)
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क्या आप भी हल्का बुखार या शरीर में दर्द होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के निमेसुलाइड मेडिसिन (Nimesulide) लेते हैं? अब केंद्र सरकार ने 100 मिलीग्राम से ज्यादा डोजेज वाली निमेसुलाइड की सभी 'इमीडिएट-रिलीज ओरल दवाओं' को बनाने, बेचने और इसके डिस्ट्रीब्यूशन पर बैन लगा दिया है. सरकार ने निमेसुलाइड की हाई डोज दवा पर प्रतिबंध लगाया है. हल्की डोज की दवा ली जा सकती है, लेकिन डॉक्टर की सलाह के बगैर नहीं.

इंडिया टुडे से जुड़े मिलन शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ 100 मिलीग्राम से ज्यादा की ओरल फॉर्मूलेशन जो तुरंत असर करती हैं, उन पर बैन लगाया गया है. इसलिए 100 मिलीग्राम से कम की स्ट्रेंथ या 100 मिलीग्राम से ज्यादा की स्ट्रेंथ, लेकिन जो दूसरी तरह से रिलीज होती हैं (जैसे- सस्टेन्ड रिलीज, एक्सटेंडेड रिलीज) उन पर यह बैन लागू नहीं है. नॉन-ओरल फॉर्मूलेशन जैसे टॉपिकल जेल/क्रीम या सपोसिटरी पर भी पाबंदी नहीं है.

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) का कहना है कि 100 मिलीग्राम से ज्यादा डोजेज में निमेसुलाइड का सेवन लोगों की सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है. मंत्रालय ने यह भी माना है कि इस दवा के ज्यादा सुरक्षित विकल्प बाजार में पहले से मौजूद हैं, इसलिए इसका इस्तेमाल गैरजरूरी है. यह फैसला ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26A के तहत और ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की सलाह के बाद लिया गया है.

निमेसुलाइड पर बैन क्यों लगा? ये क्यों खतरनाक?

यशोदा हॉस्पिटल्स के मुताबिक, निमेसुलाइड ह्यूमन बॉडी में COX-II इनहिबिटर के रूप में काम करती है. COX-II एक ऐसा एंजाइम है जो बीमारी या किसी अन्य स्थिति में सूजन और दर्द पैदा करने में अहम भूमिका निभाता है.

COX-II को रोकने की वजह से निमेसुलाइड सूजन कम करने वाली दवा की तरह काम करती है. यह एक नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (NSAID) है, यानी यह बिना स्टेरॉयड के दर्द और सूजन को कम करती है.

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निमेसुलाइड पर स्वास्थ्य मंत्रालय का नोटिफिकेशन. (ITG)

लेकिन निमेसुलाइड मरीजों के लिवर को भी डैमेज कर सकती है. कई इंटरनेशनल रिपोर्ट्स और मेडिकल ऑब्जर्वेशन में ये बात सामने आई है कि हाई डोज निमेसुलाइड से लिवर टॉक्सिसिटी, उल्टी, पेट दर्द आदि साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं.

ICMR यानी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने भी माना कि कुछ मामलों में इस दवा से लिवर को नुकसान पहुंच सकता है. इसके बाद ही एक्सपर्ट कमिटी ने ICMR की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया और इसे बैन कर दिया.

इन सिफारिशों के अनुसार, निमेसुलाइड का इस्तेमाल केवल तभी किया जाना चाहिए जब दूसरी दवाएं असर न करें. यह दवा गर्भवती महिलाओं, दूध पिलाने वाली महिलाओं और प्रेग्नेंसी का प्लान कर रही महिलाओं को भी नहीं दी जानी चाहिए.

लिवर या किडनी की बीमारी से पीड़ित मरीजों को भी इससे दूर रहने की सलाह दी गई है. साथ ही, इसे लिवर या किडनी को नुकसान पहुंचाने वाली अन्य दवाओं के साथ नहीं लिया जाना चाहिए. यह दवा पहले से ही 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बैन है.

इसके साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने खांसी के सिरप (कफ सिरप) को लेकर भी सख्ती दिखाई है. मंत्रालय ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी किया है. इसमें खांसी के सिरप को ओवर-द-काउंटर, यानी बिना डॉक्टर की पर्ची मिलने वाली दवाओं की सूची से हटाने का प्रस्ताव रखा गया है.

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खांसी के सिरप पर स्वास्थ्य मंत्रालय का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन. (ITG)

अगर यह लागू होता है तो खांसी का सिरप लेने के लिए डॉक्टर की पर्ची जरूरी होगी. हालांकि, खांसी की गोलियां, टैबलेट और लोजेंज अभी भी बिना पर्ची के उपलब्ध रहेंगे. ड्राफ्ट में कहा गया है कि 'सिरप' को ड्रग्स रूल्स 1945 के शेड्यूल K के 13वें क्रमांक (एंट्री नंबर 7) से हटाया जाएगा. फिलहाल, इसमें खांसी के लिए सिरप, लोजेंज, गोलियां और टैबलेट दर्ज है.

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ड्रग्स रूल्स 1945 (cdsco.gov.in)

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार का यह कदम हाल ही में मध्यप्रदेश में डिफेक्टेड खांसी का सिरप पीने से 22 बच्चों की मौत के बाद उठाया गया है. इसके अलावा, राजस्थान समेत अन्य जगहों पर भी ऐसे मामले सामने आए, जहां छोटे बच्चों को ऐसा खांसी कe सिरप दिया गया, जो उनके लिए नहीं बना था. इससे उनकी मौत हो गई.

इन घटनाओं की जानकारी ड्रग रेगुलेटर के तहत गठित एक विशेषज्ञ समिति को दी गई थी. समिति ने माना कि कफ सिरप को लेकर दी गई मौजूदा छूट खत्म की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके. सरकार ने इस मसौदे पर कंपनियों, डॉक्टरों और अन्य संबंधित पक्षों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं. इसके बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा.

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