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'पर्यावरण के संरक्षक' NGT के ज्यादातर फैसले प्रोजेक्ट डेवलपर्स के पक्ष में? रिपोर्ट दंग कर देगी

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की स्थापना 18 अक्टूबर, 2010 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एक्ट, 2010 के तहत की गई थी. NGT की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संबंधी मुद्दों का तेजी से निपटारा करना है. NGT के लिए यह अनिवार्य है कि उसके पास आने वाले पर्यावरण संबंधी मुद्दों का निपटारा 6 महीनों के भीतर हो जाए.

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26 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 26 फ़रवरी 2026, 12:07 AM IST)
NGT india environmental watchdog project clearence
साल 2020 से अब NGT के 5 से 4 फैसले प्रोजेक्ट डेवलपर्स के पक्ष में गए हैं. (सांकेतिक तस्वीर- इंडिया टुडे)
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सुप्रीम कोर्ट ने साल 2021 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला दिया था. शीर्ष अदालत ने कहा था कि NGT एक निर्णय देने वाली संस्था भर नहीं है, यह एक विशेषज्ञ संरक्षक है जिसकी जिम्मेदारी पर्यावरण की रक्षा करना और इससे जुड़े विवादों में न्याय सुनिश्चित करना है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि जनता के हितों की रक्षा और पर्यावरण के दोहन को रोकना इस संस्था के मूल ढांचे में निहित है.

अब इंडियन एक्सप्रेस ने साल 2020 से अब तक NGT में आए 1 लाख से ज्यादा मामलों की समीक्षा की है. इस पड़ताल में चौंकाने वाले पैटर्न सामने आए हैं. हर पांच में से चार मामलों में NGT का फैसला प्रोजेक्ट डेवलपर्स के पक्ष में गया है. ये सभी मामले पर्यावरण और वन मंजूरी से जुड़े थे.

साल 2020 से 2025 के बीच सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने 329 अपीलें दायर कीं. इनमें सरकार द्वारा दी गई पर्यावरण मंजूरी को चुनौती दी गई थी. इन में से केवल 65 मामलों में ही NGT ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला दिया. इसके उलट जब प्रोजेक्ट डेवलपर्स ने सरकार द्वारा मंजूरी से इनकार करने के खिलाफ अपील दायर की तो 160 में से 126 मामलों में उनको राहत मिली.

यह ट्रेंड पहले नहीं था. अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016 से 2019 के आंकड़ें थोड़े संतुलित दिखते हैं. यहां दोनों पक्षों के राहत का प्रतिशत लगभग 18 से 31 प्रतिशत के बीच था. लेकिन पिछले 24 महीनों में प्रो प्रोजेक्ट ट्रेंड तेजी से बढ़ा है. मंजूरी को चुनौती देने वाली केवल 7 प्रतिशत अपीलें सफल रही हैं. वहीं इसके उलट सरकार द्वारा मंजूरी से इनकार किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं में से 88 प्रतिशत मामलों में राहत दी गई है. ये याचिकाएं उद्योग जगत की ओर से लगाई गई थीं.

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल क्या काम करता है?

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की स्थापना 18 अक्टूबर, 2010 को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एक्ट, 2010 के तहत की गई थी. NGT की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संबंधी मुद्दों का तेजी से निपटारा करना है. NGT के लिए यह अनिवार्य है कि उसके पास आने वाले पर्यावरण संबंधी मुद्दों का निपटारा 6 महीनों के भीतर हो जाए. NGT  का न्यायिक क्षेत्र बेहद विस्तृत है. यह उन सभी मामलों की सुनवाई कर सकता है जिनमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण शामिल हो. इसमें पर्यावरण से संबंधित कानूनी अधिकारों को लागू करना भी शामिल है. 

वीडियो: प्रधानमंत्री की 3 गाड़ियों को सड़क पर चलने की इजाज़त नहीं, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने क्या कह ठुकराई मांग

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