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असम में बुलडोजर से तोड़ी नेहरू की मूर्ति, फुटेज वायरल, कांग्रेस ने आंदोलन की चेतावनी दी

Assam Nehru's statue: असम के कछार में जवाहरलाल नेहरू की मूर्ति को कुछ अज्ञात लोगों ने तोड़ दिया. CCTV में कैद हुई इस घटना से राजनीतिक बवाल मच गया है. लोग इस घटना की आलोचना कर रहे हैं और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

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Assam Nehru's statue
पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू की 10 फीट ऊंची मूर्ति 2000 में लगाई गई थी. (फोटो-इंडिया टुडे)
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रितिका
26 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 07:56 PM IST)
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असम के कछार जिले में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मूर्ति को कुछ अज्ञात लोगों ने तोड़ दिया. CCTV में कैद हुई इस घटना से राजनीतिक बवाल मच गया है. लक्ष्मीपुर मंडल के कांग्रेस नेताओं ने इस घटना की आलोचना करते हुए कार्रवाई की मांग की है. नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर आरोपियों को दो दिनों के अंदर नहीं पकड़ा गया, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे.

इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार दिलीप कुमार सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक, 23 फरवरी की देर रात पैलापूल में लगी नेहरू की 10 फीट ऊंची मूर्ति को तोड़ दिया गया. अगले दिन जब लोगों ने मूर्ति को टूटा हुआ पाया, तो CCTV कैमरा चेक किए. इसमें दिखा कि JCB की मदद से स्टैच्यू को गिराया गया है. इस घटना से कांग्रेस नेता काफी नाराज हैं.

लक्ष्मीपुर मंडल के कांग्रेस नेताओं ने 24 फरवरी को इस मामले में पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई. असम कांग्रेस ने घटना का वीडियो साझा करते हुए एक्स पर लिखा, “हम असम के कछार जिले के लखीपुर में पंडित नेहरू की मूर्ति को तोड़ने की घिनौनी हरकत की कड़ी निंदा करते हैं. मूर्ति को एक एक्सकेवेटर का इस्तेमाल करके खुलेआम तोड़ा गया. हम जानना चाहते हैं कि इस एक्सकेवेटर का मालिक कौन है? यह तोड़-फोड़ किसके कहने पर की गई? हम अपराधियों के खिलाफ सख्त और कड़ी कार्रवाई की मांग करते हैं.”

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पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप कुमार डे ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “यह मूर्ति जानबूझकर तोड़ी गई थी. पोयलापुल मर्चेंट एसोसिएशन की देखरेख में मार्केट एरिया में लगे CCTV कैमरों में रात में यह सब कैद हो गया”.

उन्होंने मांग की कि जांच के बाद इस काम में शामिल लोगों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए. अगर दो दिनों के अंदर आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो लक्ष्मीपुर कांग्रेस बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर होगी. यह मूर्ति साल 2000 में नेहरू कॉलेज के सामने लगाई गई थी, जो 1965 में बना एक इंस्टीट्यूशन है.

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