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'सोनिया के पास हैं नेहरू से जुड़े डॉक्यूमेंट, लौटाने में हेल्प करें', प्रधानमंत्री म्यूजियम की राहुल को चिट्ठी

प्रधानमंत्री म्यूजियम सोसायटी के मुताबिक Congress की पूर्व अध्यक्ष Sonia Gandhi के पास Jawaharlal Nehru से जुड़े कई अहम कागजात हैं. इसमें नेहरू के एडविना माउंटबेटन, अल्बर्ट आइंस्टीन, अरुणा आसफ अली और जयप्रकाश नारायण सहित अन्य लोगों के साथ हुए पत्राचार से संबंधित कागजात भी शामिल हैं. इसी को लेकर अब Rahul Gandhi को लेटर लिखा गया है.

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16 दिसंबर 2024 (अपडेटेड: 16 दिसंबर 2024, 08:54 AM IST)
Nehru papers soniya gandhi
अहमदाबाद स्थित इतिहासकार रिजवान कादरी ने राहुल गांधी को पत्र लिखा है. (फ़ोटो - PTI)
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प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (PMML) सोसाइटी के सदस्य रिज़वान कादरी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लेटर लिखा है. इस लेटर में उन्होंने उन महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट्स की वापसी में उनकी मदद मांगी है, जो जवाहरलाल नेहरू से जुड़े हैं और ‘सोनिया गांधी के पास रखे हुए’ हैं.

बताया जाता है कि 2008 में तत्कालीन UPA अध्यक्ष सोनिया गांधी ने PMML (तब नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी या NMML) से दान किए गए नेहरू के कागजातों का एक बड़ा हिस्सा ले जाने के लिए एक प्रतिनिधि नियुक्त किया था. रिज़वान कादरी अहमदाबाद स्थित इतिहासकार हैं और PMML सोसाइटी के सदस्य भी. वही PMML सोसाइटी, जिसकी अध्यक्षता पीएम मोदी करते हैं.

राहुल गांधी को लिखे उनके लेटर के मुताबिक़, ये कागजात नेहरू के एडविना माउंटबेटन, अल्बर्ट आइंस्टीन, अरुणा आसफ अली और जयप्रकाश नारायण सहित अन्य लोगों के साथ हुए पत्राचार से संबंधित हैं. PMML सोसाइटी ने फ़रवरी, 2024 में हुई अपनी आख़िरी वार्षिक आम बैठक (AGM) के दौरान इस पर चर्चा की थी. तब ये कहा गया था कि इस पर कानूनी राय ली जाएगी. PMML के मेंबर्स ने पहले भी कई बार नेहरू के कागजात ग़ायब होने का मुद्दा उठाया था.

लेकिन इंडियन एक्सप्रेस को सूत्रों ने बताया था कि फ़रवरी में पहली बार स्पष्ट रूप से चर्चा हुई कि तत्कालीन UPA अध्यक्ष सोनिया ने दान किए गए कागजात से 51 कार्टन ले लिये थे. अब राहुल गांधी को लिखे लेटर में रिज़वान कादरी ने उस दौरान की बैठक में हुई इस चर्चा का भी ज़िक्र किया है. इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़, उन्होंने चर्चा का हवाला देते लिखा,

PMML के रिकॉर्ड के अनुसार, मार्च 2008 में एमवी राजन ने जवाहरलाल नेहरू के डॉक्यूमेंट्स से निजी कागजात और सरकार से संबंधित कागजात को अलग करने के लिए PMML का दौरा किया था. इस अलग किए जाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, राजन और उनके साथ काम कर रही PMML की टीम को सभी प्राइवेट कागजात, तब के PMML के डायरेक्टर की मंजूरी मिली. इसके बाद 5 मई, 2008 को 51 कार्टन बॉक्स में सोनिया गांधी को भेजे गए.

10 दिसंबर को लिखे इस लेटर में कादरी ने आगे लिखा,

इन बॉक्स में जयप्रकाश नारायण, पद्मजा नायडू, एडविना जैसी हस्तियों से संबंधित पत्र शामिल थे. साथ ही, माउंटबेटन, अल्बर्ट आइंस्टीन, अरुणा आसफ अली, विजयलक्ष्मी पंडित, बाबू जगजीवन राम और गोविंद बल्लभ पंत के भी. विपक्ष के नेता के तौर पर मैं आपसे (राहुल से) इस मुद्दे पर संज्ञान लेने और भारत की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण की वकालत करने का आग्रह करता हूं.

कादरी ने अपने लेटर में बताया,

'जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल फंड' ने 1971 में उदारतापूर्वक जवाहरलाल नेहरू के निजी कागजात PMML को दिये थे. ये डॉक्यूमेंट्स भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण कालखंड के बारे में अमूल्य जानकारी प्रदान करते हैं. 2008 में सोनिया गांधी  के अनुरोध पर इन दस्तावेजों का एक संग्रह PMML से वापस ले लिया गया था.

ये भी पढ़ें - 'इंद्रधनुष' बोलकर 'नेहरू मेमोरियल म्यूजियम' का नाम बदला, नेहरू से पहले यहां कौन रहता था?

राहुल गांधी या उनके ऑफ़िस की तरफ़ से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. इससे पहले, रिज़वान कादरी ने इसी मुद्दे पर 9 सितंबर को सोनिया गांधी को भी लेटर लिखा था. उस लेटर में कहा गया था कि महत्वपूर्ण है कि हमारे देश के इतिहास की व्यापक समझ सुनिश्चित करने के लिए ये रिकॉर्ड सुलभ रहें. इसीलिए या तो कागजात वापस कर दिए जाएं, प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं या उन तक डिजिटल पहुंच दी जाए.

बताते चलें, बीते दिनों PMML सोसाइटी का कार्यकाल कुछ महीनों के लिए बढ़ाया गया था. 4 नवंबर को कार्यकाल ख़त्म होने वाला था. एक आदेश के ज़रिए संस्कृति मंत्रालय ने PMML कार्यकारी परिषद के कार्यकाल के साथ मेल खाते हुए 13 जनवरी 2025 तक किया था. PMML के उपाध्यक्ष रक्षामंत्री राजनाथ सिंह हैं और अध्यक्ष हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.

गृह मंत्री अमित शाह, निर्मला सीतारमण, धर्मेंद्र प्रधान, अनुराग ठाकुर जैसे केंद्रीय मंत्री इसके 29 सदस्यों में शामिल हैं. नेहरू मेमोरियल म्यूजियम और लाइब्रेरी (NMML) का नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री म्यूजियम और लाइब्रेरी सोसाइटी’ कर दिया गया था. 15 जून, 2023 को हुई NMML सोसाइटी की एक मीटिंग में ये फैसला लिया गया था.

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