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ब्यूटीशियन ने NTA एक्सपर्ट के साथ मिलकर किया पेपर लीक... CBI जांच में और परतें खुलीं

NEET-UG 2026 Paper Leak: जांच में पता चला है कि Pune में रहने वाली एक ब्यूटीशियन, सिंडिकेट के लिए बिचौलिए का काम कर रही थी. छात्रों तक उसने कथित तौर पर लीक हुआ पेपर पहुंचाया. और क्या पता चला?

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18 मई 2026 (अपडेटेड: 18 मई 2026, 02:39 PM IST)
NEET-UG paper leak
NEET-UG पेपर लीक को लेकर छात्रों में भारी आक्रोश है. (फाइल फोटो: आजतक)
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NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच में कई बड़े खुलासे हुए हैं. जांच में पता चला है कि महाराष्ट्र के पुणे में रहने वाली एक ब्यूटीशियन, सिंडिकेट के लिए बिचौलिए का काम कर रही थी. वह ट्यूशन के लिए टीचर ढूंढ रहे छात्रों को जाने-माने स्कूल टीचरों से मिलवाती थी. इन्हीं छात्रों तक उसने कथित तौर पर लीक हुआ पेपर पहुंचाया. इसके बाद पुणे से होता हुआ यह पेपर नासिक, गुरुग्राम और बाद में जयपुर जैसे शहरों तक पहुंचा.

जांच में क्या पता चला?

सूत्रों ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को यह जानकारी दी. रिपोर्ट के मुताबिक, पुणे के सुखसागर नगर में एक ब्यूटी पार्लर चलाने वाली मनीषा वाघमारे को 14 मई को गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद दो और आरोपियों मनीषा गुरुनाथ मंधारे (57) और रिटायर्ड टीचर पी.वी. कुलकर्णी को भी गिरफ्तार किया गया था. मनीषा मंधारे NEET-UG 2026 के लिए पेपर बनाने वाले पैनल की एक एक्सपर्ट थीं. CBI ने उन्हें मुख्य आरोपी बनाया है.

CBI ने अदालत को बताया कि मंधारे ने कथित तौर पर पैसों के लिए छात्रों को पेपर लीक किए थे. एजेंसी ने बताया कि NTA की एक्सपर्ट होने के नाते उनकी बॉटनी और जूलॉजी दोनों विषयों के पेपरों तक पूरी पहुंच थी. CBI ने बताया,

"मनीषा मंधारे ने मनीषा वाघमारे और पी.वी कुलकर्णी समेत दूसरे आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रची. उन्होंने छात्रों को काफी पैसों के बदले परीक्षा से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराई. वे NTA के पैनल में शामिल एक्सपर्ट हैं और पेपर बनाने की प्रक्रिया में शामिल थीं. इसी दौरान उन्हें NEET UG 2026 के फाइनल पेपर तक पहुंच मिल गई. इसके बाद उन्होंने पैसों के लालच में छात्रों को यह पेपर लीक कर दिया."

10 लाख का एक पेपर 

सूत्रों ने बताया कि इस मामले में ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे की भूमिका भी अहम है. उसे पता चला था कि मनीषा मंधारे की पेपर तक पहुंच है. इसलिए वाघमारे ने मंधारे के साथ मिलकर प्लान बनाया. कथित तौर पर दोनों ने मिलकर कुलकर्णी को भी इस काम में शामिल कर लिया. वाघमारे ने ऐसे छात्रों की तलाश शुरू कर दी, जो यह पेपर खरीद सकें.

सूत्रों ने कहा कि जांच के दौरान यह पाया गया कि वाघमारे कथित तौर पर कई छात्रों के संपर्क में थी. कई छात्र ट्यूशन के लिए टीचर ढूंढ़ने के लिए उनके पास आए थे और उन्होंने हर छात्र से लगभग 10 लाख रुपये का सौदा किया था.

पुणे से लेकर गुरुग्राम तक फैला नेटवर्क

इस रकम में से वाघमारे, मंधारे और पी.वी. कुलकर्णी ने कथित तौर पर 2.5 लाख से 3 लाख रुपये आपस में बांटने का फैसला किया. सूत्रों के मुताबिक, वाघमारे ने कथित तौर पर चार-पांच छात्रों का इंतजाम किया और अपना प्लान एक पुराने दोस्त धनंजय निवृत्ति लोखंडे के साथ शेयर किया. इसके बाद धनंजय ने शुभम खैरनार से संपर्क किया, जो नासिक में काउंसलिंग का बिजनेस चलाता था.

12 मई को पेपर रद्द होने के कुछ ही घंटों बाद शुभम पहला संदिग्ध था, जिसे गिरफ्तार किया गया. धनंजय ने कथित तौर पर वाघमारे से NEET के पेपर लिए और उन्हें शुभम को सौंप दिए. शुभम ने PDF फाइलें गुरुग्राम के रहने वाले यश यादव के साथ और बाद में जयपुर के रहने वाले कुछ लोगों के साथ शेयर कीं. यश को भी गिरफ्तार कर लिया गया है.

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'कई गिरफ्तारियां अभी बाकी'

CBI ने अदालत को बताया कि एक बड़ी साजिश चल रही थी. कई आरोपियों की पहचान होना और उन्हें गिरफ्तार किया जाना अभी बाकी है. 16 मई को सुनवाई के बाद कोर्ट ने कुलकर्णी और वाघमारे को 10 दिन की रिमांड पर भेज दिया. इसके बाद, 17 मई को तीसरी आरोपी मनीषा मंधारे को अदालत ने पूरे 14 दिन की सीबीआई कस्टडी में भेज दिया.

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