पेपर लीक से पहले दिल्ली में फर्जी NEET पेपर का खेल, एग्जाम से ऐन पहले धरे गए आरोपी
2 मई 2026 को दिल्ली पुलिस ने दिल्ली के महिपालपुर में एक होटल पर छापा मारा. यहां से एक व्यक्ति को हिरासत में लिया जो नीट का पेपर देने वाले छात्रों से पैसे लेकर उन्हें बड़े कॉलेज में एडमिशन का झूठा दावा कर रहा था.

NEET पेपर लीक को लेकर देश भर में बवाल मचा है. मामला NEET का एग्जाम होने के कुछ दिन बाद सामने आया था. हालांकि इस एग्जाम से ठीक एक दिन पहले भी पुलिस ने कुछ ऐसे घोटालेबाजों को पकड़ा था जो NEET का पेपर लीक करने का दावा कर रहे थे.
बीती 3 मई को परीक्षा से ठीक एक दिन पहले दिल्ली पुलिस ने महिपालपुर के एक होटल में छापेमारी की थी. यहां गुजरात के रहने वाले विनोद भाई बीका भाई पटेल को उनके तीन दोस्तों के साथ हिरासत में लिया गया था.
पूछताछ में पता चला कि पटेल ने गुजरात में कई छात्रों के सामने दावा किया था कि उनके पास नीट का ‘असली पेपर’ है. वह उन छात्रों को बड़े कॉलेज में एडमिशन दिला सकते हैं, लेकिन एग्जाम से ठीक एक दिन पहले 2 मई को पुलिस ने विनोद पटेल को उनके दोस्तों समेत हिरासत में ले लिया.
पूछताछ में खोला भेदइसके बाद पुलिस ने पूछताछ की तो पटेल ने सारा भेद खोल दिया. इंडियन एक्सप्रेस को मामले की जांच कर रहे एक अधिकारी ने बताया कि पटेल ने अपने दोस्तों और परिवार के ही कुछ स्टूडेंट्स को ये भरोसा दिलाया था कि वह एग्जाम से ठीक एक दिन पहले उन्हें NEET का क्वेश्चन पेपर दे सकता है. इतना ही नहीं, इस पेपर को एग्जाम से पहले दिल्ली में सॉल्व भी किया जाएगा. कुल 25 लाख में सौदा पक्का हुआ. तय हुआ कि ये पैसा छात्रों को कॉलेज में एडमिशन मिल जाने के बाद लिया जाएगा. हालांकि, पटेल ने छात्रों से टोकन मनी के नाम पर कुछ पैसे पहले ही ले लिए थे. ऐसे कुल तीन छात्रों को पटेल ने झांसे में लिया था.
हालांकि, मामला इतना सीधा-सरल नहीं था. आरोपी की गिरफ्तारी के बाद इसमें गजब का ट्विस्ट आया.
पुलिस ने बताया कि जो पेपर NEET का बताकर बेचा जा रहा था, वो असली पेपर से एकदम मैच नहीं हुआ. दरअसल, एग्जाम की तैयारी कराने वाले अलग-अलग कोचिंग सेंटर्स में छात्रों के लिए प्रैक्टिस पेपर बनाए जाते हैं. आरोपी जो पेपर नीट का बताकर बेच रहे थे, वो ऐसे ही कई प्रैक्टिस क्वेश्चन पेपर का मिक्स्चर था. उन्हें जुटाकर एक जगह कर दिया गया था. प्लान था कि इस पेपर की प्रैक्टिस के बाद छात्र एग्जाम में बैठेंगे. उनमें से कोई भी अगर एग्जाम पास कर लेता है तो पटेल उनसे पैसे वसूल लेता.
घोटाले के पीछे रैकेटपुलिस का कहना है कि इस षड्यंत्र के पीछे एक पूरा रैकेट काम कर रहा था. विनोद पटेल को ये आइडिया देने वाला संतोष जायसवाल था. 50 वर्षीय जायसवाल दिल्ली में एक पैथॉलजी लैब चलाता है. उसकी पहचान मेडिकल के कुछ छात्रों से थी. वह बिहार के गोपालगंज का मूल निवासी है और दिल्ली के ईस्ट कैलाश में रहता है. डीसीपी (क्राइम) संजीव यादव ने बताया कि संतोष जायसवाल ने किर्गिस्तान से एमबीबीएस करने वाले अखलाक आलम नाम के व्यक्ति को प्रैक्टिस क्वेश्चन पेपर्स से सवाल जुटाकर नीट का फर्जी पेपर तैयार करने को कहा था.
इसके अलावा अखलाक आलम बिहार के 15 छात्रों को दिल्ली लेकर भी आया था, जो नीट का एग्जाम देने वाले थे. उनके रहने की व्यवस्था भी पटेल और जायसवाल ने की. इसके लिए उन्होंने संत कुमार सिंह नाम के एक प्रॉपर्टी डीलर से संपर्क किया. उसके गाजियाबाद में मौजूद एक फ्लैट में सभी छात्रों को रखा गया. वहां कंप्यूटर लगाए गए और परीक्षा से पहले प्रैक्टिस के लिए उन्हें नीट के कथित 'क्वेश्चन पेपर' भी दिए गए.
महिपालपुर होटल में छापेमारीइसी बीच पुलिस को इस बात की सूचना मिली कि नीट पेपर को लेकर घपलेबाजी करने वाले कुछ लोग महिपालपुर के होटल में रुके हैं. वहां छापेमारी की गई तो आरोपी विनोद पटेल वहां मिला. उनके पास से कुछ आपत्तिजनक डॉक्युमेंट्स भी पुलिस को मिले. डीसीपी यादव के मुताबिक, आरोपी पटेल ने छात्रों से कैश में पैसे लिए थे. इसके अलावा उनकी 10वीं-12वीं की मार्कशीट और एक ब्लैंक चेक भी लिया था. इसके बदले में उसने वादा किया था कि वह NEET एग्जाम से जरिए उनका बड़े कॉलेज में एडमिशन कराएगा.
पटेल को हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने उसके ही जरिए संतोष जायसवाल को भी बुलाया और गिरफ्तार कर लिया. जायसवाल ने पुलिस को संत कुमार सिंह के फ्लैट का पता बताया जहां 15 छात्र बिहार से बुलाकर ठहराए गए थे. इसके बाद पुलिस ने वहां भी छापा मारा और मौके से 15 छात्रों के साथ 145 क्वेश्चन पेपर और खाली चेक बरामद किए. पुलिस ने बताया कि छात्रों में कई नाबालिग थे. उन्हें नीट का एग्जाम देना था. उन्हें समझा-बुझाकर वापस भेज दिया गया.
पुलिस ने मामले में विनोद पटेल, संतोष जायसवाल के साथ-साथ संत कुमार सिंह और डॉ. आलम उर्फ गोल्डन आलम को भी गिरफ्तार कर लिया है. महिपालपुर के होटल में पटेल के साथ मिले उसके तीन दोस्तों को अभी हिरासत में नहीं लिया गया है. बताया गया कि इस रैकेट से उनका कोई संबंध सामने नहीं आया है.
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