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'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' कोई नहीं पढ़ पाएगा? NCERT बिक चुकी किताब खरीदारों से वापस ले रहा

NCERT के काउंटर पर काम करने वाले एक कमर्चारी ने 25 फरवरी को बताया कि NCERT के पब्लिकेशन डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने उन्हें किताब से सभी खरीददारों से संपर्क करने और उनसे किताब की प्रति वापस मांगने के लिए कहा था.

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NCERT Supreme court corruption judiciary
NCERT ने हार्ड कॉपी खरीदने वालों से किताब वापस मांगनी शुरू कर दी है. (इंडिया टुडे)
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आनंद कुमार
26 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 26 फ़रवरी 2026, 05:11 PM IST)
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NCERT की 8वीं क्लास की किताब के एक चैप्टर में 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' वाले कॉन्टेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट की नाराजगी को देखते हुए NCERT ने सामाजिक विज्ञान की इस किताब को वापस ले लिया है. यही नहीं जिन लोगों ने NCERT के काउंटर से किताब खरीदी है, उनसे संपर्क करके किताब की प्रति वापस करने को कहा गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 24 और 25 फरवरी को किताब खरीदने वाले लोगों से संपर्क किया गया और उनसे मौजूदा विवाद की जानकारी देते हुए किताब की प्रति वापस करने को कहा गया. काउंटर पर काम करने वाले एक कमर्चारी ने 25 फरवरी को बताया कि NCERT के पब्लिकेशन डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने उन्हें किताब से सभी खरीदारों से संपर्क करने और उनसे किताब की प्रति वापस मांगने के लिए कहा था.

कर्मचारी ने आगे बताया कि NCERT काउंटर से 23 फरवरी को कुल 38 प्रतियां बेची गईं. इनमें से 16 प्रतियां वापस आ चुकी हैं. तीन कस्टमर्स का संपर्क नंबर नहीं था. उनकी UPI ID के आधार पर बैंक से जानकारी जुटाई गई.

इंडियन एक्सप्रेस ने NCERT के निदेशक डीपी सकलानी से खरीदारों से किताब वापस मांगे जाने पर प्रतिक्रिया मांगी थी. लेकिन उन्होंने कॉल और मैसेज का कोई जवाब नहीं दिया. शिक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, 24 फरवरी को इस किताब की कोई भी प्रति नहीं बेची गई.

NCERT की किताब में क्या-क्या लिखा है?

NCERT ने 23 फरवरी को 8वीं क्लास की नई सोशल साइंस टेक्स्टबुक जारी की थी. रिपोर्ट के अनुसार इसमें “The role of the judiciary in our society” नाम का एक चैप्टर है. इस चैप्टर में “corruption in the judiciary” नाम का एक सेक्शन है. इसमें बताया गया है कि अदालतों को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इसमें साफ लिखा है कि न्यायपालिका के अलग-अलग स्तरों पर भ्रष्टाचार की घटनाएं सामने आती रही हैं. 

इस चैप्टर में सुप्रीम कोर्ट के 81 हजार, हाई कोर्ट्स के 62 लाख 40 हजार, डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट के 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या भी बताई गई है.

25 जनवरी को मामले में सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस कॉन्टेट पर कड़ी आपति जताई. उन्होंने कहा कि वह धरती पर किसी को भी संस्था की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने और उसे बदनाम करने की अनुमति नहीं देंगे.

वीडियो: NCERT की नई किताब में न्यायपालिका पर ऐसा क्या लिखा कि भड़के CJI सूर्यकांत?

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