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न्यूज कॉन्टेंट बनाने वाले इन्फ्लुएंसर्स पर रहेगी 'नजर', IT एक्ट में बदलाव हो सकता है

यूट्यूब, इंस्टाग्राम और एक्स के फ्रीलांस कॉन्टेंट क्रिएटर्स भी सरकार के राडार में आने वाले हैं. सूचना प्रसारण मंत्रालय इंडिपेंडेंट न्यूज क्रिएटरों पर लगाम कसने की तैयारी में है.

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31 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 05:25 PM IST)
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कॉन्टेंट क्रिएटर्स पर कंट्रोल बढ़ाने वाला नियम ला रही सरकार. (फोटो- India today)
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सोशल मीडिया पर कॉन्टेंट बनाने वाले लोगों के लिए सरकार ने तैयारी कर ली. उन्हें आईटी एक्ट के दायरे में लाया जा सकता है. इसके लिए आईटी (इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलजी) रूल्स में बदलाव किया जा सकता है. इससे करंट अफेयर्स पर न्यूज, सटायर या स्टैंडअप कॉमेडी जैसे कॉन्टेंट बनाने वाले इंडिपेंडेंट क्रिएटर्स पर निगरानी रखी जाएगी. 

यानी यूट्यूबर ध्रुव राठी की तरह जो लोग यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक या एक्स पर ऐसा कॉन्टेंट बनाते हैं जो किसी भी तरीके से न्यूज लगता है, उन पर ये नियम लागू हो सकते हैं. उन्हें सरकार के निर्देशों को मानना ही पड़ेगा. सरकार उनसे किसी भी कॉन्टेंट में ‘सुधार’ करने, उसे हटाने या उसके लिए माफी मांगने के निर्देश दे सकती है.

पहले ये नियम बड़े मीडिया संस्थानों के लिए होते थे. इनमें इंडिपेंडेंट कॉन्टेंट क्रिएटर्स मीडिया संस्थान नहीं माने जाते थे. उन्हें सरकार बाकी सभी यूजर्स की तरह ट्रीट करती थी. लेकिन अब अगर नियम बदलते हैं तो ऐसे इंडिपेंडेंट क्रिएटर्स भी इसके दायरे में आएंगे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने सोमवार, 30 मार्च को YouTube, Instagram और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले फ्रीलांस न्यूज क्रिएटर्स को IT Rules 2021 के दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा है. इस प्रस्ताव के ड्राफ्ट नियमों पर 14 अप्रैल तक सभी शेयरहोल्डर्स से जवाब मांगा गया है. इसके मुताबिक, जो कॉन्टेंट क्रिएटर्स ऑफिशियली न्यूज पब्लिशर के रूप में रजिस्टर्ड नहीं हैं, उन्हें भी अब सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) के अधिकार क्षेत्र में रखा जाएगा. 

पहले ये इन नियमों के दायरे में नहीं थे और सरकार को किसी आपत्तिजनक पोस्ट या कॉन्टेंट को हटवाने के लिए संबंधित सोशल मीडिया कंपनियों से संपर्क करना पड़ता था. लेकिन, नए नियम के अनुसार अगर किसी कॉन्टेंट में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो सूचना प्रसारण मंत्रालय उस कॉन्टेंट को ब्लॉक करने का सीधा आदेश दे सकता है या उसमें बदलाव करने को कह सकता है.

ये नियम ऐसे समय में लाए जा रहे हैं जब कुछ सोशल मीडिया यूजर्स को सरकार के खिलाफ उनके सटायर पोस्ट को ब्लॉक करने के नोटिस मिले हैं.

टेक पॉलिसी थिंक टैंक ‘The Dialogue’ के संस्थापक निदेशक Kazim Rizvi ने बिजनस स्टैंडर्ड को बताया कि इस संशोधन से ‘इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी’ (IDC) की भूमिका बढ़ जाएगी. अब ये कमेटी सिर्फ पब्लिशर्स की शिकायतों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मंत्रालय की ओर से सीधे भेजे गए मामलों को भी देखेगी. इसका असर ये होगा कि ऑनलाइन कॉन्टेंट को सरकारी रिव्यू में लाने का कानूनी रास्ता खुल जाएगा. इसमें कॉन्टेंट को हटाने या ब्लॉक करने जैसी कार्रवाई की जा सकेगी. 

रिपोर्ट के मुताबिक ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए जो एडवाइजरी जारी करेगी, उसे मानना अनिवार्य होगा. इन निर्देशों को सोशल मीडिया कंपनियों की ‘ड्यू डिलिजेंस’ का हिस्सा माना जाएगा. ड्यू डिलिजेंस यानी वो ‘जरूरी बात’ जो उन्हें आईटी एक्ट 2000 की धारा 79 के तहत मानना जरूरी है. ऐसा न करने पर कंपनियों को सरकार से जो कानूनी सुरक्षा (सेफ हार्बर) मिलती है, उसे बंद कर दिया जाएगा. 

हालांकि, इससे पहले भी सरकार ऐसे कदम उठा चुकी है. साल 2024 में उसने ब्रॉडकास्टिंग सर्विस (रेगुलेशन) बिल, 2024 लाने की कोशिश की थी. इसमें सोशल मीडिया क्रिएटर्स पर कड़े नियम लागू करने का प्रस्ताव था. लेकिन इसका काफी विरोध होने के बाद सरकार ने बिल वापस ले लिया.

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