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'जिहादी ड्रग' क्या है? जिसकी 182 करोड़ की खेप पकड़ने पर अमित शाह ने NCB को शाबाशी दे दी

1960 के दशक में इस 'Captagon' ड्रग्स को फेनेथाइलिन ब्रांड नाम से ADHD (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) और नार्कोलेप्सी (नींद से जुड़ी बीमारी) के इलाज के लिए बनाया गया था.

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16 मई 2026 (अपडेटेड: 16 मई 2026, 07:27 PM IST)
NCB, Amit Shah
NCB ने करीब 182 करोड़ के ‘जिहादी ड्रग’ जब्त किया. (फोटो-इंडिया टुडे/ ANI)
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केंद्रीय जांच एजेंसी नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने पहली बार एक ऑपरेशन के तहत करीब 182 करोड़ रुपये के ‘कैप्टागन’ नाम के प्रतिबंधित (Banned) ड्रग्स को जब्त किया है. इस ऑपरेशन की जानकारी खुद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए दी. ‘कैप्टागन’ को ‘जिहादी ड्रग’ भी कहा जा रहा है. क्यों कहा जा रहा है ये भी जानेंगे लेकिन पहले ये जान लेते हैं कि NCB की ओर से की गई इस कार्रवाई को लेकर अमित शाह ने क्या कहा? 

‘ऑपरेशन RAGEPILL’ को लेकर अमित शाह ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा,

मोदी सरकार 'नशा-मुक्त भारत' के लिए संकल्पित है. यह बताते हुए खुशी हो रही है कि 'ऑपरेशन RAGEPILL' के जरिए, हमारी एजेंसियों ने पहली बार 182 करोड़ रुपये की कीमत का 'कैप्टागॉन' (Captagon) जब्त किया है, जिसे ‘जिहादी ड्रग’ भी कहा जाता है. Middle East भेजे जाने वाले इस ड्रग कंसाइनमेंट का भंडाफोड़ और एक विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी, नशों के प्रति हमारी 'जीरो टॉलरेंस' की नीति के शानदार उदाहरण हैं.

Captagon
अमित शाह का बयान.

शाह ने आगे पोस्ट में लिखा,

मैं फिर दोहराता हूं कि भारत में आने वाले या हमारे क्षेत्र को ट्रांजिट रूट बनाकर देश से बाहर जाने वाले नशों के हर एक ग्राम पर हम सख्त कार्रवाई करेंगे. NCB के बहादुर और चौकस योद्धाओं को मेरा सलाम.

'जिहादी ड्रग' क्या है?

अब समझते हैं कि इस ‘कैप्टागन’ को ‘जिहादी ड्रग’ क्यों कहा जाता है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 1960 के दशक में इस ड्रग्स को फेनेथाइलिन ब्रांड नाम से ADHD (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) और नार्कोलेप्सी (नींद से जुड़ी बीमारी) के इलाज के लिए बनाया गया था. बाद में लोग इससे नशे और लत के आदी हो गए, जिसकी वजह से 1980 के दशक में इसे इंटरनेशनल लेवल पर बैन कर दिया गया. साथ ही संयुक्त राष्ट्र (UN) की अनुसूची II की लिस्ट में भी डाल दिया गया.

NCB
NCB की ओर से सीज की गई 'कैप्टागन'. (फोटो-ANI)

सीरियाई गृहयुद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों के दौरान यह ड्रग एक बार फिर सुर्खियों में आया. आतंकवादी संगठनों जैसे-ISIS पर यह आरोप लगा की वे इसका इस्तेमाल अपने लड़ाकों के लिए करते हैं. क्योंकि, इसके सेवन से थकान और डर को कम करने में मदद मिलती है.‘कैप्टागन’ को खाने के बाद लड़ाके बिना सोए, बिना थके और बिना किसी डर के लंबे समय तक लड़ सकते हैं. इसी वजह से इस ड्रग को बड़े पैमाने पर ‘जिहादी ड्रग’ के नाम से बुलाया जाने लगा. 

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