मुस्लिम टीचर ने उर्दू नज्म वॉट्सऐप स्टेटस पर लगाई, FIR हो गई, अब HC ने बचाया
वीडियो में Pakistan के मशहूर शायर Shoaib Kiani की लिखी गई ‘बे-हया’ नाम की एक उर्दू नज्म पढ़ी गई थी. Madhya Pradesh High Court ने कहा कि इसे शेयर करना किसी भी तरह से सांप्रदायिक नफरत फैलाना नहीं है.

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने बैतूल के एक सरकारी स्कूल के मुस्लिम टीचर के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी है. टीचर ने अपने वॉट्सऐप स्टेटस पर एक वीडियो पोस्ट किया था. इस वीडियो में शोएब कियानी की लिखी गई ‘बे-हया’ नाम की एक उर्दू नज्म पढ़ी गई थी. कोर्ट ने कहा कि यह नज्म पाकिस्तान और दूसरी जगहों पर महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर आधारित है और इसे शेयर करना किसी भी तरह से सांप्रदायिक नफरत फैलाना नहीं है.
क्या है मामला?यह मामला याचिकाकर्ता फैजान अंसारी से जुड़ा है, जो एक सरकारी स्कूल में टीचर हैं. उनके खिलाफ बैतूल जिले के चिचोली पुलिस स्टेशन में 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) की धारा 353(2) के तहत FIR दर्ज की गई थी. फैजान ने 22 जुलाई 2025 को वॉट्सऐप स्टेटस पर एक वीडियो लगाया था, जिसमें पाकिस्तान के मशहूर शायर शोएब कियानी की नज्म 'बे-हया' पढ़ी गई थी.
यह नज्म पितृसत्ता और महिलाओं के अधिकारों पर एक कटाक्ष है. याचिका के मुताबिक, उसी दिन पुलिस ने उन्हें पुलिस स्टेशन बुलाया, उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया और FIR दर्ज कर ली. उनके खिलाफ आरोप लगा कि वीडियो आपत्तिजनक, महिलाओं से नफरत करने वाला है और इससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है.
FIR दर्ज होने के बाद याचिकाकर्ता को धमकियां और परेशानियों का सामना करना पड़ा. उन्होंने पुलिस अधीक्षक (SP) से सुरक्षा भी मांगी, लेकिन कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई.
कोर्ट ने क्या कहा?लीगल वेबसाइट, लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस बीपी शर्मा ने कहा,
“पिटीशनर का बिना किसी एक्स्ट्रा कॉमेंट के नज्म शेयर करना, दुश्मनी को बढ़ावा देने या सार्वजनिक उपद्रव जैसा नहीं माना जा सकता. क्योंकि शोएब कियानी की लिखी उर्दू नज्म मानवाधिकारों पर एक व्यंग्यपूर्ण टिप्पणी है. यह पाकिस्तान या किसी दूसरे देश में महिलाओं के साथ होने वाले बुरे व्यवहार को दिखाती है.”
कोर्ट ने आगे कहा कि इस नज्म को सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने शेयर किया और अलग-अलग नेशनल और इंटरनेशनल इवेंट्स में साहित्य के बड़े नामों ने इसकी तारीफ की. इससे पहले मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने भी इस नज्म की तारीफ करते हुए कहा था कि काश यह उन्होंने लिखी होती.
जस्टिस बीपी शर्मा ने कहा कि FIR में ऐसा कोई भी सबूत नहीं था, जिससे यह लगे कि नफरत या सांप्रदायिक दुश्मनी फैलाने का कोई इरादा था. कोर्ट ने यह भी कहा,
“याचिकाकर्ता पर जो आरोप लगाया गया है, वह सिर्फ एक पढ़ी गई नज्म का वीडियो पोस्ट करने तक ही सीमित है, जिसमें कोई और टिप्पणी या भड़काऊ बात नहीं थी. और ऐसा कोई भी सबूत नहीं है जिससे यह लगे कि याचिकाकर्ता का इरादा अलग-अलग समुदायों के बीच दुश्मनी भड़काने का था. या यह कि उस वीडियो का मकसद किसी खास समूह को निशाना बनाना था.”
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नज्म किसे कहते हैं?नज्म और कविता एक ही चीज के दो नाम हैं. जैसे हम पानी को 'जल' (हिंदी) या 'वॉटर' (अंग्रेजी) कहते हैं, वैसे ही उर्दू में कविता को 'नज्म' कहा जाता है. नज्म में थोड़े भारी और खूबसूरत उर्दू/फारसी शब्द (जैसे- मोहब्बत, हया, तख़्लीक़) ज्यादा होते हैं. कविता में हिंदी या संस्कृत के शब्द (जैसे- प्रेम, लज्जा, रचना) ज्यादा होते हैं. नज्म या कविता आमतौर पर किसी एक विषय या विचार पर आधारित होती है.
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