कोच का गेट बंद होगा या नहीं, इस बात पर मुंबई लोकल ट्रेन में हत्या हो गई
मुंबई की लोकल ट्रेन में दरवाजे को लेकर एक 30 साल के आदमी ने 22 साल के युवक की चाकू मारकर हत्या कर दी. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं, मामले की जांच की जा रही है.

मुंबई लोकल ट्रेन में छोटी सी बहस पर एक युवक ने दूसरे को चाकू मार दिया, उसकी जान ले ली. बात क्या थी? लोकल ट्रेन के कोच का दरवाज़ा खुला रहेगा या बंद होगा. इतनी सी बात पर ज़बरदस्त झगड़ा हुआ और एक की जान चली गई.
मुंबई में 2 दिन से ज़ोरदार बारिश हो रही है. मॉनसून की पहली बारिश है और हर बार की तरह इस बार भी मुंबई का हाल बेहाल हो चुका है. 23 जून को इसी बारिश के बीच रात में चर्चगेट से नालासोपारा तक चलने वाली लोकल ट्रेन में 2 लोग सवार हुए. 22 साल का मयंक लोहार और 30 साल का रोशन सुवर्णा.
दरवाजे पर बहस हुईक़रीब पौने 11 बजे ट्रेन अंधेरी और बोरीवली स्टेशन के बीच में थी. तभी ट्रेन के फर्स्ट क्लास डिब्बे में इस बात पर बहस शुरू हुई कि कोच का दरवाजा खुला रहेगा या बंद होगा. चूंकि बारिश तेज़ थी तो एक शख़्स दरवाज़ा बंद करने को कह रहा था. दूसरा शख़्स कह रहा था कि नहीं, दरवाज़ा खुला रहेगा.
पुलिस ने बताया है कि इसी बात पर आरोपी रोशन ने चाकू निकाल लिया और मयंक के पेट में मार दिया. ट्रेन के अगले स्टेशन पर रुकने से पहले ही रोशन कूद गया, फरार हो गया. 11 बजे के क़रीब ट्रेन बोरीवली पहुंची. रेलवे पुलिस (यानी GRP) और रेलवे सुरक्षा बल (यानी RPF) की टीमें मौके पर पहुंचीं. मेडिकल स्टाफ को बुलाया गया. मयंक को बोरीवली स्टेशन के मेडिकल रूम ले जाया गया. फर्स्ट एड के बाद एंबुलेंस से कांदिवली के शताब्दी हॉस्पिटल भेजा गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
आरोपी कुर्ला से गिरफ्तार हुआपश्चिम रेलवे ने बताया कि घटना से जुड़े CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्य जांच एजेंसियों को सौंप दिए गए हैं. रेलवे के अधिकारियों ने भी रात में बोरीवली स्टेशन पहुंचकर घटना की समीक्षा की. रेलवे पुलिस मामले की जांच कर रही है. आरोपी रोशन को भी 24 जून को कुर्ला इलाके से पकड़ लिया गया.
घटना के बाद से वो फरार ही चल रहा था. पुलिस ने उसके पिता से कड़ी पूछताछ की. उसे पकड़ने के लिए 6 टीमें गठित कीं, तब जाकर वो पकड़ा गया. आरोपी रोशन मुंबई एयरपोर्ट के कार्गो सेक्शन में काम करता रहा है. वहीं मृतक मयंक एक स्टोर में सेल्समैन का काम करता था. उसके परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. उनकी बहन कह रही हैं कि मेरे भाई का कभी किसी से झगड़ा नहीं होता था, फिर ये सब कैसे हो गया.
धारदार हथियार पर सवालएक और गंभीर सवाल मयंक के परिवार ने उठाया है. कि लोग जानलेवा, धारदार हथियार लेकर ट्रेनों में सफर कर रहे हैं और कोई सिक्योरिटी की या निगरानी की व्यवस्था नहीं है. लोकल ट्रेन मुंबई के लोगों के रोज़मर्रा के ट्रांसपोर्ट के तौर पर बहुत ज़रूरी है. लेकिन इस बात को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता कि एक तो लोकल ट्रेन से गिरकर हर साल कई लोगों की मौत होती है. और लोकल ट्रेनें अपराध का, बदमाशी का भी अड्डा बनती हैं. ख़ासकर रात में चलने वाली लोकल. मयंक का मर्डर इसमें ताज़ा मामला है.
वीडियो: भरत तिवारी के ज़ब्त फोन में कौन से सबूत? भाई चंदन तिवारी ने क्या बताया?


