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'पत्नी ने क्रूरता दिखाई, घर की शांति खत्म की', कोर्ट ने पति को शादी के 30 साल बाद दिलाया तलाक

मुंबई के एक फैमिली कोर्ट ने फैसले में कहा कि सबूत साफ तौर पर दिखाते हैं कि पत्नी ने घर की इमोशनल स्टेबिलिटी (शांति) को खत्म कर दिया. कोर्ट ने कहा कि पत्नी का बर्ताव पति के खिलाफ शारीरिक और मानसिक रूप से क्रूरता वाला था.

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mumbai family court grants divorce on cruelty grounds after 30 year marriage case
फैमिली कोर्ट ने पति के दावों को सही मानते हुए तलाक की मंजूरी दे दी. (Photo: ITG/File)
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सचिन कुमार पांडे
25 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 02:45 PM IST)
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मुंबई में एक फैमिली कोर्ट ने एक पति को शादी के 30 साल बाद इसलिए तलाक की मंजूरी दे दी, क्योंकि उसकी पत्नी उसके साथ बहुत क्रूरता करती थी. कोर्ट ने कहा कि पत्नी का बर्ताव पति के खिलाफ शारीरिक और मानसिक रूप से क्रूरता वाला था. कोर्ट ने तलाक का फैसला सुनाते हुए कहा कि एक पति या पत्नी से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वो चरित्र हनन और झूठे इल्जामों के बीच शादी का रिश्ता बनाए रख सकें.

कोर्ट ने अपने फैसले में आगे कहा कि अलग रह रही पत्नी का गंभीर किस्म के झूठे, लापरवाह और बेबुनियाद आरोप लगाना अपने आप में मानसिक प्रताड़ना है. इसके बाद कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट के सेक्शन 13(1)(ia)(ib) के तहत क्रूरता और छोड़ देने के आधार पर पति को तलाक की मंजूरी दे दी. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक जज देवेंद्र एम उपाध्याय ने पिछले महीने फैसला सुनाया था, जिसका ऑर्डर हाल ही में 24 फरवरी को उपलब्ध कराया गया.

क्या है पूरा केस?

रिपोर्ट के अनुसार यह मामला 55 साल के एक बिजनेसमैन की याचिका से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कोर्ट में तलाक की अर्जी दायर करते हुए आरोप लगाया कि उनकी पत्नी ने सालों तक उनके साथ शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक क्रूरता की. याचिकाकर्ता पति के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि दंपति के बीच 18 साल कोई शादीशुदा रिश्ता नहीं था. उनके क्लाइंट यानी पति ने अपने बच्चों और बूढ़े मां-बाप के लिए सब कुछ सहा.

पति के वकीलों ने दलील दी कि पत्नी ने बार-बार बेबुनियाद और झूठे आरोप लगाए, जिससे उन्हें गंभीर मानसिक पीड़ा, इमोशनल ट्रॉमा और बेइज्जती सहनी पड़ी. इस आधार पर वकीलों ने कोर्ट से शादी को खत्म करने की मांग की. हालांकि पत्नी के वकील ने इन आरोपों से इनकार किया और आरोप लगाया कि पति खूब शराब पीता था और बिना गुजारा भत्ता दिए पत्नी को छोड़ दिया था.

पति ने लगाए प्रताड़ना के आरोप

रिपोर्ट के अनुसार दोनों ने जून 1996 में शादी की थी. शादी के बाद उनके दो बच्चे हुए. पति ने कोर्ट को बताया कि पत्नी ने 1997 में पहली प्रेग्नेंसी के दौरान असामान्य, आक्रामक और हिंसक व्यवहार किया. पति के मुताबिक पत्नी ने बिना उकसावे के उस पर और उसकी मां पर हमला किया. वहीं याचिका में बताया गया कि मई 1998 में पत्नी ने बच्चे को मारने की धमकी दी थी.

पति का आरोप था कि पत्नी अक्सर सुसाइड की धमकी देती थी. पति का कहना है कि इसके बाद उसने पत्नी को दूसरे शहर में उसके माता-पिता के साथ रहने के लिए भेज दिया. पति के मुताबिक बाद में वह वापस लौटी तो उसका गुस्सा और बढ़ गया. पति ने दावा किया कि पत्नी ने साइकेट्रिक मदद लेने से भी इनकार कर दिया और उसके खिलाफ फर्जी केस करने की धमकी दी.

याचिका में दावा किया गया कि 2012 से पत्नी को एक दूसरा फ्लैट दिया गया था, इसके बावजूद उसने उसने कोविड के समय में झूठा भरोसा देकर पति के घर पर जबरन कब्जा कर लिया, जिससे उसकी ज़िंदगी मुश्किल हो गई. पति के मुताबिक इसके बाद उसे पुलिस में शिकायत दर्ज करानी पड़ी और 2022 में उसने तलाक की अर्जी दी. कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दिए गए सबूतों, गवाही, मेडिकल रिपोर्ट और रिकॉर्ड में मौजूद तथ्यों को देखने के बाद पति के दावों को भरोसा करने लायक माना.

कोर्ट ने सही पाए दावे

कोर्ट ने कहा कि पत्नी अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस और भरोसेमंद सबूत नहीं दे सकी. न ही अपना पक्ष साबित करने के लिए किसी पड़ोसी, रिश्तेदार या अन्य गवाह को पेश किया. कोर्ट ने माना कि पत्नी ने जानबूझकर पति को गलत तरीके से क्रूर और गैर-जिम्मेदार दिखाने की कोशिश की. जज के मुताबिक पत्नी के आरोप पति के सम्मान के खिलाफ हैं और बहुत गंभीर हैं. ये आरोप याचिकाकर्ता पति की सामाजिक स्थिति और चरित्र पर असर डालने वाले हैं.

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कोर्ट ने फैसले में कहा कि सबूत साफ तौर पर दिखाते हैं कि पत्नी ने घर की इमोशनल स्टेबिलिटी (शांति) को खत्म कर दिया. बच्चों को साइकोलॉजिकल नुकसान पहुंचाया. पति के माता-पिता की अच्छे से देखभाल नहीं की और पति के साथ क्रूरता की जिससे उन्हें बहुत ज्यादा मानसिक परेशानी हुई. 

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