मुंबई के ऑटो ड्राइवर की कमाई पूछ ली, बीटेक ग्रेजुएट लड़के के कान गरम हो गए!
वीडियो एक ऐसे शहर का है, जो अपनी तेज रफ्तार और महंगी जीवनशैली के लिए जाना जाता है. इसी शहर के सड़क पर दौड़ती एक ऑटो में एक इंजीनियर सवार है.

‘मुंबई में ऑटो चला लो बढ़िया है.’ ये बीटेक ग्रेजुएट के मुंह से फूटे बोल हैं, जब उसने मुंबई के एक ऑटो वाले की कमाई जान ली. ऑटो वाले ने बताया कि औसतन वह रोज 2500 रुपये कमा रहा है. ये सुनकर इंजीनियर साहब को अपनी पहली सैलरी याद आ गई. वो बोला कि अपनी पहली नौकरी में वह भी इतना नहीं कमाता था. ऑटो वाले से उसकी बातचीत का ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है.
वीडियो एक ऐसे शहर का है, जो अपनी तेज रफ्तार और महंगी जीवनशैली के लिए जाना जाता है. इसी शहर की एक सड़क पर दौड़ते ऑटो में एक इंजीनियर सवार है. वह ऑटो ड्राइवर से बात कर रहा है. बातचीत शुरू होती है मुंबई में बढ़ती महंगाई से. ऑटो ड्राइवर से वो कहता है कि शहर इतना महंगा है कि लोग यहां बसना नहीं चाहते. इसके जवाब में ऑटो ड्राइवर ने उसे जो समझाया, उसे नोट कर लेना चाहिए.
इंजीनियर युवक वीडियो में कहता है, “मेरी अभी भैया (ऑटो ड्राइवर) से बात हो रही थी. मैं कह रहा था, यार मुंबई शहर बड़ा महंगा है. कहते हैं, महंगा है लेकिन यहां पे पैसा इतना है कि बरसता है. बस पकड़ने वाले की दिक्कत है.”
यानी पैसा किसी भी व्यक्ति कि मेहनत करने की क्षमता पर है. शहर में अवसर और पैसे की कोई कमी नहीं है. बातचीत आगे बढ़ती है ड्राइवर के एक ऐसे खुलासे से, जो कोई नहीं सोच सकता था. उसने बताया कि उसकी हर दिन कि कमाई औसतन 2500 रुपये है. आगे स्पष्ट किया कि फ्यूल, मेंटेनेंस और अन्य खर्चों को हटाने के बाद ये उनकी शुद्ध इनकम है.
ये सुनकर बीटेक इंजीनियर के कान के पर्दे खुल जाते हैं. मुंह से यही जवाब निकलता है कि बीटेक के बाद इतनी सैलरी तो उसकी भी नहीं थी. उसने कहा,
“2500 रुपये रोज तो भाई मैं नहीं कमाता. बीटेक के बाद अगर मेरी पहली नौकरी लगती.”
उसने ऑटो ड्राइवर की सैलरी जोड़ी 75 हजार रुपये महीना. फिर आगे अपने व्यूअर्स से कहा,
“तुम देख लो. घर बैठे रहना है या मुंबई में ऑटो चलाना है. ऑफिस में क्यूबिकल में बैठे हो. यहां रोज जान-पहचान होती है. नेटवर्किंग होती है.”
उसने मजाक में अपने व्यूअर्स को सलाह दी कि ऑटो ही चला लो यार. बढ़िया है.
सोशल मीडिया पर ये वीडियो आते ही वायरल हो गया. लोग इस पर मजे भी लेने लगे. हर्ष नाम के यूजर ने कहा कि वो 16 घंटे मेहनत भी करता होगा.
एक भाई ने सवाल पूछा कि क्या ऊबर (कार) ले लूं.
रहीला शेख नाम की यूजर ने पूछा, भैया के पास टीम मेंबर की वैकेंसी है क्या?
हालांकि, कई लोगों ने गंभीरता से समझाना भी शुरू कर दिया कि कार्पोरेट की नौकरी में और ऑटो चलाने में क्या अंतर है.
एक भाई ने अंग्रेजी में लिखा,
“सैलरी वाली बात सच है. लेकिन बात सिर्फ कमाई की नहीं है. हो सकता है कि किसी ऑटो ड्राइवर की कमाई कुछ महीनों में ज़्यादा हो, लेकिन उसे पूरा दिन सड़कों पर बिताना पड़ता है. गर्मी, ट्रैफिक. काम के कोई तय घंटे नहीं. वहीं 20 से 30 हजार की सैलरी वाली नौकरी में आमतौर पर स्थिरता, एक रूटीन और थोड़ा ज़्यादा आराम मिलता है. अलग-अलग जिंदगी, अलग-अलग समझौते. सिर्फ पैसा ही पूरी कहानी नहीं बताता.”
एक यूजर ने स्पष्ट किया कि ऑटो ड्राइवर का प्रमोशन या स्विच भी नहीं होगा. वो जीवन भर इतना ही कमाएगा.
एक यूजर ने नौकरी को सामाजिक व्यवस्था से जोड़ दिया. कहा कि किसी नौकरी में इज्जत शादी के बाजार पर निर्भर करती है. जब लड़कियां ऐसी नौकरियों वाले लड़कों से शादी करना और उन्हें अपनाना शुरू कर देंगी तो ये नौकरियां अपने-आप ही मुख्यधारा में आ जाएंगी.
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