The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • Mukul Roy former Union Railway Minister passes away after prolonged illness

मुकुल रॉय के निधन पर क्या बोलीं ममता बनर्जी? TMC का चुनाव चिह्न भी इनका दिया हुआ

Mukul Roy Passed Away: पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा के रहने वाले मुकुल रॉय प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने मुकुल रॉय के निधन पर शोक जताया है.

Advertisement
pic
23 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 04:26 PM IST)
Mukul Roy Passed Away
टीएमसी नेता मुकुल रॉय का निधन. (india today)
Quick AI Highlights
Click here to view more

तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय (Mukul Roy Passed Away) का 71 साल की उम्र में निधन हो गया है. वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे और कोलकाता के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती थे. 

मुकुल रॉय के बेटे शुभांशु रॉय ने बताया कि सोमवार, 23 फरवरी की देर रात तकरीबन डेढ़ बजे मुकुल रॉय को दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उनका निधन हो गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने मुकुल रॉय के निधन पर शोक जताया है.

कौन थे मुकुल रॉय?

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा के रहने वाले मुकुल रॉय प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी TMC के संस्थापक सदस्यों में से एक थे. पार्टी में कभी उनका 'नंबर 2' का दर्जा था. पार्टी का चुनाव चिह्न उन्हीं का दिया हुआ है. 

साल 1998 में मुकुल रॉय ने ममता बनर्जी के साथ मिलकर TMC बनाई. इसे बंगाल में खड़ा करने में उनकी अभूतपूर्व भूमिका रही. कांग्रेस के कई नेता उन्हीं के प्रभाव में TMC से जुड़े. पश्चिम बंगाल की राजनीति में अभिषेक बनर्जी के उभार से पहले वही पार्टी में नंबर-2 होते थे. ममता बनर्जी के सबसे विश्वस्त सिपाही के तौर पर काम करते हुए वह राज्य सरकार और संगठन के बीच की कड़ी बने रहे. 

साल 2006 में वह पहली बार राज्यसभा सदस्य बने और दिल्ली में पार्टी के प्रमुख चेहरे के रूप में पहचान बनाई. उन्हें TMC का राष्ट्रीय महासचिव भी बनाया गया. साल 2009 से 2011 तक वह मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय जहाजरानी राज्यमंत्री रहे. 2012 में किराया वृद्धि को लेकर विवाद के बाद तत्कालीन रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी ने इस्तीफा दे दिया. इसके बाद मुकुल रॉय को रेलमंत्री बनाया गया. 2012 के मार्च से सितंबर तक वो इस पद पर रहे.

साल 2016 के बाद से मुकुल रॉय और TMC के बीच मतभेद उभरने लगे. उन्हें राष्ट्रीय महासचिव के पद से भी हटा दिया गया. इसी दौरान चिटफंड घोटाले की जांच में भी वह फंसे और केंद्रीय एजेंसियों ने उन्हें तलब किया. नवंबर 2017 में मुकुल TMC छोड़ भाजपा में शामिल हो गए. पार्टी को इसका फायदा भी मिला. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उनकी मदद से चुनाव लड़ा और 42 में से लोकसभा की 18 सीटें जीत लीं. 

साल 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वह बीजेपी के टिकट पर कृष्णानगर उत्तर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़े और जीते. हालांकि, उसी साल वह TMC में वापस लौट आए. लेकिन अपनी विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया. दल-बदल कानून के तहत उनकी सदस्यता को रद्द करने का मामला कोर्ट में भी गया, लेकिन विधायकी गंवाने से वो बचे रहे.

ममता-मोदी ने जताया दुख

बीमार होने की वजह से 'बंगाल के चाणक्य' कहे जाने वाले मुकुल रॉय लंबे समय से राजनीति से दूर थे. उनके निधन पर सीएम ममता बनर्जी ने शोक व्यक्त किया है. उन्होंने कहा, 

मैं वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय के अचानक निधन की खबर से बहुत स्तब्ध और दुखी हूं. वह मेरे लंबे समय के राजनीतिक सहयोगी थे और कई राजनीतिक संघर्षों में एक कॉमरेड-इन-आर्म्स थे. उनके जाने की खबर ने मेरा दिल तोड़ दिया है.

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री मुकुल रॉय के निधन से वे दुखी हैं. पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा कि मुकुल रॉय को उनके राजनीतिक अनुभव और समाज की सेवा के प्रयासों के लिए याद किया जाएगा. 

वीडियो: JNU में VC की टिप्पणी पर बवाल, इस्तीफ़े की मांग कर रहे छात्रों पर हुई पत्थरबाज़ी?

Advertisement

Advertisement

()