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'हत्या से एक दिन पहले...', मुकेश चंद्राकर मर्डर केस की चार्जशीट से क्या पता चला?

Chhatisgarh के पत्रकार Mukesh Chandrakar की हत्या के मामले में पुलिस ने Chargesheet फाइल कर दी है. पुलिस की चार्जशीट में सुरेश चंद्राकर उसके भाई दिनेश और रितेश चंद्राकर और महेंद्र रामटेके का नाम शामिल है. इस मामले में 72 गवाह हैं.

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Mukesh Chandrakar murder suresh chandrakar
मुकेश चंद्राकर हत्याकांड में पुलिस ने चार्जशीट फाइल कर दी है. (इंडिया टुडे, फाइल फोटो)
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आनंद कुमार
19 मार्च 2025 (पब्लिश्ड: 02:44 PM IST)
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छत्तीसगढ़ की बीजापुर पुलिस ने पत्रकार मुकेश चंद्राकर मर्डर (Mukesh Chandrakar Murder) केस में चार्जशीट फाइल कर दी है. 1200 पन्नों से ज्यादा की चार्जशीट में चार लोगों को आरोपी बनाया गया है. चार्जशीट के मुताबिक मुख्य आरोपी ठेकेदार सुरेश चंद्राकर ने मुकेश की हत्या करवाई थी. उनकी हत्या घटिया सड़क निर्माण के काम को उजागर करने के चलते की गई थी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मुकेश चंद्राकर की हत्या 1 जनवरी की रात को हुई थी. इसी तारीख से वो लापता चल रहे थे. दो जनवरी को उनके भाई ने उनके लापता होने की शिकायत पुलिस में की थी. तीन जनवरी को पुलिस ने सुरेश चंद्राकर के सेप्टिंक टैंक से मुकेश का शव बरामद किया था.

पुलिस के मुताबिक, सुरेश के भाई रितेश और एक कर्मचारी महेंद्र रामटेके ने हत्या को अंजाम दिया था. पुलिस ने बताया कि मुकेश को कई बार लोहे की रॉड से मारा गया. और उनके शव को टैंक में फेंक कर उसे कंक्रीट से ढक दिया गया.

मुकेश के गुमशुदगी की जांच करते वक्त पुलिस को मुकेश के मोबाइल की आखिरी लोकेशन सुरेश चंद्राकर की प्रॉपर्टी पर मिली. उस जगह पर 14 कमरे और एक बैडमिंटन कोर्ट है. तलाशी के दौरान टैंक पर ताजा बिछाए क्रंक्रीट के कवर को देखकर पुलिस को शक हुआ. और फिर टैंक की तलाशी में मुकेश का शव बरामद हुआ.

इसके बाद पुलिस ने आरोपी रितेश की तलाश शुरू की जिसने उस रात मुकेश को मिलने के लिए बुलाया था. जांच के दौरान पता चला कि आरोपी मुकेश से नाराज थे. क्योंकि उसने बीजापुर में घटिया सड़क निर्माण को लेकर NDTV की एक न्यूज रिपोर्ट की थी. रिपोर्ट के बाद इस सड़क प्रोजेक्ट पर जांच शुरू हो गई. साथ ही सुरेश चंद्राकर के दो और प्रोजेक्ट भी जांच के घेरे में आ गए. इन तीनों प्रोजेक्ट्स की अनुमानित लागत लगभग 170 करोड़ रुपये थी.

पुलिस की चार्जशीट में सुरेश चंद्राकर के भाई दिनेश और रितेश चंद्राकर व महेंद्र रामटेके का नाम शामिल है. इस मामले में 72 गवाह हैं. साथ ही सीसीटीवी फुटेज और कॉल डेटा रिकॉर्ड एनालिसिस को भी सबूत के तौर पर शामिल किया गया है. हत्या की जांच के लिए गठित SIT का नेतृत्व करने वाले ASP मयंक गुर्जर ने बताया, 

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हत्या के मकसद के बारे में पूछे जाने पर एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि सुरेश चंद्राकर मुकेश से नाराज था, क्योंकि उन्होंने घटिया सड़क निर्माण के काम को उजागर किया था. उनकी खबर के चलते सुरेश से जुड़े परिसरों पर GST के छापे पड़े. और उस पर करीब 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया. अधिकारी ने आगे बताया कि हत्या से पहले सुरेश ने मुकेश को कई बार फोन किया था. उसे चिंता थी कि उसका साम्राज्य बिखर जाएगा. 

उनके मुताबिक हत्या से कुछ दिन पहले सुरेश ने मुकेश को बीजापुर स्थित अपने घर पर मिलने के लिए बुलाया था. यहां उसने कुछ लोगों की मौजूदगी में मुकेश को धमकाया. और आगे इस मामले पर कोई रिपोर्ट नहीं करने को कहा. इस दौरान सुरेश अपने ठिकानों पर पड़े GST छापे के लिए रिपोर्ट को दोषी ठहरा रहा था.

मुकेश बस्तर के जाने माने पत्रकार थे. कोर नक्सल इलाके से फील्ड रिपोर्ट चलते उनकी एक पहचान बनी थी. उन्होंने बस्तर जंक्शन नाम से अपना एक यूट्यूब चैनल शुरू किया था. 

वीडियो: वो सड़क.. जिसकी रिपोर्टिंग के बाद पत्रकार मुकेश चंद्राकर की जान ले ली गई

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