The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • India
  • mp student Won His Case In Supreme Court Admission to EWS students in MBBS

‘बस 10 मिनट दीजिए सर...’, 19 साल का छात्र बिना वकील लड़ा अपना केस, SC में पलट गया फैसला

Jabalpur के रहने वाले अथर्व चतुर्वेदी ने NEET एग्जाम दो बार क्वालिफाई किया और 530 नंबर स्कोर किए. इसके बावजूद, प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में EWS आरक्षण लागू न किए जाने की वजह से उन्हें सीट नहीं मिल सकी थी. अब वो बिना वकील के अपना केस सुप्रीम कोर्ट में लड़ने पहुंचे.

Advertisement
mp student Won His Case In Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश संविधान के आर्टिकल 142 के तहत विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए दिया. (फाइल फोटो: आजतक)
pic
अर्पित कटियार
14 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 14 फ़रवरी 2026, 12:05 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

इसी फरवरी महीने की एक दोपहर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई लगभग खत्म होने वाली थी, तभी एक 19 साल के छात्र ने कोर्ट से 10 मिनट का समय मांगा. यह छात्र कोई वकील नहीं, बल्कि NEET क्वालिफाइड कैंडिडेट था, जो डॉक्टर बनना चाहता है. कुछ ही मिनटों में मामला पलट गया. कोर्ट ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और मध्य प्रदेश सरकार को आदेश दिया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के योग्य छात्रों को MBBS में प्रोविजनल प्रवेश दिया जाए.

क्या है पूरा मामला?

NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश संविधान के आर्टिकल 142 के तहत विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए दिया. 12वीं पास अथर्व चतुर्वेदी (19) मध्यप्रदेश के जबलपुर के रहने वाले हैं. उन्होंने NEET एग्जाम दो बार क्वालिफाई किया था और 530 नंबर स्कोर किए थे. इसके बावजूद, राज्य सरकार द्वारा निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS आरक्षण लागू न किए जाने की वजह से उन्हें सीट नहीं मिल सकी थी.

छात्र ने यह मामला खुद सुप्रीम कोर्ट में उठाया और विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अथर्व ने जबलपुर से ही ऑनलाइन याचिका दायर की और ऑनलाइन सुनवाई के दौरान बिना वकील के कोर्ट में पेश हुए. CJI सूर्यकांत ने जब उनसे पूछा कि क्या वे खुद बहस करेंगे, तो अथर्व ने हामी भरी.

Image embed
अथर्व चतुर्वेदी को सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत (सोशल मीडिया)

‘मुझे बस 10 मिनट दीजिए, सर,’ यह कहते हुए उन्होंने अपनी बात रखनी शुरू की. अथर्व ने तर्क दिया कि संविधान की मूल भावना EWS जैसे वंचित वर्गों को अवसर प्रदान करने की है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी हवाला दिया.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जब राज्य के वकील ने प्राइवेट कॉलेजों के संबंध में नीति के विचाराधीन होने का जिक्र किया, तो चीफ जस्टिस ने कहा, 

Image embed

वकील ने आगे कहा, "हमारी चिंता यह है कि छात्र का बाद में शोषण न हो." इस पर चीफ जस्टिस ने जवाब दिया, "आप उस प्राइवेट कॉलेज को हमारे सामने लाएं!" जब राज्य के वकील ने इस बात पर जोर दिया कि दिशानिर्देश बनाने की प्रक्रिया जारी है, तो चीफ जस्टिस ने कहा, “इस लड़के (याचिकाकर्ता) का भविष्य बर्बाद मत कीजिए.”

कुछ ही मिनटों के भीतर कोर्ट ने आदेश पारित कर दिया. कोर्ट ने माना कि केवल नीतिगत खामियों के कारण योग्य छात्र को प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता. सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि केवल इस आधार पर एडमिशन से इनकार नहीं किया जा सकता कि राज्य सरकार ने प्राइवेट कॉलेजों में EWS आरक्षण लागू नहीं किया है. इसके बाद कोर्ट ने 2025–26 सत्र के लिए फीस भरने की शर्त पर अस्थायी (प्रोविजनल) एडमिशन देने का आदेश दिया.

ये भी पढ़ें: मेडिकल कॉलेज का फॉर्म भरते समय जो गरीब था, उसने एक करोड़ की फीस भर एडमिशन ले लिया

कोर्ट ने राज्य सरकार को सात दिनों के भीतर कॉलेज अलॉट करने को भी कहा है. हालांकि, प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में EWS श्रेणी की फीस तय न होने से छात्र के परिवार की आर्थिक चिंता अभी बनी हुई है. अथर्व के पिता मनोज चतुर्वेदी पेशे से वकील हैं. अथर्व ने एक सरकारी स्कूल से पढ़ाई की है. यहां तक कि उनका सिलेक्शन जबलपुर सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में भी हो गया. इसके बावजूद उन्होंने मेडिकल क्षेत्र को चुना.

इससे पहले, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि इसी तरह की एक याचिका पहले भी खारिज की जा चुकी है, और राज्य सरकार को निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS सीटों को बढ़ाने के लिए 1 साल का समय दिया था, जो अभी समाप्त नहीं हुआ है. हालांकि, जज अथर्व की दलीलों से काफी प्रभावित हुए थे और तारीफ करते कहा था, “आपको वकील बनना चाहिए, डॉक्टर नहीं. आप गलत क्षेत्र में हैं.” 

हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद अथर्व ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. यह मामला न सिर्फ एक छात्र की राहत का है, बल्कि उन EWS उम्मीदवारों के लिए भी अहम माना जा रहा है जो नीतिगत अस्पष्टता के कारण अब तक दाखिले से वंचित रह गए थे.

वीडियो: MBBS एडमिशन के लिए छात्र ने अपना ही पंजा काट दिया, ऐसे खुली पोल

Advertisement

Advertisement

()